उत्तराखंड: साइबर अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की मदद करेगा गूगल, बनाया एक पोर्टल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 11 Sep 2021 01:15 PM IST

सार

अभी तक सर्च इंजन पर फर्जी वेबसाइट, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और अन्य प्रकार की जानकारियों के लिए गूगल से संपर्क किया जाता था, लेकिन भारत में कोई जवाबदेही न होने के कारण पुलिस को मनचाही जानकारी नहीं मिलती थी। पिछले दिनों एसटीएफ ने गूगल को नोटिस भी जारी किया था।
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साइबर अपराधियों को खोजने के लिए गूगल अब उत्तराखंड पुलिस की मदद करेगा। इसके लिए गूगल ने एलईआरएस नाम से पोर्टल बनाया है, जिसके माध्यम से पुलिस हर तरह की जानकारी आसानी से हासिल कर सकी है। इसके संबंध में शुक्रवार को एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने गूगल के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्हें प्रदेश का नोडल अधिकारी बनाया गया है। 
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एसटीएफ ने गूगल को जारी किया था नोटिस
दरअसल, अभी तक सर्च इंजन पर फर्जी वेबसाइट, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और अन्य प्रकार की जानकारियों के लिए गूगल से संपर्क किया जाता था, लेकिन भारत में कोई जवाबदेही न होने के कारण पुलिस को मनचाही जानकारी नहीं मिलती थी। पिछले दिनों एसटीएफ ने गूगल को नोटिस भी जारी किया था। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अब इस तरह की समस्याएं नहीं आएंगी। 


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उन्होंने बताया कि गूगल ने लॉ इंफोर्समेंट रिक्वेस्ट सिस्ट (एलइआरएस) नाम से एक पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से यह सारी जानकारी उन्हें आसानी से मिल जाएंगी।

30 फीसदी मामले गूगल से जुड़े  

गूगल के अधिकारियों को प्रदेश के सभी साइबर सेल और सीओ के नंबर व ईमेल एड्रेस दे दिए जाएंगे, ताकि यदि कोई भी जानकारी ले तो उसे आसानी से मिल जाए। उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोग गूगल पर नंबर खोजने के चक्कर में ठगे जाते हैं। अब इन पर कार्रवाई भी आसान हो जाएगी। 

एसएसपी ने बताया कि लोग गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा निर्भर रहते हैं। ऐसे में वह किसी भी जानकारी को खोजने के लिए गूगल का सहारा लेते हैं। यहीं पर वह फर्जी वेबसाइट और कस्टमर केयर नंबरों के जाल में फंस जाते हैं।
 
बीते कुछ दिनों में देखने में आया है कि इस तरह के मामले कुल मामलों में 30 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं। इसके लिए गूगल को हमेशा से पत्र लिखे जाते थे, लेकिन कोई केंद्रीय इकाई न होने के कारण उन्हें जवाब नहीं मिलता था। अब इस पोर्टल से यह सब बेहद आसान हो जाएगा। 
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