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बुधवार को बन रहा है सिद्ध योग, इन 4 राशि वालों को मिलेगी बड़ी कामयाबी
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बुधवार को बन रहा है सिद्ध योग, इन 4 राशि वालों को मिलेगी बड़ी कामयाबी

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योग दिवस : विदेश में भी योग की अलख जगा रहे राकेश, नौ सालों से लोगों को जागरूक कर रहे प्रदीप

आईआईटी रुड़की में बतौर योग प्रशिक्षक तैनात राकेश मलिक देश के साथ ही विदेश में भी योग की अलख जगा रहे हैं।

21 जून 2021

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Digital Edition

स्वास्थ्य बजट: प्रति व्यक्ति बजट खर्च करने में हिमालयी राज्यों में सबसे पीछे उत्तराखंड

हिमालयी राज्यों में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य बजट खर्च में उत्तराखंड सबसे पीछे है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के स्टेट फाइनेंस 2019 की रिपोर्ट के आधार पर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) ने तुलनात्मक अध्ययन के बाद फैक्टशीट जारी की है।

एसडीसी फाउंडेशन ने पिछले तीन वर्षों 2017, 2018 और 2019 में हिमालयी राज्यों में जन स्वास्थ्य (प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष) पर खर्च की गई धनराशि का लेखा-जोखा जारी किया है। जिसमें प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं में किए गए खर्च में भी उत्तराखंड 10 हिमालयी राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है। उत्तर पूर्वी के हिमालयी राज्यों में पिछले तीन सालों में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं में राष्ट्रीय औसत से करीब तीन गुना ज्यादा धनराशि खर्च की है।

पड़ोसी राज्य हिमाचल ने उत्तरखंड की तुलना मे प्रति व्यक्ति पर 72% ज्यादा खर्च किया है। एसडीसी के रिसर्च हेड ऋषभ श्रीवास्तव कहना है कि स्वास्थ्य बजट के हिमालयी राज्यों के आंकड़े साफ कर देते हैं कि हमारी स्थिति लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में इतनी खराब क्यों है। बजट अच्छा होने पर ज्यादा डॉक्टर, डाग्नोस्टिक सुविधाएं और दवाइयां मिल सकेंगी, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं किया जा रहा है।

किस राज्य ने कितना किया खर्च
वर्ष 2017 से 2019 के बीच हिमालयी राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अरुणाचल प्रदेश से सबसे ज्यादा 28417 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च किए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इन तीन वर्षों में सबसे कम मात्र 5887 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च किए हैं। हिमालयी राज्य सिक्किम ने इस दौरान 21137, मिजोरम ने 16712, हिमाचल प्रदेश ने 10176, मेघालय ने 9856, जम्मू कश्मीर ने 9469, मणिपुर ने 7755 और त्रिपुरा ने 7156 रुपये प्रति व्यक्ति जन स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च किए हैं।

देश के सभी राज्यों में कोविड की स्थिति के अध्ययन के दौरान यह बात निरंतर सामने आई थी कि कोरोना के मामले, संक्रमण व मृत्यु दर में राज्य की स्थिति अधिकांश समय निचले पायदान पर है। साफ है कि जिस तरह से हम कोविड की स्थिति को संभालने में नाकाम हुए, उसके लिए कहीं न कहीं बजट की कमी अवश्य कारण रही है। उत्तराखंड में मात्र 5.38 रुपये प्रति दिन प्रति व्यक्ति व्यय से पर्वतीय प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं दी जा सकतीं और सरकार को स्वास्थ्य के बजट को अन्य राज्यों के निकट लाने की आवश्यकता है।
- अनूप नौटियाल, संस्थापक, एसडीएस फाउंडेशन
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उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 171 नए संक्रमित, आठ की मौत, 221 मरीज हुए ठीक 

उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 171 नए मामले सामने आए हैं। वहीं आठ मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा आज 221 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार को 23663 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, अल्मोड़ा में 23, बागेश्वर एक, चमोली में छह, चंपावत में 17, देहरादून में 70, हरिद्वार में 11, नैनीताल में 13, पौड़ी में तीन, पिथौरागढ़ में आठ, रुद्रप्रयाग में नौ, टिहरी में पांच, ऊधमसिंह नगर में तीन और उत्तरकाशी में दो मामले सामने आए हैं।

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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या तीन लाख 38 हजार 978 हो गई है। इनमें से तीन लाख 23 हजार 225 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 2896 पहुंच गई है। राज्य में कोरोना के चलते अब तक चुल 7052 लोगों की जान जा चुकी है।
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ऋषिकेश: साक्षी महाराज बोले- यूपी में सबसे पहले लागू होगा जनसंख्या नियंत्रण कानून 

भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण काननू लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है। साक्षी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में सबसे बड़ा कदम बढ़ाया है। अब केंद्र सरकार को भविष्य के खतरे को देखते हुए जल्द से जल्द कानून बनाना चाहिए। 

पत्रकारों से बात करते हुए उतर प्रदेश के उन्नाव क्षेत्र से सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि देश में अब हम दो हमारे दो नहीं, बल्कि सबके दो की बात होगी। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती जनसंख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सांसद पहले ही चिंता व्यक्त कर चुके हैं। 145 सांसदों ने तो जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।

साक्षी महाराज ने कहा कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण काननू लागू करने का निर्णय लेकर सराहनीय पहल की है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राष्ट्र हित में कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा अगर ऐसा न हुआ तो भविष्य में जनसंख्या विस्फोट से घातक परिणाम सामने आ सकते हैैं। देश हित में सभी दलों को जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता का समर्थन करना चाहिए।       
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रोमांच का सफर: 52 दिन बाद फिर पर्यटकों से गुलजार हुई टिहरी झील, जमकर उठाया बोटिंग का लुत्फ, तस्वीरें... 

विश्व प्रसिद्ध टिहरी झील में 52 दिन बाद आज से स्पीड और सामान्य बोटों का संचालन शुरू हो गया है। दोपहर 12 बजे तक बड़ी संख्या में पर्यटक बोटिंग के लिए पहुंचे हैं। बोट यूनियन से जुड़े लोगों ने बोटों का संचालन शुरू करने से पहले झील में दुग्ध अभिषेक किया।

बोटिंग करने आने वाले पर्यटकों को 72 घंटे पूर्व की कोविड निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साथ लानी होगी। शारीरिक दूरी के साथ ही बोटिंग क्षमता की 50 फीसदी सीटों पर ही पर्यटकों को बैठाने की अनुमति होगा।

उत्तराखंड: टिहरी झील में आज से फिर शुरू हुई बोटिंग, कोरोना निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य

42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण 30 अप्रैल 2021 से बोटों का संचालन पूरी तरह से बंद था। वर्तमान में झील में 99 बोटों का संचालन होता है।

बदरीनाथ हाईवे: चट्टान से भारी मात्रा में सड़क पर आया मलबा, वाहनों की आवाजाही थमी, तस्वीरें...

साथ ही स्पीड बोट, पॉवर बोट, जेड अटैक, जेड स्की, डॉलफिन राइड, हॉटडाग, फ्लाई, बनाना राइडिंग, वाटर स्कूटर के अलावा झील में पैरा सिलिंग जैसी जल क्रीड़ाएं भी होती हैं। प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार आज से  झील में सशर्त बोटिंग गतिविधियां शुरू हो गई हैं। 
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उत्तराखंड: चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए ऑनलाइन ट्रिप कार्ड जरूरी, यूजर चार्ज भी हुआ महंगा

टिहरी झील में बोटिंग शुरू
इस साल चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा पर जाने वालों को ऑनलाइन ट्रिप कार्ड लेना होगा। शासन स्तर पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। परिवहन आयुक्त को बैठक के फैसलों के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

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प्राइवेट वाहनों से यूजर चार्ज के रूप में एंट्री सेस भी ऑनलाइन वसूला जाएगा। यह चार्ज 20 रुपये से बढ़ाकर इस साल 50 रुपये किया जा रहा है।

बैठक में इसका प्रस्ताव परिवहन आयुक्त की ओर से भेजने और एनआईसी के साथ मिलकर हिमाचल की तर्ज पर राशि में बढ़ोतरी करने को कहा गया है। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्राइवेट वाहनों में ट्रिप कार्ड की व्यवस्था तत्काल करने के लिए जो भी जरूरत हो, उसके लिए तत्काल कार्यवाही अमल में लाई जाए।
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बदरीनाथ हाईवे: चट्टान से भारी मात्रा में सड़क पर आया मलबा, वाहनों की आवाजाही थमी, तस्वीरें...

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कर्णप्रयाग के समीप चट्टान से भारी मात्रा में मलबा आने के कारण बंद हो गया है। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे चट्टानी भाग से मलबा हाईवे पर आ गया। जिससे वाहनों की आवाजाही थम गई है। एनएच की ओर से हाईवे को खोलने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

चमोली जनपद में ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सोमवार देर रात सिरोहबगड़ में दस घंटे बाद खोला गया था। वहीं, सिंगटाली और कौड़ियाला और विष्णुप्रयाग में हाईवे बहाल हो गया है। जबकि कर्णप्रयाग-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं खोला जा सका। वहीं, जिले में अब भी 67 मोटर मार्गों का संपर्क गावों से कटा हुआ है।

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उधर, मौसम विभाग ने आज गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। वहीं, राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में तेज धूप खिली रहने का अनुमान है। हालांकि सुबह से भी प्रदेश भर में हल्की धूप खिली है। वहीं, मौसम केंद्र के अनुसार तापमान बढ़ने से लोगों को गर्मी और उमस से परेशान भी होना पड़ सकता है। लेकिन शाम को हल्की बारिश हो सकती है।
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कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़ा: मैक्स कॉरपोरेट को 26 मार्च को मिली थी कोविड जांच की अनुमति 

महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की कोविड निगेटिव जांच रिपोर्ट के कथित घोटाले के समय को लेकर चर्चा के बीच यह सामने आया है कि आरोपी मैक्स कॉरपोरेट सर्विस को कोविड जांच की अनुमति 26 मार्च को दी गई थी। जबकि, फर्म की ओर से उसके पार्टनर ने 11 जनवरी को इसके लिए आवेदन किया था। कुंभ मेला की अवधि एक से 30 अप्रैल तक रही। मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने 11 जनवरी को कुंभ मेलाधिकारी के कार्यालय में कोविड जांच के लिए आवेदन किया था।

कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़ा: मैक्स कॉरपोरेट के बाद अब लाल चंदानी लैब भी पहुंची हाईकोर्ट

आवेदन पत्र में फर्म के पार्टनर की तरफ से कई आवश्यक जानकारियां दी गई थीं। आवेदन पत्र के अनुसार उनकी अपनी लैब है। साथ ही कई अन्य जांच लैब से भी अनुबंध है। फर्म ने खुद को कोरोना जांच करने में पूरी तरह से सक्षम बताया था। इसके बाद 26 मार्च 2021 को मैक्स काॅरपोरेट सर्विस को कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड जांच की अनुमति दी गई थी।

बता दें कि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई थी कि यह मामला किस मुख्यमंत्री के कार्यकाल का है। मामले को लेकर कांग्रेस भी हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लगातार इस मामले को सोशल मीडिया के माध्यम से उठा रहे हैं। 

दिल्ली समेत कई राज्यों का किया था जिक्र
फर्म ने अपने पत्र में जिक्र किया था कि दिल्ली, हरियाणा, जम्मू एंड कश्मीर समेत कई राज्यों में उनके कर्मचारी कोरोना की जांच की एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कर रहे हैं। 

33 लेबोरेट्री का किया था दावा 
फर्म ने पत्र में अपनी 33 जांच लैबोरेटरी होने का भी दावा किया था। इसके साथ ही कहा था कि वह आईसीएमआर के नियमों के अनुसार ही जांच करते हैं। उनकी लैबोरेटरी में बेहतर जांचकर्ता हैं। 

‘प्रदेश सरकार के साथ हैं जुड़े’
फर्म के पत्र में लिखा था कि वह उत्तराखंड सरकार के साथ भी जुड़े हुए हैं। वर्ष 2020 में अगस्त में कोरोना काल के दौरान सरकार ने उन्हें प्रदेश में कोरोना जांच के लिए अनुमति भी दी थी। कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की जांच के लिए वह पूरी तरह से सक्षम हैं। 
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मजबूरी: मुफलिसी में दिन काट रही देश की पहली दिव्यांग निशानेबाज, सड़क पर सामान बेचकर कर रहीं गुजारा, तस्वीरें...

देहरादून में रहने वाली देश की पहली दिव्यांग निशानेबाज दिलराज कौर पारिवारिक संकट के कारण मुश्किल हालात में हैं। पिता और भाई की मृत्यु के बाद उनके सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है। मजबूरी में वो अपनी मां के साथ छोटा-मोटा सामान बेच रहीं हैं, जिससे कि उनके घर का खर्च चल सके। 

दिलराज कौर ने पैरालंपिक शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक रजत और राष्ट्रीय स्तर पर 24 स्वर्ण समेत कई पदक अपने नाम किए हैं। इसके अलावा वर्ल्ड पैरा स्पोर्ट्स में पहली सर्टिफाइड कोच, स्पोर्ट्स एजुकेटर जैसी कई उपलब्धियां उनके साथ जुड़ी हुई हैं। इन दिनों उनके लिए हालात बेहद खराब हैं।

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उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से बीमार पिता के उपचार पर लाखों रुपये खर्च हुए। लंबे समय तक बीमार रहने के बाद पिता की मौत हो गई। कुछ समय पहले एक दुर्घटना में उनका भाई घायल हो गया। उनके उपचार पर भी बहुत ज्यादा खर्च आया। बाद में भाई की भी मौत हो गई।

अब वो और उनकी मां किसी तरह अपनी आजीविका चला रही हैं। परिवार की पूरी सेविंग पिता और भाई के उपचार पर खर्च हो चुकी है। तब सीएम विवेकाधीन कोष से भी उनकी मदद की गई थी। 
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तैयारी: कोटद्वार-नजीबाबाद के बीच अब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन

सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो जल्द ही कोटद्वार-नजीबाबाद ब्रांच लाइन पर ट्रेन 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। बीते अप्रैल माह में उत्तर रेलवे की ओर से कोटद्वार-नजीबाबाद रेल लाइन पर विद्युतीकरण का काम पूरा किया गया, जिसके बाद से कोटद्वार-दिल्ली के बीच चलने वाली चेयरकार सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस को भी इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित किया जाने लगा है।

इससे पहले तक इस रूट पर नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच डीजल इंजन से ट्रेन संचालित की जाती रही। विद्युतीकरण के बाद अब रेलवे ने वर्षों पुराने ट्रेक के स्थान पर नया रेल ट्रेक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे ट्रेनों की गति में इजाफा होगा और समय भी बचेगा। 

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रेल अधिकारियों का कहना है कि रेलपथ विभाग ने प्रथम चरण में आठ किलोमीटर रेल ट्रेक बदलने के लिए अनुमति प्राप्त कर ली है। नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच की दूरी 24 किलोमीटर है। करीब तीन दशक पूर्व डाली गई 52 केजी क्षमता की रेल लाइन की मियाद लगभग पूरी होने के बाद रेलवे ने नई रेल लाइन बिछाने का फैसला लिया है।

स्टेशन अधीक्षक मनोज रावत ने बताया कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर धर्मेंश कुमार के निर्देशन में रेल लाइन बदलने का अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। नया रेल ट्रेक 60 केजी क्षमता का बिछाया जाएगा, जिस पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें आसानी से आवागमन कर सकेंगी। 
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