उत्तराखंड: कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद को हाईकोर्ट ने भेजा अवमानना नोटिस, ये है पूरा मामला

संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 29 Oct 2021 11:04 PM IST

सार

अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि महासभा कई स्कूल व कॉलेजों का संचालन करती है जिसमें स्वामी यतीश्वरानंद मंत्री थे।
नैनीताल हाईकोर्ट
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व के आदेशों का पालन नहीं करने पर कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद और डिप्टी रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी हरिद्वार नीतू भंडारी को अवमानना नोटिस जारी करते हुए 16 नवंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।  
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न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार महाविद्यालय महासभा ज्वालापुर हरिद्वार ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि महासभा कई स्कूल व कॉलेजों का संचालन करती है जिसमें स्वामी यतीश्वरानंद मंत्री थे।


उनके कैबिनेट मंत्री बनने के बाद 2018 में उन्हें प्रबंधन समिति ने हटा दिया था। इस आदेश को यतीश्वरानंद ने हाइकोर्ट में चुनौती दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। याचिका में कहा गया कि स्वामी यतीश्वरानंद ने 31 अगस्त 2021 को डिप्टी रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोयायटी पर दबाव डालकर महासभा के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कराकर खुद को बहाल करा लिया। डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना।

इसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी यतीश्वरानंद खुद को महासभा के मंत्री होने का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। महाविद्यालय महासभा द्वारा डिप्टी रजिस्ट्रार और कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द के विरूद्ध अवमानना याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट में दीपावली का अवकाश घोषित, अब 8 को खुलेगा
हाईकोर्ट में दीपावली का अवकाश घोषित कर दिया गया है। अब हाईकोर्ट 8 नवंबर को खुलेगा। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि एक नवंबर से 5 नवंबर तक के लिए दीपावली का अवकाश घोषित किया गया है। छह को शनिवार और सात को रविवार है। लिहाजा, हाईकोर्ट आठ नवंबर को खुलेगा। 

अवमानना पर अल्मोडा डीएफओ के खिलाफ जमानती वारंट जारी

हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए आदेश का पालन नहीं करने पर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अल्मोड़ा महातिम यादव को अवमानना का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ बेलेबल वारंट (जमानती वारंट) जारी किया है। कोर्ट ने डीएफओ को 16 नवंबर तक जवाब पेश करने के लिए कहा है। पूर्व में हाईकोर्ट ने डीएफओ अल्मोड़ा को दैनिक श्रमिकों की याचिका पर उन्हें न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ देने के आदेश दिए थे लेकिन इस आदेश का पालन नहीं किया गया।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। श्रमिकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि डीएफओ अल्मोड़ा महातिम यादव को कोर्ट ने पूर्व में अवमानना का नोटिस जारी किया था, लेकिन डीएफओ ने कोर्ट में इसका जवाब नहीं दिया और उलटा सभी श्रमिकों को हटाने का आदेश 28 अक्तूबर को जारी कर दिया। आदेश में विभाग की ओर से कहा गया था कि श्रमिकों की नियुक्ति विभाग में बिना पद सृजित किए अस्थायी रूप में की गई है।

इससे संबंधित नियमों के तहत उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है जबकि याचिकाकर्ता खिलानंद व अन्य ने पूर्व में याचिका दायर कर कहा था कि वे विभाग में कई वर्षों से विभिन्न पदों पर दैनिक श्रमिकों के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनको अभी तक न्यूनतम वेतन व अन्य लाभ नहीं दिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने उन्हें न्यूनतम वेतन और लाभ देने की मांग की थी। 
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