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Solar Cycle: क्या सूर्य पर होने वाले विस्फोटों के कारण पृथ्वी पर आती हैं महामारियां और होते हैं युद्ध?

Sankalp Singh संकल्प सिंह
Updated Thu, 18 Aug 2022 01:27 PM IST
सार

हमारे जीवन के तार भी इसी ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़े हैं। क्या समय और स्पेस की चादर पर बिखरी आकाशगंगाओं, तारों और सूर्य पर होने वाली हलचल का असर पृथ्वी और हम सब के जीवन पर पड़ता है?

जीवन एक घटना है। इसमें जो कुछ भी हो रहा है उसका सीधा संबंध ब्रह्मांडीय तारों, नक्षत्रों और नेबूला के
जीवन एक घटना है। इसमें जो कुछ भी हो रहा है उसका सीधा संबंध ब्रह्मांडीय तारों, नक्षत्रों और नेबूला के - फोटो : Istock
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विस्तार

"जीवन एक घटना है। इसमें जो कुछ भी हो रहा है उसका सीधा संबंध ब्रह्मांडीय तारों, नक्षत्रों और नेबूला के स्पंदन से जुड़ा है। ये पूरा ब्रह्मांड एक कॉस्मिक यूनिटी है। यहां हर एक चीज दूसरी चीज को प्रभावित कर रही है।" सालों पहले कॉस्मो बायोलॉजी की दिशा में काम करने वाले महान वैज्ञानिक एलेक्जेंडर चीजेवस्की द्वारा कही गई ये बात ब्रह्मांड, जीवन और हमारे आसपास जो हो रहा है। उसको लेकर जहन में कई सवाल पैदा करती है।  



हमारे जीवन के तार भी इसी ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़े हैं। क्या समय और स्पेस की चादर पर बिखरी आकाशगंगाओं, तारों और सूर्य पर होने वाली हलचल का असर पृथ्वी और हम सब के जीवन पर पड़ता है?


आखिर रहस्यमय अंतरिक्ष की फील्ड्स, फोर्सेस, टाइम और स्पेस के फेबरिक कहीं न कहीं हमारे भीतर से भी होकर गुजर रहे हैं। तारों में होने वाले विस्फोटों के कारण अंतरिक्ष में जो हलचल (Ripple) पैदा होती है। उसका कहीं न कहीं सूक्ष्मतर प्रभाव हमारी मनोव्यवस्था और जीवन पर भी पड़ता होगा?

सालों पहले तत्कालीन सोवियत संघ के वैज्ञानिक एलेक्जेंडर चीजेवस्की ने अपनी खोज में इन्हीं सवालों को खंगाला था। इस महान वैज्ञानिक ने अपने शोध में इस बात को वैज्ञानिक ढंग से प्रमाणित किया कि पृथ्वी पर जन्म लेने वाली महामारियों और क्रांतियों का संबंध सूर्य पर होने वाले विस्फोटों से है। ये बातें आपको अटपटी जरूर लग रही हैं, लेकिन चीजेवस्की ने विगत कई सालों के इतिहास में महामारियों, युद्धों और क्रांतियों का संबंध सूर्य पर होने वाले विस्फोटों के साथ जोड़ा था।

चीजेवस्की ने अपने कई सालों की खोज में इस बात का उल्लेख किया था कि सूर्य जब-जब 11 सालों में अपनी सोलर साइकिल को बदलता है, पृथ्वी पर तब-तब युद्ध और महामारियां जैसी स्थिति जन्म लेने लगती हैं।

चीजेवस्की ने अपनी रिसर्च में वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ बताया कि सूर्य पर होने वाली घटनाएं और उसका ज्योमैग्नेटिक ओस्किलेशन पर जो असर पड़ता है। उससे पृथ्वी पर रह रहे इंसानों का मनोविज्ञान सीधे तौर पर प्रभावित होता है।

चीजेवस्की की इस खोज को गहराई से समझने से पहले आपको सूर्य की 11 सालों की सोलर साइकिल को समझना होगा।

हर 11 साल में सूर्य अपने साइकिल को पूरा करके सोलर मिनिमम और मैक्सिमम फेस से गुजरता है।
हर 11 साल में सूर्य अपने साइकिल को पूरा करके सोलर मिनिमम और मैक्सिमम फेस से गुजरता है। - फोटो : Istock

क्या है सोलर साइकिल?

सूर्य हर 11 सालों में अपनी मैग्नेटिक फील्ड को बदलता है। अर्थात हर 11 सालों में सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव अपने आपको विपरीत दिशा में बदल लेते हैं। सोलर साइकिल की इस अवधि में सूर्य पर जब बड़े-बड़े डार्क स्पॉट का निर्माण होता है। उस पीरियड को सोलर मैक्सीमम के नाम से जाना जाता है। सोलर मैक्सीमम की अवधि में डार्क स्पॉट बनने के कारण सूर्य से बड़ी मात्रा में सोलर फ्लेयर, कोरोनल मास इजेक्शन और ऊर्जा का रिसाव अंतरिक्ष में होता है।

वहीं जैसे-जैसे ये डार्क स्पॉट छोटे होने लगते हैं उस फेस को सोलर मिनीमम कहा जाता है। बीते सालों में आपने कई बार सोलर फ्लेयर, सोलर स्ट्रोम और कोरोनल मास इजेक्शन के बारे में जरूर सुना होगा।

चीजेवस्की के मुताबिक सूर्य पर जब-जब पीरियोडिकली 11 साल बाद ये विस्फोट होते हैं, तब-तब पृथ्वी पर असंतोष की स्थिति जन्म लेने लगती है। चीजेवस्की ने बताया था कि सूर्य पर होने वाले इन पीरियोडिकली विस्फोट के कारण पृथ्वी के वातावरण में नकारात्मक आयनीकरण (Negative Ionization) होने लगता है। इससे इंसानों की उत्तेजना काफी बढ़ जाती है।

चीजेवस्की के मुताबिक हमारा पूरा इतिहास सूर्य पर हर 11 सालों में उभरने वाले डार्क स्पॉट और उनसे निकलने वाले सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन से प्रभावित है। इसी की वजह से पृथ्वी पर गृह युद्ध, क्रांतियां और एक दूसरे देशों के बीच आपसी तनाव की स्थिति पैदा होती है। चीजेवस्की ने अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए 500 BCE से लेकर 1922 CE के बीच सूर्य पर हर 11 सालों में होने वाले विस्फोट और उनका पृथ्वी पर आने वाली महामारियों और युद्धों से क्या संबंध रहा? इस विषय पर गहराई से अध्ययन करके कई साक्ष्य प्रस्तुत किए।

इस वैज्ञानिक ने कॉस्मो बायोलॉजी की दिशा में कई बड़े काम किए। चीजेवस्की द्वारा की गई अधिकतम खोजों का लेखा-जोखा रूसी भाषा में है। हालांकि, बाद में इसको अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। दुनियाभर में चीजेवस्की के रिसर्च को व्यापक तौर पर स्वीकृति मिली है।

गौरतलब है कि इस महान वैज्ञानिक को कम्यूनिस्ट विचारधारा के विरुद्ध की खोज को देखते हुए, तत्कालीन सोवियत संघ के शासक जोसेफ स्टालिन ने साइबेरिया की गुलग जेल में बंद कर दिया था। चीजेवस्की ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा इसी जेल में व्यतीत किया। जोसेफ स्टालिन की जब मृत्यु हुई उसके बाद ही यह वैज्ञानिक जेल से रिहा हो पाया। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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