SL vs IND: आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का फर्क बता गई टी-20 सीरीज

Vimal Kumar विमल कुमार
Updated Fri, 30 Jul 2021 09:35 PM IST

सार

आखिरकार, पिछली 8 सीरीज से चलता आ रहा जीत का सिलसिला श्रीलंका में रुक गया। दो देशों के बीच होने वाली टी-20 सीरीज में भारत करीब 2 साल से एक भी सीरीज नहीं हारा था
भारतीय क्रिकेट टीम
भारतीय क्रिकेट टीम - फोटो : twitter@BCCI
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विस्तार

आखिरकार, पिछली 8 सीरीज से चलता आ रहा जीत का सिलसिला श्रीलंका में रुक गया। दो देशों के बीच होने वाली टी-20 सीरीज में भारत करीब 2 साल से एक भी सीरीज नहीं हारा था और शायद विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह जैसे नियमित सुपरस्टार के नहीं होने के बावजूद श्रीलंका में भी जीत का रथ नहीं रुकता अगर कोरोना के चलते आखिरी दो मैचों में टीम इंडिया का संतुलन पूरी तरह से खराब नहीं होता। अब खुद ही सोचिए कि जिस बल्लेबाजी क्रम में भुवनेश्वर कुमार को छठे नंबर पर आना पड़े तो उस टीम की मजबूरी क्या रही होगी। 
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बहरहाल, हार के बावजूद टीम को कोच राहुल द्रविड़ ने अपनी छवि के मुताबिक कोई बहाना नहीं ढूंढा। इतनी सारी परेशानी और मुश्किलों के बावजूद द्रविड़ का मानना था कि युवाओं का खेल सराहनीय रहा। अब आप खुद सोचिए कि अगर द्रविड़ की जगह कोच के तौर पर इस टीम के साथ रवि शास्त्री या कोई और होता तो क्या कहता? मुमकिन था ज्यादातर कोच बहुत ही आसान दलील के जरिए इस नतीजे को धुंधला कर देते। लेकिन, क्या इस सीरीज हार के लिए सिर्फ टीम इंडिया की प्लेइंग इलवेन में संतुलन और अनुभव की कमी होना रहा है? शायद ये बात पूरी तरह से सही नहीं हो। 

टेस्ट क्रिकेट और वन-डे क्रिकेट में ये बात तो निश्चित तौर पर लागू होती है कि आपको एक संतुलित और अनुभवी टीम की जरुरत होती है लेकिन टी-20 जैसे फॉर्मेट में अक्सर मैच का नतीजा एक या दो खिलाड़ियों के असाधारण खेल पर ही तय हो जाता है। ऐसे में अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान शिखर धवन का लगातार दो मैचों में नाकाम होना, उप-कप्तान भुवनेश्वर कुमार का अपने टॉप फॉर्म में नहीं रहना भी एक बड़ी वजह रही हार की। 

संजू सैमसन जो आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में इतनी सनसनी फैलातें हैं, वो इस बेशकीमती मौके का फायदा उठाने में चूके जिससे ना सिर्फ उनका निजी नुकसान हुआ बल्कि उनकी टीम को भी परेशानी हुई। देवदत पड्डीकल, रितुराज गायकवाड और नितीश राना जैसे आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के स्टार को शायद आने वाले कई सालों तक टीम इंडिया की जर्सी इतनी आसानी से पहनने को नहीं मिले। किस्मत के चलते मिले दो-दो मौकों पर चौका लगाने में ये नाकाम रहे। इस बात ने एक बार फिर साबित किया कि आईपीएल तो आईपीएल ही होती है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट एक अलग स्तर की क्रिकेट।

तो क्या हुआ अगर श्रीलंका की टीम मौजूदा समय में टी-20 फॉर्मेट में सबसे मजबूत टीम नहीं है। सिक्के का दूसरा पहलू तो ये भी है कि मेजबान भी अलग-अलग कारणों के चलते अपने कई अहम खिलाड़ियों को इस सीरीज़ में नहीं खिला पा रही थी। और ऐसे में कहीं ना कहीं मामला एक तरह से बराबरी का ही था,  भले ही आप धवन की टीम को बी टीम ना कहकर सी टीम कह लें। भारत के पास असीम प्रतिभाओं का जो संसाधन उपलब्ध है उसकी तुलना न्यूज़ीलैंड और श्रीलंका जैसे मुल्कों से तो हो ही नहीं सकती है। 

पूराने दौर में आप अनुभव की कमी और एकस्पोज़र की कमी जैसे तर्क दे सकते थे लेकिन जब भारत की नई पीढ़ी आईपीएल जैसे हाई-प्रोफाइल टूर्नामेंट में दिग्गज खिलाड़ियों के साथ अक्सर खेलते हुए अपनी फ्रैंचाइजी को मैच जिता देती है तो वही काम वो अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में क्यों नहीं कर पाए? इसलिए ये बात फिर से सही साबित होती है कि टीम चाहे कितनी भी फिसड्डी दिख रही हो, अंतराष्ट्रीय मंच पर उसको कभी हल्के तौर पर नहीं लिया जा सकता है।
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