उत्तराखंड: काशीपुर विधायक हरभजन सिंह चीमा को हाईकोर्ट से राहत, चुनाव याचिका खारिज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 24 Sep 2021 10:48 PM IST

सार

अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि वर्ष 2017 में जो नामांकन पत्र दाखिल किया गया था, वह सही था। उसमें शैक्षिक योग्यता, उम्र, जन्मतिथि प्रमाणपत्रों के अनुरूप भरी गई थी, जिसमें कोई हेराफेरी नहीं की गई थी।
नैनीताल हाईकोर्ट
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने काशीपुर विधायक हरभजन सिंह चीमा के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। काशीपुर निवासी राजीव अग्रवाल ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर कहा था कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में काशीपुर विधायक हरभजन सिंह चीमा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था।
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हरभजन सिंह चीमा की आयु आधार कार्ड और पैनकार्ड में अलग-अलग है। हरभजन सिंह चीमा की शैक्षिक योग्यता स्नातक है, लेकिन उन्होंने अपने नामांकन पत्र में हाईस्कूल लिखा है। इसके बावजूद 30 जनवरी 2017 को हरभजन सिंह चीमा का नामांकन पत्र वैध माना गया।


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जब इसकी शिकायत उन्होंने चुनाव अधिकारी से की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान हरभजन सिंह चीमा के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि वर्ष 2017 में जो नामांकन पत्र दाखिल किया गया था, वह सही था। उसमें शैक्षिक योग्यता, उम्र, जन्मतिथि प्रमाणपत्रों के अनुरूप भरी गई थी, जिसमें कोई हेराफेरी नहीं की गई थी।

चीमा पेपर मिल पर बकाए के संबंध में उनके द्वारा कोर्ट में कहा गया कि कंपनी स्वयं में व्यक्ति है और कंपनी के प्रति डायरेक्टर की देनदारी नहीं बनती है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। उधर, पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल का कहना है कि वह हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए निर्णय लेंगे।

हाईकोर्ट ने बोर्ड सचिव मधु नेगी को जारी किया नोटिस 

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल की याचिका पर सुनवाई के बाद बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार व अन्य पक्षकारों को 27 सितंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।  बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर  कहा था कि  बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान को हटाने के बावजूद वह पद पर बनी हुई हैं। याचिका में कहा कि वह अनेक वित्तीय फैसले स्वयं ले रही हैं और लिमिट से अधिक के चेक काट रही हैं।

याचिका में कहा कि उन्होंने अपने पास बोर्ड के जरूरी कागजात व वाहन रख लिए हैं। ऐसे में बोर्ड में श्रमिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य लटक गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि बोर्ड ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि बोर्ड के सचिव पद पर आईएएस या वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी नियुक्त किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले में प्रदेश सरकार, लेबर सचिव, लेबर कमिश्नर व सचिव मधु नेगी चौहान को पक्षकार बनाया गया है।
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