चुनाव 2022: उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष ऐरी बोले- भू माफिया के कब्जे में नहीं आने देंगे किसानों की जमीन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 20 Sep 2021 11:26 PM IST

सार

उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि उक्रांद की सरकार बनते ही किसानों की जोत भू माफिया के कब्जे में नहीं जाने दी जाएगी।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि उक्रांद की मुख्य अवधारणा राज्य में सत्ता का विकेंद्रीकरण कर जनता को सरकार के नजदीक लाना है ताकि जनता बिचौलियों द्वारा ठगी न जाए। उन्होंने कहा कि उक्रांद हरिद्वार में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत और विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा। 
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प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में ऐरी ने कहा कि भू-कानून को लेकर पार्टी का नजरिया साफ है। उक्रांद की सरकार बनते ही किसानों की जोत भू माफिया के कब्जे में नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से बारी-बारी से भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रही हैं। दोनों ही दलों ने जनता को गुमराह कर लूटा है। अब दिल्ली का एक दल पैर पसारने लगा है, लेकिन जनता बहकने वाली नहीं है।


इस दौरान उक्रांद संरक्षक मंडल के सदस्य डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, केंद्रीय सर्वोच्च सलाहाकर समिति सदस्य रवींद्र वशिष्ठ, केंद्रीय उपाध्यक्ष सरिता पुरोहित, चौधरी बृजवीर सिंह, जिलाध्यक्ष बल सिह सैनी, केंद्रीय सदस्य डॉ. राजवीर सिंह पुंडीर, जिला उपाध्यक्ष संजय उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय, जिला महामंत्री विजय भारद्वाज, शहजाद अली, तरुण जोशी, प्रताप चौधरी, कोषाध्यक्ष व कार्यालय प्रभारी रजत शर्मा, जिला संगठन मंत्री प्रियंका शर्मा, डॉ. ज्ञानवीर सिंह और राजपाल मौजूद रहे।

सरकार में आने पर उक्रांद देगी से सहूलियतें
- उक्रांद की सरकार आने पर बिजली की कीमतें बहुत कम होंगी
- उद्योगों में 80 प्रतिशत उत्तराखंडियों को रोजगार देंगे
- 3 से 5 किमी के दायरे में चिकित्सा सुविधा दी जाएगी
- शिक्षा का अधिकार योजना के तहत शिक्षा की व्यवस्था सरकार की जिम्मेदारी होगी
- छात्रों के लिए निशुल्क स्कूल बस सुविधा दी जाएगी।
- सरकारी नौकरियों में केवल उत्तराखंडी को ही नौकरी दी जाएगी
- पर्यटन एवं ट्रांसपोर्ट उद्यमियों को सुविधाएं दी जाएंगी
- पेट्रोल और डीजल की कीमते अन्य राज्यों की तुलना में कम की जाएँगी
- कृषि पैदावार का मूल्य सरकार किसान के साथ सहकारी प्रणाली के अनुसार तय करेगी
- हर उत्तराखंडी का जल-जंगल-जमीन पर उसके अपने प्रयोग का हक होगा।

उक्रांद का 2022 आम चुनाव में बेरोजगारी होगा मुख्य मुद्दा 

उत्तराखंड क्रांति दल की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हरीश पाठक और सुरेंद्र कुकरेती को दल का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया। बैठक में दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि 2022 के चुनाव में उक्रांद का बेरोजगारी मुख्य मुद्दा होगा। बैठक मेें प्रदेश में सशक्त भूू-कानून लागू करने एवं देवस्थानम बोर्ड को खत्म कर पूर्व व्यवस्था को बहाल किए जाने सहित 22 प्रस्ताव पास किए गए।  

दल की सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में ललित बिष्ट को केंद्रीय चुनाव प्रभारी बनाया। उक्रांद के संरक्षक त्रिवेंद्र पंवार ने कहा कि उक्रांद ने इस राज्य का विचार दिया, बनाया और अब उक्रांद ही इस राज्य को बचा सकता है। संरक्षक नारायण सिंह जंतवाल ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया। पंतनगर विश्वविद्यालय ने पूरे देश को हरित क्रांति प्रदान करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी।

केंद्रीय कोषाध्यक्ष मोहन काला ने दल के वित्तीय प्रबंधन एवं दल की आईटी क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में सशक्त भू कानून, गैरसैंण स्थायी राजधानी, स्थायी निवास 1950 को आधार माने जाने, सही परिसंपत्तियों का बंटवारा, सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने, पंतनगर विश्वविद्यालय को पूर्ववत रखने, सदस्यता अभियान चलाने, उपनल या अन्य अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने, आशा कार्यकर्ताओं व भोजनमाताओं को उचित मानदेय, राज्य में स्थापित कंपनियों में राज्य के स्थानीय युवाओं को 80 प्रतिशत रोजगार, कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाली, राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा हटाए गए 300 संविदा कर्मियों की विभाग में फिर से बहाली आदि 22 राजनीतिक प्रस्ताव पास किए गए। दल के प्रवक्ता विजय बौड़ाई ने बताया कि रविवार को रुड़की से एचके सिंह, डॉ महेश भंडारी, ज्योति ओली, अतुल बेंजवाल व तेजप्रकाश नौटियाल सहित कई युवाओं ने दल की सदस्यता ली। बैठक में संरक्षक त्रिवेंद्र पंवार, बीडी रतूडी, नारायण सिंह जंतवाल, अनुशासन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, चंद्रशेखर कापडी, कोषाध्यक्ष मोहन काला, शिवानन्द चमोली, ब्रह्मानन्द डालाकोटी, अरुण शाह, राजेन्द्र नौटियाल, पान सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
 
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