Republic Day 2022: गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी के सिर पर सजी दिखी खास टोपी, उत्तराखंड से है कनेक्शन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 26 Jan 2022 02:44 PM IST
उत्तराखंडी टोपी में प्रधानमंत्री मोदी
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गणतंत्र दिवस पीएम नरेंद्र मोदी हर बार की तरह इस बार भी खास अंदाज में दिखे और उनके इस अंदाज ने सबका ध्यान खींचा। 73वें गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी खास टोपी में नजर आए। यह खास टोपी उत्तराखंड की है। जिस पर ब्रह्मकमल बना हुआ था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर कहा कि पीएम मोदी ने ब्रह्मकमल टोपी पहनकर राज्य और यहां के लोगों का मान बढ़ाया है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों इसे उत्तराखंड में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। 

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने ट्वीट कर कहा कि आज 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्मकमल से सुसज्जित देवभूमि उत्तराखंड की टोपी धारण कर हमारे राज्य की संस्कृति एवं परम्परा को गौरवांवित किया है। गौरतलब है कि रक्षा राज्य मंत्री और उत्तराखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अक्सर इस टोपी को पहने दिखाई देते हैं। 

गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहाड़ी टोपी ब्रह्मकमल पहनने से मसूरी के लोगों में जबरदस्त उत्साह है। टोपी के डिजायनर समीर शुक्ला ने कहा कि उनकी प्रधानमंत्री के टोपी पहनने से उनकी मेहनत सफल हो गई है। सोहम हिमालयन सेंटर संचालक समीर शुक्ला के अनुसार गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में पहाड़ी टोपी पहनने के चलन है। इसी को लेकर उत्तराखंड का अपना शीर्ष वस्त्र डिजाइन करने का विचार आया। जिसे गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक, अस्कोट से लेकर आराकोट तक सभी जगह सर्वमान्य हो। इसी के चलते पांच साल पहले (नौ नवंबर 2017) ब्रह्मकमल टोपी का डिजाइन तैयार कर पहाड़ी टोपी को नया लुक दिया। जिस पर एक शुभ चिह्न लगाने का फैसला किया और टोपी पर ब्रह्मकमल लगा दिया।

साथ ही टोपी पर कपड़े की लाल, नीला, पीला और हरे रंग की एक पट्टी लगाई गई। समीर शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री के टोपी पहनने के बाद उनकी मेहनत सफल हो गई है। यह मेरे साथ सभी के लिए गर्व का समय है। वैसे ब्रह्मकमल टोपी की मांग लगातार बढ़ रही है। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों के शादी समारोहों में यही टोपी लोग शान के साथ पहनते हैं। प्रधानमंत्री के टोपी पहनने से देशव्यापी पहचान मिली है। 

उत्तराखंडी टोपी में प्रधानमंत्री मोदी
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एक मान्यता के मुताबिक भगवान विष्णु का जन्म ब्रह्मकमल से हुआ था। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है और यह समुद्रतल से 12 हजार फीट से ऊंचाई वाली जगहों पर पाया जाता है।

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ब्रह्मकमल
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यह बेहद दुर्लभ प्रजाति का फूल है जो गर्मियों में खिलता है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग और नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में यह काफी देखा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम साउसिव्यूरिया ओबलावालाटा है। ब्रह्मकमल एस्टेरेसी कुल का पौधा है। इसके नजदीकी रिश्तेदार सूर्यमुखी, गेंदा, गोभी, डहलिया, कुसुम व भृंगराज हैं जो इसी कुल के अन्य प्रमुख पौधे हैं।

ब्रह्मकमल
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फूलों की घाटी, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, वेदनी बुग्याल, रूपकुंड समेत अन्य उच्च हिमालय क्षेत्रों में भी ब्रह्मकमल अधिक संख्या में खिलते हैं। ब्रह्मकमल कमल की अन्य प्रजातियों के विपरीत पानी में नहीं वरन धरती पर खिलता है।
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ब्रह्मकमल
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केदारनाथ से लगभग सात किमी ऊपर स्थित वासुकीताल के आसपास व बुग्याली क्षेत्र में असंख्य ब्रह्मकमल खिलते हैं। वर्तमान में भारत में इसकी लगभग 60 प्रजातियों की पहचान की गई है, जिनमें से 50 से अधिक प्रजातियां हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं।
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