उत्तराखंड: छह वर्ष बाद भी नहीं हो पाई पुजारी ट्रेक की खोज, केदारनाथ-बदरीनाथ को जोड़ता है यह प्राचीन मार्ग 

विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 20 Nov 2021 12:46 PM IST

सार

जून 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा के प्राचीन मार्गों की खोज व संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर जोर दिया गया था। इस दिशा में केदारनाथ तक पहुंच के लिए 2014/2015 में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग द्वारा करीब तीन करोड़ की लागत से त्रियुगीनारायण-तोषी-केदारनाथ व चौमासी-खाम बुग्याल-केदारनाथ वैकल्पिक मार्गों का निर्माण किया गया।
uttarakhand news: Pujari trek could not be discovered even after six years, ancient route connects Kedarnath-Badrinath
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

श्रीकेदारनाथ व श्रीबदरीनाथ को जोड़ने वाले पुजारी ट्रेक को खोजने की योजना छह वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। जबकि वर्ष 2015 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने इस पूरे ट्रेक की मैप रीडिंग कर प्रारंभिक जानकारी जुटाई थी। वर्ष 2012 में एवरेस्ट फतह करने वाले पर्वतारोही सूबेदार तेजपाल सिंह के नेतृत्व में ट्रेक को खोजने के लिए दल भी गठित किया गया था लेकिन शासन से सहयोग नहीं मिलने से यह मिशन शुरू नहीं हो पाया।
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प्राचीन मार्गों की खोज व संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर दिया गया था जोर
जून 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा के प्राचीन मार्गों की खोज व संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर जोर दिया गया था। इस दिशा में केदारनाथ तक पहुंच के लिए 2014/2015 में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग द्वारा करीब तीन करोड़ की लागत से त्रियुगीनारायण-तोषी-केदारनाथ व चौमासी-खाम बुग्याल-केदारनाथ वैकल्पिक मार्गों का निर्माण किया गया। साथ ही केदारनाथ व बदरीनाथ को जोड़ने वाले प्राचीन मार्ग जिसे पुजारी ट्रेक नाम दिया गया उसे खोजने की मुहिम शुरू की गई। तब, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में ट्रेक की जीपीएस मैप रीडिंग की गई।


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तब बताया गया था कि श्रीकेदारनाथ व श्रीबदरीनाथ के बीच हवाई दूरी 22 किमी है। साथ ही इस पूरे ट्रेक पर कई स्थानों पर प्राकृतिक झील, ग्लेशियर व चट्टानें मौजूद हैं। इस ट्रेक पर ट्रेकिंग को लेकर निम द्वारा कैंपिंग ग्राउंड, वाटर प्वाइंट और लैंड मार्क चिह्नित किया गया था। इस मिशन को धरातल पर उतारने के लिए निम ने मई व नवंबर 2015 में एवरेस्ट विजेता सूबेदार तेजपाल सिंह के नेतृत्व में दस सदस्यीय टीम का गठन भी किया था लेकिन शासन स्तर पर सहयोग नहीं मिल पाया। 

पुजारी ट्रेक को लेकर प्राचीन मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार केदारनाथ व बदरीनाथ की पूजा-अर्चना के लिए पहले एक ही पुजारी थे। वे शाम को बदरीनाथ व सुबह केदारनाथ पूजा के लिए हिमालय की पगडंडियों से होकर पहुंचते थे।  दोनों धामों के कपाट खोलने के लिए भी पुजारी व अन्य लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते थे लेकिन सदियों से यह प्राचीन ट्रेक अस्तित्व में नहीं है। 

हिटो केदार मुहिम भी हुई हवाई 
 केदारनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच को आसान व सुरक्षित बनाने और वैकल्पिक मार्गों को पुनर्जीवित करने के लिए अक्तूबर 2016 में कांग्रेस सरकार द्वारा हिटो केदार अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत 9 वैकल्पिक मार्गों से ट्रेकिंग दलों को केदारनाथ भेजा गया था लेकिन इसके बाद इन प्राचीन ट्रेकों की कोई सुध नहीं ली गई। 

केदारनाथ-बदरीनाथ को जोड़ने वाले प्राचीन ट्रेक की खोज के लिए निम के स्तर से सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं लेकिन शासन स्तर पर कोई सहयोग नहीं किया गया। पुजारी ट्रेक की खोज हो जाती तो यह, दोनों धामों की यात्रा को नया आयाम देने के साथ एडवेंचर को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण साबित होता।
-कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल, निम के पूर्व प्राचार्य 
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