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#LadengeCoronaSe : कोरोना को हराकर ड्यूटी पर लौटे एसीएमओ डा.विपुल बिस्वास, बोले - सकारात्मक सोच होना जरूरी 

कोविड-19 वॉर रूम में तैनात एसीएमओ डा.बिपुल बिस्वास कोरोना को मात देकर ड्यूटी पर लौट आए हैं।

15 मई 2021

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Digital Edition

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 4496 संक्रमित मरीज सामने आए और 188 मरीजों ने दम तोड़ा है। वहीं, 5034 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। कुल संक्रमितों की संख्या 287286 हो गई है। जबकि सक्रिय मामले 78802 पहुंच गए हैं। 

उत्तराखंड में कोरोना: गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, लगातार बन रहे कंटेनमेंट जोन

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रविवार को 29797 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि देहरादून जिले में 1248 कोरोना मरीज मिले हैं। हरिद्वार में 572 , ऊधमसिंह नगर 393, नैनीताल में 117, टिहरी में 498, पौड़ी में 391, रुदप्रयाग में 356, अल्मोड़ा में 65, उत्तरकाशी में 351, पिथौरागढ़ में 100, चमोली में 211, चंपावत में 41, बागेश्वर जिले में 153 संक्रमित मिले हैं। 

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

वहीं, अब तक प्रदेश में 4811 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। 5034 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। इन्हें मिला कर 198530 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश की रिकवरी दर 69.11 प्रतिशत और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण दर 6.74 प्रतिशत दर्ज की गई है।
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कोरोना वायरस की जांच कोरोना वायरस की जांच

उत्तराखंड: प्रदेश में ब्लैक फंगस से पहली मौत, रिकॉर्ड 17 केस मिले, यूपी के पांच लोग भी शामिल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में ब्लैक फंगस से पहली मौत हुई है। वहीं एम्स में भर्ती उत्तराखंड के 12 और यूपी के पांच कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। सबसे अधिक पांच संक्रमित हरिद्वार जिले के रहने वाले हैं। एम्स के विशेषज्ञों की टीम ने इनमें से 11 संक्रमितों की आंखों की सर्जरी भी कर दी है।

एम्स में ब्लैक फंगस से मृतक  युवक कोविड संक्रमण से पीड़ित था। कुछ दिनों पहले देहरादून से रेफर होने बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान युवक में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। देहरादून निवासी 36 वर्षीय युवक की ब्लैक फंगस से शुक्रवार दोपहर को ही मौत हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सामने आई। इस दौरान ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षणों के चलते कई अन्य मरीजों की जांच भी की गई। जिसके बाद 16 और मरीज ब्लैक फंगस से संक्रमित पाए गए। इनमें 12 मरीज उत्तराखंड के हैं, जिनमें हरिद्वार के चार, देहरादून के चार, काशीपुर का एक, उधमसिंह नगर का एक और अल्मोड़ा का एक मरीज शामिल है।

उत्तराखंड में कोरोना : ब्लैक फंगस को न करें नजरअंदाज, लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें

वहीं अन्य पांच संक्रमित उत्तर प्रदेश के शामली, अलीगढ़, बिजनौर, मेरठ और शिवनगर के रहने वाले हैं। इनमें से 10 मरीज 50 से 81 आयुवर्ग के हैं। वहीं छह संक्रमित 35 से 49 आयुवर्ग के हैं। एम्स प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 लोगों की सर्जरी कर दी है। सर्जरी के बाद सभी मरीजों का स्वास्थ्य समान्य बताया जा रहा है। इसके साथ एम्स प्रशासन ने कोविड संक्रमितों में ब्लैक फंगस की जांच के लिए एक 15 सदस्यीय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन भी किया है।

ब्लैक फंगस से संक्रमित एक 36 वर्षीय युवक की मौत हुई है। इसके अलावा 16 और लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। इनमें से 11 लोगों की सर्जरी कर दी गई है। अस्पताल में भर्ती कोविड संक्रमितों की जांच के लिए विशेषज्ञों की 15 सदस्यीय समिति गठित की गई है।
- प्रोफेसर रविकांत, निदेशक, एम्स, ऋषिकेष
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ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा हर दिन बढ़ता जा रहा है। तीर्थनगरी ऋषिकेश का हाल यह है कि श्मशान घाट में भी दाह संस्कार के लिए जगह की कमी पड़ रही है। मजबूरी में लोग गंगा तट से बिल्कुल सटाकर खुले में कोविड शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं।

ऐसे में कई बार शव के अवशेष भी गंगा में गिर रहे रहे, जबकि दाह संस्कार के बाद बिना विसंक्रमित किए शवों की राख भी गंगा में बहाई जा रही है। ऐसे में संक्रमण के फैलने का खतरा तो बढ़ ही रहा है, वहीं गंगाजल और शहर की आबोहवा भी प्रदूषित हो रही है।

उत्तराखंड में कोरोना : कोरोना की तीसरी लहर में सामने आएगी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती

ऋषिकेश के दोनों मुक्तिधाम में रोजाना 20 से 30 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है। इनमें से 10 से 15 शव कोविड संक्रमितों के होते हैं। पूर्णानंद घाट पर गंगा नदी के ठीक किनारे कोविड शवों को दाह संस्कार किया जा रहा है। कई बार दाह संस्कार के दौरान शवों के अवशेष भी गंगा नदी में बह जाते हैं।

वहीं, दाह संस्कार के बाद चिता की राख को बिना विसंक्रमित किए सीधा नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। जबकि चंद्रेश्वर नगर मुक्तिधाम में दाह संस्कार तो श्मशान घाट परिसर में ही होता है। लेकिन यहां भी दाह संस्कार के बाद बिना विसंक्रमित किए चिता की राख को गंगा में बहा दिया जाता है। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
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उत्तराखंड में कोरोना: गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, लगातार बन रहे कंटेनमेंट जोन

उत्तराखंड के गांवों में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऊधमसिंह नगर जिले में रुद्रपुर के शहरी इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। रुद्रपुर के भगवानपुर, फौजी मटकोटा, धर्मपुर, मोतीपुर सहित अन्य विकासखंडों के गांवों में कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आ रहे हैं। गांवों में संक्रमित मरीजों की संख्या और अधिक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच से परहेज करने से कई मरीजों के बारे में पता ही नहीं चल पा रहा है। कोविड-19 के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना ने कहा कि तहसीलों में मोबाइल वैन तैनात हैं, जो ग्राम प्रधान व आशा कार्यकर्ताओं की सूचना पर ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग कर रहीं हैं।

देहरादून : बेड उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहा खेल, अस्पताल प्रबंधन वाले जता रहे हैं किसी गिरोह की आशंका

पिथौरागढ़ : जिले की 196 ग्राम पंचायतों में कोरोना की दस्तक
पिथौरागढ़ जिले के आठ विकासखंडों में 196 ग्राम पंचायतों में कोरोना पहुंच चुका है। इसके अलावा 100 से अधिक ग्राम पंचायतों में सदी-जुकाम, खांसी और बुखार के मरीज लगातार मिल रहे हैं। विण विकासखंड के 85 ग्राम पंचायतों में 30, मूनाकोट के 72 ग्राम पंचायतों में 13, डीडीहाट के 106 में 16, गंगोलीहाट के 117 में 70, मुनस्यारी के 95 में 45, धारचूला के 62 में चार, कनालीछीना के 92 में छह और बेड़ीनाग के 84 में 12 ग्राम पंचायतों में कोरोना पहुंच चुका है। सीएमओ डॉ.एचसी पंत ने बताया कि जिन गांवों में बुखार और सर्दी जुकाम की शिकायत मिल रही है, उन गांवों में टीम भेजकर सैंपलिंग कराई जा रही है। 

चंपावत : दो-तिहाई कंटेनमेंट जोन गांवों में
कोरोना संक्रमण के दो-तिहाई मामले गांवों से आ रहे हैं। जिले में 5888 संक्रमित लोगों में से 3709 (63 प्रतिशत) गांवों और उनके आसपास से हैं। जिले में बने 27 कंटेनमेंट जोनों में से 18 (स्यांला, बमनपुरी, पचपखरिया, दियारतोली, गंभीरगांव, डूंगराबोहरा, स्वांला, दियूरी, नेकाना, बेलखेत, कांडा, ढकना, दियारतोला, सौराई, बकोड़ा, तल्ली खटोली, मल्ली खटोली, मिर्तोला) ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। 

अल्मोड़ा : 14 ग्रामीण इलाकों में कंटेनमेंट जोन  
अल्मोड़ा जनपद के कुल 14 ग्रामीण इलाकों में कंटेनमेंट जोन हैं। इनमें सबसे पहले एक मई को रानीखेत के गघोड़ा गांव को कंटेनमेंट जोन बनाया गया। गांवों में संक्रमण के मामले बढ़ते गए और कंटेनमेंट जोनों की संख्या भी बढ़ती गई। वर्तमान में भनोली तहसील में मकड़ाऊ और डूंगरा, सोमेश्वर में मल्ला और सुपाकोट, भिकियासैंण में भरकेंडा, चौखुटिया में झूड़गा, सल्ट में मेठानी और नैकणा, द्वाराहाट में गांव पाली और नैखोला, स्याल्दे में घरखेत, घुगुती, सुरमोली और सियानगर को कंटनमेंट जोन बनाया गया है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर किए जाने की जरूरत है। 

बागेश्वर : ग्रामीण क्षेत्रों में 750 लोग होम आइसोलेट
बागेश्वर जिले के ग्रामीण इलाकों में तेजी से कोरोना संक्रमण फैला है। गांवों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कपकोट के सूपी, बागेश्वर के ढुंगापाटली को माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। जौलकांडे, चौरा समेत तमाम गांवों में कोरोना संक्रमित मिले हैं। कांडा, कपकोट, गरुड़ तहसील के गांवों में संक्रमित मिले हैं। बाहरी क्षेत्र से गांवों में लौटे लोगों में संक्रमण पाया गया है। जिले में 850 संक्रमितों को होम आइसोलेट किया गया है। इनमें से करीब साढ़े सात सौ लोग ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। 

नैनीताल : बेतालघाट ब्लॉक में 600 से अधिक सक्रिय मामले
नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में कोविड जांच और इलाज के लिए मरीजों को हल्द्वानी व नैनीताल भेजा जा रहा है। यहां अभी तक लगभग 10 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं भीमताल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हफ्ते में दो दिन कोरोना जांच की जा रही है जबकि यहां नियमित रूप से 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण हो रहा है। जांच रिपोर्ट भी तीसरे दिन उपलब्ध हो जा रही है। भीमताल में 60 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने के साथ ही अभी तक दो लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। गरमपानी स्थिति सीएचसी में कोरोना जांच के लिए ट्रूनेट मशीन उपलब्ध है। मशीन में रोजाना 30 लोगों की जांच होती है। पॉजिटिव मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे गांव के लोगों की आरटी-पीसीआर जांच करवाती है। बेतालघाट ब्लॉक में कोरोना के छह सौ से अधिक सक्रिय मामले हैं, जिन्हें होम आइसोलेट किया गया है। गंभीर स्थिति में मरीजों को गरमपानी के कोविड सेंटर भेजा जा रहा है। भवाली व ओखलकांडा क्षेत्र में भी कोरोना के छह से दस केस रोजाना आ रहे हैं। सभी मरीजों को स्थानीय स्तर पर होम आइसोलेट कर दवाइयां दी जा रही हैं। सीएमओ डा. भागीरथी जोशी का कहना है कि हर क्षेत्र में सीएचसी व पीएचसी प्रभारी अपनी टीमों के साथ कोविड मरीजों के इलाज और संक्रमण की रोकथाम में लगे हुए हैं।
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देहरादून : बेड उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहा खेल, अस्पताल प्रबंधन वाले जता रहे हैं किसी गिरोह की आशंका

कोरोना वायरस की जांच
कोरोना महामारी के बीच लोग जहां बढ़-चढ़कर मरीजों व उनके परिजनों की मदद कर रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो प्लाज्मा दान करने से लेकर अस्पताल में बेड उपलब्ध कराने के नाम पर खेल कर रहे हैं। कुछ अस्पताल प्रबंधनों ने इसमें किसी बड़े गिरोह के संचालित होने की आशंका जताई है।

उत्तराखंड में ब्लैक फंगस : दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, दो संदिग्ध मरीज भी मिले

कोरोना काल में पहले जीवन रक्षक रेमडेसिविर इंजेक्शन, अन्य जरूरी दवाओं, ऑक्सीजन गैस सिलिंडर, पल्स ऑक्सीमीटर, फ्लो ऑक्सीमीटर की जमाखोरी और कालाबाजारी की समस्या आ रही थी। वहीं, अब कुछ लोग प्लाज्मा और अस्पताल में बेड उपलब्ध कराए जाने के नाम पर भी खेल कर रहे हैं। ऐसी आशंका शहर के कुछ अस्पतालों के प्रबंधनों ने जताई है।

उत्तराखंड : शादी में शामिल होने के लिए निगेटिव रिपोर्ट जरूरी करने की तैयारी, कर्फ्यू एक सफ्ताह बढ़ाने के संकेत

उनका कहना है कि एनजीओ के नाम पर दिन भर से लेकर देर रात तक उन्हें कॉल आ रही हैं। कुछ कॉल तो दिल्ली, मुंबई के अलावा दुबई और अन्य देशों से भी आने की बात कही गई है। इनमें से कॉल करने वाले कई लोग तो न मरीज की स्थिति ठीक से बता पाते हैं।

न किस अस्पताल में भर्ती हैं इसकी जानकारी दे रहे हैं। कई बार अस्पतालों में संबंधित मरीज के लिए बेड तो बुक कर दिया जाता है, लेकिन मरीज नहीं पहुंच पाता है। इससे अन्य जरूरतमंद मरीजों को भी बेड की सुविधा नहीं मिल पाती है।
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उत्तराखंड : कोविड कर्फ्यू में पिता का छूटा रोजगार, नहीं मानी हार, लिफाफे बेच भाई-बहन चला रहे परिवार

कोरोना महामारी ने घरों की दीपक ही नहीं बल्कि गरीबों के चूल्हे भी बुझा दिए। मेहनत-मजदूरी कर बच्चों का पालन करने वाले परिवार कोविड की बीमारी नहीं, बल्कि पेट की आग बुझाने के लिए भी जूझ रहे हैं। गरीब गुरबत में जीवन यापन करने वाले वीरू के परिवार ने भूख से लड़ने के बाद भी विषम परिस्थितियों में हार नहीं मानी। परिवार लिफाफे बना रहा है। वीरू के मासूम बेटी और बेटा बाजार में लिफाफे बेचकर दो वक्त का राशन जुटा रहे हैं।

उत्तराखंड में ब्लैक फंगस : दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, दो संदिग्ध मरीज भी मिले

कोरोनाकाल ने हर किसी को झकझोर दिया है। व्यापार चौपट है। हर घर में कोई न कोई बीमार है। स्ट्रीट वेंडर से लेकर दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले परिवार बीमारी के साथ भूख से लड़ रहे हैं। कोविड कर्फ्यू में कामधंधा नहीं मिलने से परिवारों के चूल्हे बुझ गए हैं।

उत्तराखंड : शादी में शामिल होने के लिए निगेटिव रिपोर्ट जरूरी करने की तैयारी, कर्फ्यू एक सफ्ताह बढ़ाने के संकेत

ज्वालापुर के वीरू का परिवार भी संकट की घड़ी से गुजर रहा है। वीरू दिहाड़ी मजदूर है। कर्फ्यू के बाद से काम नहीं मिल रहा है। परिवार में पत्नी के अलावा छह बच्चे हैं। कई दिनों तक परिवार ने भूख से जंग लड़ने के बाद भी हार नहीं मानी।
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उत्तराखंड में कोरोना :  कोरोना की तीसरी लहर में सामने आएगी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती

कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए सरकार को अब बड़े पैमाने पर बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत होगी। इसके साथ ही बच्चों के कोविड उपचार के लिए भी सरकार को नई मानक प्रचालन प्रक्रिया या एसओपी की जरूरत होगी। 

उत्तराखंड : शादी में शामिल होने के लिए निगेटिव रिपोर्ट जरूरी करने की तैयारी, कर्फ्यू एक सफ्ताह बढ़ाने के संकेत

दूसरी लहर से पहले लापरवाही बरतने पर हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार इस बार अपनी तरफ से कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है। इसके लिए सरकार की ओर से विशेषज्ञ समिति से सुझाव भी मांगे गए हैं। सरकार ने अब स्वीकार किया है कि तीसरी लहर का सामना राज्य को करना पड़ सकता है और यह लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी।

उत्तराखंड में ब्लैक फंगस : दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, दो संदिग्ध मरीज भी मिले

इसी आधार पर प्रदेश सरकार के सामने चुनौती अब कई गुना बढ़ गई है। छोटे बच्चों को कोविड केयर वार्ड में रखने से लेकर कोरोना उपचार में दवा आदि को लेकर प्रदेश सरकार को नए सिरे से सोचना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक तीसरी लहर में बाल रोग विशेषज्ञों की भूमिका बहुत बढ़ जाएगी। समस्या यह है कि प्रदेश में इस तरह के विशेषज्ञों की भी खासी कमी है। 
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उत्तराखंड :  इंग्लैंड में दम दिखाएंगी प्रदेश की दो बेटियां, एकता बिष्ट और स्नेह राणा भारतीय महिला टीम में शामिल 

प्रदेश की दो बेटियां इंग्लैंड में होने वाली टेस्ट, वनडे और टी-20 सीरीज में अपना दम दिखाएंगी। दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टीम में उत्तराखंड की एकता बिष्ट और स्नेह राणा ने जगह बनाई है।

उत्तराखंड : इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में देहरादून के अभिमन्यु ईश्वरन शामिल, दून से सीखा क्रिकेट का ककहरा

दोनों महिला क्रिकेटरों को तीनों फॉर्मेट के लिए चुनी गई टीम में जगह मिली है। एकता भारतीय टीम की नियमित सदस्य हैं। जबकि स्नेह राणा को पांच साल के लंबे अंतराल के बाद टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने फरवरी 2016 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। 

पांच साल बाद हुई स्नेह की वापसी

राइट ऑर्म ऑफ ब्रेक बॉलिंग के साथ स्नेह दाएं हाथ की उपयोगी बल्लेबाज भी हैं। 18  फरवरी 1994 को दून में जन्मीं स्नेह ने 19 जनवरी 2014 को श्रीलंका के खिलाफ अपने वन डे और 26 जनवरी 2014 को टी-20 करियर की शुरूआत की।

उन्होंने सात फरवरी 2016 को अपना आखिरी वनडे और 24 फरवरी 2016 को टी-20 मुकाबला खेला था। अब पांच साल से ज्यादा अंतराल के बाद उन्हें भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला है। स्नेह ने अब तक सात वनडे मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने सात विकेट चटकाने के अलावा 21 रन बनाए हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ  प्रदर्शन 26 रन देकर तीन विकेट है। वहीं, पांच टी-20 मुकाबलों में उन्होंने 27 रन बनाए और एक विकेट लिया है। 

एकता से फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

मूलत: अल्मोड़ा निवासी एकता बिष्ट से क्रिकेट प्रेमियों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। आठ फरवरी 1986 को अल्मोड़ा के खजांची मोहल्ले में जन्मीं एकता बाएं हाथ की बल्लेबाज और स्लो लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज हैं। एकता ने दो जुलाई 2011 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने वनडे करियर की शुरूआत की।

2017 महिला विश्व कप में भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचाने में उनका अहम योगदान रहा। पाकिस्तान के खिलाफ 18 रन देकर पांच विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वर्ष 2017 में  शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें आईसीसी की वनडे और टी-20 टीम के लिए नामित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड सरकार ने 2017 में  उन्हें राज्य खेल रत्न देकर सम्मानित किया था। 
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उत्तराखंड में ब्लैक फंगस : दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, दो संदिग्ध मरीज भी मिले

ऋषिकेश एम्स में ब्लैक फंगस के दो केस मिले हैं। दोनों मरीज यूपी के रहने वाले हैं। एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत ने दोनों मरीजों में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि की है। 

उत्तराखंड में कोरोना : मौत की सूचना न देने वाले अस्पतालों के सीएमएस व एमएस पर दर्ज होगा केस, एक को नोटिस

दोनों मरीज कोरोना संक्रमित हैं। जांच के दौरान दोनों मरीजों में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं देहरादून के महंत इंदिरेश अस्पताल और अल्मोड़ा में भी ब्लैक फंगस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है। 

ब्लैक फंगस का एक संदिग्ध मरीज आया 

देहरादून के श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में ब्लैक फंगस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की जांच कराई है। मरीज की जांच रिपोर्ट नहीं आई। इसलिए अस्पताल के डॉक्टर मरीज को संदिग्ध ब्लैक फंगस संक्रमित मानकर इलाज कर रहे हैं।

उत्तराखंड : शादी में शामिल होने के लिए निगेटिव रिपोर्ट जरूरी करने की तैयारी, कर्फ्यू एक सफ्ताह बढ़ाने के संकेत

अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि यह मरीज पहले किसी अन्य अस्पताल में कोरोना संक्रमण के चलते भर्ती हुए थे। उन्होंने खुद ही अस्पताल आकर आंखों में समस्या होने की बात कही है और ब्लैक फंगस होने का भी संदेह जताया है। डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर मरीज की जांच कराई है। इसका इलाज भी लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है।
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