उत्तराखंड: येलो अलर्ट के बाद पहाड़ से मैदान तक हुई बारिश, कई घंटे बंद रहा बदरीनाथ हाईवे 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 07 Sep 2021 08:33 PM IST

सार

Uttarakhand weather Latest Update: नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में अगले 24 घंटे में तेज बौछारों के साथ भारी बारिश के आसार हैं। इन जिलों में भारी बारिश की संभावनाओं को देखते हुए मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।
बदरीनाथ हाईवे
बदरीनाथ हाईवे - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी है। सोमवार देर रात प्रदेश में पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश हुई। बारिश के बाद लोगों को उमस से राहत मिली। मसूरी में भी बारिश के बाद कोहरा छाया हुआ है। 
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वहीं, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में अगले 24 घंटे में तेज बौछारों के साथ भारी बारिश के आसार हैं। इन जिलों में भारी बारिश की संभावनाओं को देखते हुए मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।


Uttarakhand: ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर दरका पहाड़ी का हिस्सा, देखें वीडियो...

मौसम विभाग की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं तेज गर्जना के साथ बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। जहां तक राजधानी दून का सवाल है तो राजधानी दून में अगले 24 घंटे में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।

जाखन नदी वैकल्पिक मार्ग:  दिनभर बंद, शाम को वाहनों की आवाजाही शुरू
जाखन नदी के अचानक जलस्तर बढने के बाद मंगलवार दिनभर रानीपोखरी का देहरादून से संपर्क कटा रहा। शाम सवा पांच बजे वाहनों की आवाजाही शुरू होने से लोगों ने राहत मिली। दिनभर रानीपोखरी, भोगपुर और डांडी के लोग ऋषिकेश नेपालीफार्म होकर देहरादून पहुंचे। 

पर्वतीय क्षेत्रों में सोमवार रात को तेज बारिश होने से मंगलवार तड़के जाखन और बिदालना नदी ऊफान पर आ गई। बिदालना नदी के ऊफान पर आने से भोगपुर और डांडी का संपर्क देहरादून कट गया। रानीपोखरी में जाखन नदी में बनाए गए वैकल्पिक मार्ग के बहने के रानीपोखरी, डांडी और भोगपुर लोगों को वाया नेपाली फार्म होकर देहरादून का सफर तय करना पड़ा।

कई लोग बाइक सवार आसपास के गांवों से रानीपोखरी पहुंचे, जब उन्हें यहां पर वैकल्पिक मार्ग बहने की सूचना मिली तो वह सीधे भोगपुर होते हुए बिदालना नदी के किनारे पहुंचे, नदी का रौद्र रूप देख वहां वापस आकर वाया ऋषिकेश नेपाली फार्म होकर देहरादून पहुंचे। दोपहर 12 बजे का नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ।

उसके बाद बिदालना नदी के बाइक सवार आ जा सके। रानीपोखरी में जिन लोगों को सिटी बस से देहरादून जाना था, उन्हें दोपहर बाद स्थानीय लोगों ने नदी पार करवाया। शाम सवा पांच बजे के बाद छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही शुरु होने के बाद लोगों राहत की सांस ली। वहीं जो लोग नेपालीफार्म होकर देहरादून गए जाम में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। 

जाखन नदी में बनाए गए वैकल्पिक मार्ग को शाम सवा पांच बजे छोटे बड़े वाहनों के लिए खोल दिया गया है। कुछ दिन बाद मार्ग पर डामर बिछाया जाएगा। नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। 
- आरसी कैलखुरा, सहायक अभियंता, लोनिवि ऋषिकेश

कई घंटे बंद रहा बदरीनाथ हाईवे 

देर रात हुई भारी बारिश के दौरान लामबगड़ में मलबा और बोल्डर आने से बदरीनाथ हाईवे करीब 15 घंटे तक बाधित रहा। पागलनाला में भी हाईवे पर मलबा आ गया। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ ही चीन सीमा क्षेत्र में सेना के वाहनों की आवाजाही ठप रही। सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह नौ बजे तक क्षेत्र में भारी बारिश हुई। रात करीब 11 बजे लामबगड़ नाले के उफान पर आने से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा हाईवे पर आ गया। पागलनाला में भी हाईवे पर भारी मलबा आ गया। बारिश में ही एनएच और बीआरओ की जेसीबी मशीनें व मजदूर हाईवे को खोलने में जुट गए। पागलनाला में सुबह करीब दस बजे और लामबगड़ में दोपहर दो बजे हाईवे खुल पाया। गोविंदघाट थाना प्रभारी बृजमोहन राणा ने बताया कि लामबगड़ नाले में अब भी भारी मात्रा में पानी आ रहा है, जिससे वाहनों की आवाजाही मुश्किल से हो पा रही है। सिरोहबगड़ और नरकोटा में हाईवे 10 घंटे बंद रहा। वहीं, चमधार में साढ़े सात घंटे बाद हाईवे पर आवाजाही शुरू हो पाई।

मकानों में घुसा मलबा, लोगों ने भागकर बचाई जान
मूसलाधार बारिश से थरालीबगड़ बाजार के पीछे पहाड़ी पर बिजली गिर गई, जिससे वहां भूस्खलन हो गया और मलबा सैलाब बनकर लोगों के मकानों में जा घुसा। अचानक हुई मूसलाधार बारिश से लोगों में अफरातफरी मच गई। मकानों में रखा सामान मलबे में दब गया और लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। वहीं दुकानों में भी पानी भर गया।

मंगलवार सुबह 5 बजे बिजली कड़कने की आवाज सुनकर लोग जैसे ही बात आए तो पहाड़ी से बरसाती पानी और मलबे का सैलाब देख दहशत में आ गए। इतनी ही देर में मलबे से जयवीर नेगी की गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई जबकि कमला देवी पत्नी महेशानंद ढौंढियाल के मकान में मलबा भर गया। लोगों ने भागकर जान बचाई। वहीं, दुकानों में भी मलबा घुस गया। सड़क पर खड़े वाहन, एंबुलेंस आदि भी मलबे में फंसे हुए हैं।

अस्पताल के अंदर भी पानी और मलबा आने से अस्पताल में रखी दवाइयां और जरूरी सामान खराब हो गया। लक्ष्मण सिंह व विजय कोहली की इलेक्ट्रॉनिक्स, त्रिलोचन सती का होटल, प्रेम सिंह व राजभूषण सिंह की सब्जी व जनरल स्टोर की दुकानों में मलबा घुसने से नुकसान हुआ है। सूचना पर तहसीलदार हरीश पांडे मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को फिलहाल जीआईसी के भवनों में बने राहत शिविरों में रखने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं भारी बारिश के कारण कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाईवे समेत क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग बंद हो गए, जिसे कुछ समय बाद खोल दिया गया।

मलबा आने से घंटों बंद रहा कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे

मूसलाधार बारिश से कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे दो जगहों पर बंद रहा। सुभाषनगर में मलबा आने के कारण कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे करीब साढ़े पांच घंटे तक बंद रहा। इस दौरान वाहनों की आवाजाही अपर बाजार बाईपास से कराई गई, जिस कारण बस स्टेशन, पेट्रोल पंप सड़क, पंचपुलिया, अपर बाजार से लेकर घटगाड़ पुलिया तक वाहनों का जाम लगा रहा। 

वहीं, अपर बाजार के नीचे से हो रहे भूस्खलन के कारण सिमली रोड पर पत्थर गिर रहे हैं। अनिल, दिनेश, बीरेंद्र ने कहा कि अपर बाजार में गदेरा उफान पर आने से गदेरा पार करना मुश्किल बना है। वहीं बदरीनाथ हाईवे पर चटवापीपल और उमा माहेश्वर आश्रम के पास भी मलबा गिरता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद एनएच की मशीनें तुरंत मलबा हटाती रहीं जिससे वाहनों की आवाजाही सुचारु रही।

वहीं कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे आगरचट्टी में तीन घंटे तक बंद रहा। गैरसैंण तहसील बैंड के पास एक चीड़ का पेड़ सड़क पर गिर जाने से यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। रामड़ा तल्ला की प्रधान रेवती देवी व रोहिड़ा के पूर्व क्षेपं सदस्य प्रताप गढ़वाली ने कहा कि जिन्गोड के पास सड़क धंसने से व रोहिड़ा में घुरियाल गांव के पास सड़क पर मलबा आने से मार्ग यातायात के लिए खतरनाक बना है। उन्होंने लोनिवि से शीघ्र ही सड़क सुधारने की मांग की।

ऊखीमठ-पेंज-करोखी मोटर मार्ग पर गिरा विशालकाय बोल्डर
तिमलढुंगी तोक में ऊखीमठ-पेंज-करोखी मोटर मार्ग पर गिरे विशालकाय बोल्डर से जानमाल का खतरा पैदा हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से मोटर मार्ग को यातायात के लिए बंद करा दिया गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने प्रशासन और सड़क कार्यदायी संस्था से बोल्डर हटाने की मांग की है। 

तिमलढुंगी तोक में मंगलवार सुबह पहाड़ी पर अटका एक विशालकाय बोल्डर ऊखीमठ-पेंज-करोखी मार्ग पर आ गिरा। बताया जा रहा है कि पिछले 15 दिन में इस बोल्डर ने अपनी जगह छोड़ी है। अब यह सड़क से नीचे गिरा तो भारत सेवाश्रम के आसपास आवासीय व व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हो सकता है। ग्राम प्रधान संदीप पुष्पवाण ने बताया कि दशकों से यह बोल्डर अपनी जगह पर स्थित था लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण इसने अपनी मूल जगह छोड़ दी है।

इधर, सड़क कार्यदायी संस्था एनपीसीसी (नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) के सहायक अभियंता रूपेश सकलानी ने बताया कि 21 अगस्त से बोल्डर ने अपनी जगह छोड़नी शुरू की थी। इस बारे में डीडीएमओ कार्यालय रुद्रप्रयाग को सूचना दे दी गई थी। साथ ही एसडीएम को भी लिखित में रिपोर्ट दे दी गई है। स्वयं उप जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर हालात को देखते हुए 30 अगस्त से मार्ग को यातायात के लिए बंद करवा रखा है।

खोह नदी में डूबने से वृद्ध की मौत

सनेह क्षेत्र के कोटड़ीढांग में सुबह की सैर करने के लिए घर से निकले एक वृद्ध की खोह नदी में डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने नदी से वृद्ध का शव बरामद किया और पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। मृतक के परिजनों ने पुलिस को बताया कि कोटड़ीढांग सनेह तल्ली निवासी कमाल सिंह (65) सोमवार सुबह खोह नदी की ओर सैर करने के लिए घर से निकले थे। दोपहर तक उनके घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उन्हें ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला।

इसके बाद परिजनों ने सनेह चौकी में वृद्ध की गुमशुदगी दर्ज कराई। मंगलवार सुबह एक स्थानीय व्यक्ति नदी की ओर जा रहा था, तो उसकी नजर नदी के किनारे मिट्टी से सने पड़े एक व्यक्ति पर पड़ी। उसने इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी। संभावना जताई जा रही है कि सुबह की सैर करते समय वह नदी के किनारे बैठे होंगे, इस दौरान उन्हें दौरा पड़ गया और वे नदी में डूब गए। रात को हुई बारिश से नदी के बहाव में उनका शव किनारे आ गया। एसआई अनीत कुमार ने बताया कि मृत मिले व्यक्ति के परिजनों ने उनकी शिनाख्त कमाल सिंह के रूप में की। 

पिथौरागढ़़ और अन्य स्थानों से कटा मुनस्यारी का संपर्क

लगातार बारिश से जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। नदियां उफान पर हैं। थल-मुनस्यारी सड़क हरड़िया के पास बंद है। जरीगाड़ पुल के खतरे में आने से जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर भी एक सप्ताह से वाहनों की आवाजाही बंद है।

पुल से एक सप्ताह से बंद होने से  लुमती, बंगापानी, उमरगखड़ा,सेरा, सेराघाट, मदकोट, भदेली, सेवला, दरांती, दरकोट, मुनस्यारी से लगे दर्जनों गांवों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पुल के बंद होने से सात-आठ दिन से सात-आठ वाहन वहां फंसे हैं।

वहीं, थल-मुनस्यारी सड़क चार से अधिक स्थानों पर बंद है। इस कारण जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से मुनस्यारी का संपर्क कट गया है। जिले में 20 से अधिक सड़कें बंद हैं, जिन्हें कार्यदायी संस्थाएं तेजी से खोलने का प्रयास कर रही हैं। 

ये सड़कें हैं बंद
मंसूरी-कांडा-होकरा, नाचनी-बांसबगड़, आदिचौरा-सिन्नी, बंगापानी-जाराजीबली, छिरकिला-जम्कू, गिन्नीबैंड-समकोट, मंसूरी-होकरा, नाचनी-बसंतकोट, डोर-सैरणांथी, बांसबगड़-धामीगांव, बांसबगड़-कोटा, कालिका-खुमती, बांस-आंवलाघाट, सानदेव-तुर्गोली, बिर्थीबैंड-बाराजुब्बर, जौलजीब-मुनस्यारी, तवाघाट-सोबला, घट्टाबगड़-लिपूलेख, सोबला-दर तिदांग सड़क। 
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