उत्तराखंड में कोरोना: मंगलवार को मिले 19 नए संक्रमित, एक भी मरीज की मौत नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 14 Sep 2021 09:46 PM IST

सार

Corona cases in Uttarakhand Today: मंगलवार को प्रदेश में तीन जिलों रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है।
कोरोना वायरस की जांच
कोरोना वायरस की जांच - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 19 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। जबकि 26 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 285 पहुंच गई है।
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उत्तराखंड: 17 सितंबर को चलेगा महा टीकाकरण अभियान, एक हजार केंद्रों पर दो लाख लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य


स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार को 19018 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। तीन जिलों रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी में एक-एक, देहरादून में आठ, नैनीताल और पिथौरागढ़ में दो-दो संक्रमित मरीज मिले हैं। 

प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 343261 हो गई है। इनमें से 329521 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7389 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश की रिकवरी दर 96 प्रतिशत और संक्रमण दर 0.10 प्रतिशत दर्ज की गई है। 

21 वेंटिलेटर मिले, लेकिन सभी बंद पड़े

कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के नाम पर ऋषिकेश में सरकारी अस्पतालों को केवल चिकित्सा उपकरण थमाए जा रहे हैं। एसपीएस राजकीय अस्पताल को गंभीर कोविड मरीजों के इलाज के लिए 21 वेंटिलेटर मिले थे। लेकिन सभी वेंटिलेटर बंद पड़े है। वेंटिलेटर के संचालन के लिए अस्पताल के पास विशेषज्ञ और प्रशिक्षित स्टाफ ही नहीं है।

सरकार कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से निपटने की पुख्ता तैयारी का दावा कर रही है। लेकिन सरकार की कोविड व्यवस्थाएं केवल अस्पतालों को चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित है। एसपीएस राजकीय अस्पताल में गंभीर कोविड मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 21 वेंटिलेटर मिले थे।

अस्पताल में सभी वेंटिलेटर स्थापति कर दिए गए थे। लेकिन दूसरी लहर के दौरान ये वेंटिलेटर अस्पताल में केवल शोपीस बन रहे। असल में वेंटिलेटर के संचालन के लिए एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है।

तीन शिफ्ट में वेंटिलेटर बेड के संचालन के लिए अस्पताल को दो एनेस्थेटिक, 10 टेक्नीशियन और आठ प्रशिक्षित स्टाफ नर्स की जरूरत है। लेकिन अस्पताल के पास एक भी एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन या प्रशिक्षित स्टाफ नर्स नहीं है। ऐसे में अगर तीसरी लहर आती है सभी वेंटिलेटर एक बार फिर केवल कबाड़ साबित होंगे।

सीएमओ को पत्र लिख एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और प्रशिक्षित स्टाफ की मांग की गई है। विशेषज्ञ प्रशिक्षित स्टाफ मिलने के साथ वेंटिलेटर बेड की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
- डॉ. विजयेश भारद्वाज, सीएमएस, एसपीएस राजकीय अस्पताल

कोविड नियमों के पालन को मंडलायुक्त होंगे जिम्मेदार

आगामी 17 सितंबर को कोविड टीकाकरण महा अभियान को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वर्चुअल बैठक ली। बैठक में उन्होंने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी जिलों के डीएम को जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि राज्य में कोविड नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी दोनों मंडलायुक्तों को सौंपी गई है।

बैठक में बताया गया कि इस अभियान के तहत प्रदेशभर में एक हजार केंद्रों पर वैक्सीन की पहली व दूसरी डोज लगाई जाएगी। मंत्री डॉ. रावत ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने जिलों में कम से कम 25 स्थानों पर वैक्सीनेशन कैंप आयोजित करवाएं। इसके अलावा बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों तथा मजदूर बाहुल्य क्षेत्रों में शिविर लगा कर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया जाए।

अभियान को सफल बनाने के लिए आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, स्वयं सेवी संगठन, तहसील एवं विकास खंड स्तर के फील्ड कर्मचारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, वार्ड सदस्यों का सहयोग लिया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी सूरत में दिसंबर तक शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन का लक्ष्य हासिल करना चाहती है, जिसके लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

बैठक में सचिव अमित नेगी ने दोनों मंडलायुक्तों को राज्य में कोविड नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडलायुक्त अपने स्तर से पुलिस एवं जिला प्रशासन के साथ बैठक कर नियमों के पालन के लिए काम कार्ययोजना तैयार करें। समीक्षा बैठक के दौरान सभी जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की वैक्सीनेशन की प्रगति आख्या एवं संभावित तीसरी लहर के लिए की जा रही तैयारियों की रिपोर्ट पेश की। बैठक में डॉ. पंकज पांडे, मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमचंद्र, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निदेशक डॉ. सरोज नैथानी, सभी जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद रहे।
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