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उत्तराखंड भू-कानून: सर्वदलीय कमेटी बनाए सरकार - कांग्रेस

न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Sat, 31 Jul 2021 02:36 PM IST

सार

बता दें कि मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार को कहा था कि राज्य में भू कानून, नजूल नीति, वर्ग चार की भूमि को लेकर कई तरह की दिक्कतें हैं। इन सभी के लिए एक कमेटी बना रहे हैं।
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गणेश गोदियाल
गणेश गोदियाल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए कि भू-कानून में बदलाव करने के बाद राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की कितनी भूमि औद्योगिक प्रयोजनों के लिए बिकी और कितना औद्योगिक निवेश इस बिल को पास के बाद राज्य में आया। भू-कानून के मुद्दे पर प्रेसवार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने यह बात कही। 
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राज्य में लगातार उठती भू-कानून में सुधार की मांग को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने लपक लिया है। शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में इस मुद्दे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और केदारनाथ के विधायक मनोज रावत संयुक्त रूप से एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने कहा कि अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कह रहे हैं कि कड़े भू-कानून के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य की विधानसभा में बिल पास कराने के बाद राज्य को क्या फायदा हुआ। राज्य में कितना निवेश आया। उत्तराखंड में आज बच्चा-बच्चा सशक्त भू-कानून की मांग कर रहा है। 


इस अवसर पर विधायक मनोज रावत ने कहा कि राज्य के युवाओं में आजकल 6 दिसंबर 2018 को उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश) जमीदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-143 और धारा-154 में परिवर्तन के बाद राज्य के पर्वतीय जिलों में मची जमीन की लूट और सरकार की ओर से कुछ संस्थाओं को राज्य की बेशकीमती भूमि लुटाने की आशंका को लेकर बड़ा आक्रोश है। स्थानीय निवासियों और युवाओं के उस आक्रोश की अभिव्यक्ति विभिन्न माध्यमों से जनता के सामने आ रही है। 

विधायक रावत ने आरोप लगाया कि 6 दिसंबर 2018 को उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने पर्वतीय और मैदानी जिलों के पर्वतीय क्षेत्रों की भूमि को न केवल औद्योगिक प्रयोजन के लिए बल्कि, किसी भी संस्था, सहकारी समिति को या जन साधारण के हित में किसी को भी को बेचने या निलाम करने का षड्यंत्र कर दिया था। 4 जून 2019 को उत्तराखंड की भाजपा की सरकार ने बहुमत के मद में मदहोश होकर मंत्रिमंडल की बैठक में एक निर्णय लेकर मैदानी जिलों ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में भी हदबंदी (सीलिंग) की 12.5 एकड़ की सीमा समाप्त कर दी।

कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्यभर की भू-व्यवस्था को एकरूपता में लाने की पक्षधर रही है। कांग्रेस का मानना है कि अभी राज्य में जमीन से संबधित दर्जन भर कानून हैं। हमारे पूर्ववर्ती राज्य उत्तर प्रदेश ने उन सभी कानूनों का एकीकरण या विलोपन कर उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता-2006 का रूप दे दिया है। कांग्रेस का मानना है उत्तराखंड में भी अब एकीकृत भू-कानून की आवश्यकता है। उस कानून में ऐसी कड़ी धाराओं को सम्मलित करने की आवश्यकता है जो पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों की कृषि भूमि और अन्य समुदाय की भूमि को बाहरी खरीददारों और मुफ्तखोर कंपनियों से बचाए। कांग्रेस इसके अलावा भू-बंदोबस्त कराने और पर्वतीय गांवों में भी चकबंदी कराने की पक्षधर है। 

भाजपा ने चकबंदी के लिए खोला गया विभाग ही बंद कर दिया 
प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने आरोप लगाया कि पूर्व में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने पर्वतीय क्षेत्र में चकबंदी कराने के लिए विधानसभा में कानून बनाया था और पर्वतीय चकबंदी के लिए अलग विभाग खोला था, लेकिन भाजपा की सरकार इन साढे़ चार सालों में एक भी गांव की चकबंदी नहीं कर पाई। साथ ही पर्वतीय चकबंदी के लिए खोला गया विभाग भी बंद कर दिया। उन्होंने कहा सरकार को भू-कानून में सुधार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाने के बजाए, सर्वदलीय समिति बनानी चाहिए। इस समिति में ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, जो इसके जानकार हों।

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