उत्तराखंड का चुनावी रण: कुमाऊं के राजनीतिक फलक पर अक्सर बुलंद रहा महिलाओं का सितारा 

कालिका रावल, अमर उजाला, बागेश्वर Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 30 Nov 2021 04:18 PM IST

सार

Uttarakhand Election 2022: राजनीतिक फलक पर उभरी महिलाओं में सरस्वती टम्टा, सरस्वती तिवारी, रमा पंत, इंदिरा हृदयेश, बीना महराना, सरिता आर्य, मीना गंगोला ऐसे नाम हैं जिन्होंने राजनीति में अपना लोहा मनवाया और विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ने में कामयाब हुईं।
स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश
स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड में गढ़वाल के मुकाबले कुमाऊं के राजनीतिक क्षितिज में महिलाओं का सितारा हमेशा बुलंद रहा। उस दौर में भी जब ग्रामीण क्षेत्र में ही नहीं शहरी इलाकों में भी महिलाएं घर-परिवार तक ही ज्यादा सिमटी रहतीं थीं, कुमाऊं की राजनीति में महिलाओं ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक फलक पर उभरी इन महिलाओं में सरस्वती टम्टा, सरस्वती तिवारी, रमा पंत, इंदिरा हृदयेश, बीना महराना, सरिता आर्य, मीना गंगोला ऐसे नाम हैं जिन्होंने राजनीति में अपना लोहा मनवाया और विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ने में कामयाब हुईं। शिक्षिका से नेता बनीं कांग्रेस नेता स्व. स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश ने तो राजनीति में अपना कद इतना बढ़ाया कि एक समय उनको सरकार में मिनी मुख्यमंत्री तक कहा जाता था। 
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7 अप्रैल 1941 को जन्मी इंदिरा हृदयेश पहली बार वर्ष 1974 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य चुनी गईं। इंदिरा हृदयेश लगातार वर्ष 1986, 1992 और 1998 में भी उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनीं गईं। वर्ष 2000 में जब राज्य का गठन हुआ और भाजपा की अंतरिम सरकार बनी तो कांग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी। वर्ष 2002 में राज्य विधानसभा के पहले चुनाव में हल्द्वानी विधानसभा सीट से विधायक बनीं। एनडी तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं। 2007 में इंदिरा हृदयेश भाजपा के वंशीधर भगत से चुनाव हार गईं। वर्ष 2012 में फिर हल्द्वानी से न सिर्फ विधानसभा चुनाव जीतीं बल्कि विजय बहुगुणा और हरीश रावत सरकार में मंत्री रहीं। वर्ष 2017 में एक बार विधायक चुनी गईं। नेता प्रतिपक्ष बनीं। उन्होंने जीवन पर्यंत अपने राजनीतिक कौशल का लोहा मनवाया।


इसी तरह अल्मोड़ा से वर्ष 1977 के चुनाव में रमा पंत विधायक चुनी गईं तो वर्ष 1985 में कांग्रेस की सरस्वती तिवारी के सिर अल्मोड़ा विस सीट से विधायकी का ताज सजा। इससे पहले वर्ष 1969 और 1974 के चुनाव में बागेश्वर विस सीट से कांग्रेस की सरस्वती टम्टा ने चुनाव जीता। 2014 के उप चुनाव में सोमेश्वर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने रेखा आर्य पर दांव खेला और वह विधायक चुनी गईं। वर्ष 2017 के चुनाव में रेखा आर्य पाला बदलकर भाजपा के टिकट पर सोमेश्वर सीट से मैदान में उतरीं, जीती और सूबे में पहले राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं और अब पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 2012 में नैनीताल सीट से सरिता आर्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतीं। वर्ष 2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2014 के विस चुनाव में गंगोलीहाट सीट से भाजपा की मीना गंगोला विधायक चुनी गईं। वर्ष 2019 में मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद हुए उप चुनाव में पिथौरागढ़ सीट से उनकी पत्नी चंद्रा पंत विधायक चुनी गईं। चंपावत जिले की चंपावत सीट से 2007 में बीना महराना भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं और विधायक के साथ ही खंडूरी सरकार में मंत्री रहीं। 

कुमाऊं से इला पंत रहीं एकमात्र महिला सांसद, रेणुका के अरमान रहे अधूरे

1998 में नैनीताल सीट से भारतरत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की बहू, केसी पंत की पत्नी इला पंत ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस दिग्गज एनडी तिवारी को पराजित किया। उन्होंने कुमाऊं की पहली महिला सांसद होने का गौरव हासिल किया। यह वही चुनाव था, जब एनडी तिवारी देश की राजनीति के शिखर पर थे। राजनीति के विशेषज्ञ कहते हैं कि एनडी 1998 का चुनाव नहीं हारते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। कांग्रेसी दिग्गज हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत ने वर्ष 2009 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर अल्मोड़ा सीट से लड़ा। भाजपा के बची सिंह रावत से चुनाव हार गईं। रेणुका रावत वर्ष 2014 में हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ीं, तब रमेश पोखरियाल निशंक ने रेणुका रावत को पराजित किया।

कुछ नहीं चढ़ पाईं विस की सीढ़ी, कुछ की जद्दोजहद जारी
अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में वर्ष 1989 में पिथौरागढ़ विस सीट से कांग्रेस की रत्ना बिष्ट ने चुनाव लड़ा। मालदार परिवार की रत्ना बिष्ट जनता पार्टी के कमल किशन पांडे से चुनाव हार गईं। वर्ष 2012 में गंगोलीहाट सीट से भाजपा की गीता ठाकुर ने चुनाव लड़ा, वह कांग्रेस के नारायण राम से चुनाव हार गईं। इससे पहले गीता ठाकुर वर्ष 2002 का चुनाव गंगोलीहाट से निर्दलीय भी लड़ीं थीं। सल्ट सीट से कांग्रेस की गंगा पंचोली वर्ष 2017 और इस वर्ष उपचुनाव लड़ चुकी हैं। वह दोनों ही बार जीत हासिल नहीं कर सकीं। कांग्रेस की अंजू लुंठी वर्ष 2017 के विस चुनाव में पिथौरागढ़ सीट से भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। हल्द्वानी सीट से भाजपा की रेनू अधिकारी 2012 में चुनाव लड़ीं लेकिन विधानसभा की दहलीज नहीं चढ़ पाईं। गीता ठाकुर, गंगा पंचोली, रेनू अधिकारी, अंजू लुंठी की जद्दोजहद अभी जारी है।
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