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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

हाईकोर्ट: दवा इकट्ठा करना नेताओं का काम नहीं, राजनीतिक फायदे के लिए न हो जमाखोरी

दिल्ली हाईकोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल उपकरणों और दवाइयों की जमाखोरी को लेकर आज सुनवाई हुई। इस दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि कोरोना के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाई को जमा करने का काम राजनेताओं का नहीं है। नेताओं द्वारा दवा  बांटने के मामले में कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए दवाइयों की जमाखोरी ठीक बात नहीं है, ऐसा न हो।  

कोर्ट ने नेताओं को निर्देश दिया है कि अगर आप भला करना चाहते हैं तो जिन दवाइयों की जमाखोरी की है, उसे सरकारी अस्पतालों में वितरण के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को सौंप दें। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आपसे दवाइयों की जमाखोरी की उचित जांच करने की उम्मीद है। साथ ही कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत ने पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वह लगाए कि नेता कहां से दवा लाकर इकट्ठा कर रहे हैं और साथ ही इस मामले की सही जांच करें।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ऐसा बताया गया है कि ये दवाएं जनता की भलाई के लिए खरीदी गईं हैं, न कि सियासी फायदे के लिए। इसलिए नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे कोविड-19 दवाओं के अपने भंडार दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) को सौंप देंगे, ताकि सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंदों के बीच इनका वितरण किया जा सके।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा पेश की गई उस स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की जो राष्ट्रीय राजधानी में रेमडेसिविर तथा कोविड-19 की अन्य दवाओं की नेताओं द्वारा जमाखोरी तथा वितरण के आरोपों के संबंध में की गई जांच से संबंधित थी।

कोर्ट ने पुलिस की उस स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताया जिसमें यूथ कांग्रेस के बीवी श्रीनीवास समेत नौ लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर की जमाखोरी के मामले में क्लीन चिट दी गई है। अदालत ने कहा हमें यह स्वीकार नहीं है। वह कैसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के ऑक्सीजन सिलिंडर खरीद सकते हैं। राजनीतिक पार्टियां महामारी को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि नेता बड़ी मात्रा में कोविड-19 की दवाओं को खरीद रहे हैं और उन्हें वितरित कर रहे हैं जबकि मरीज इन दवाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं। याचिका में इस बारे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।
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दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट

कोरोना वायरस: दिल्ली हवाईअड्डे का टर्मिनल-2 आज रात 12 बजे से होगा बंद, टी-3 से होगा विमानों का संचालन

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण उड़ानों की संख्या में काफी कमी आने के चलते दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टी2 टर्मिनल को सोमवार मध्य रात्रि से बंद करने का फैसला लिया गया है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार रात 12 बजे से सभी उड़ानें टर्मिनल टी3 से ही संचालित होंगी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिल्ली के हवाईअड्डे पर प्रतिदिन करीब 325 विमानों का आवागमन हो रहा है। महामारी की मार से पहले तक यहां से प्रतिदिन 1,500 उड़ानें संचालित होती थीं। सूत्रों ने बताया कि फरवरी माह में दिल्ली हवाईअड्डे पर प्रतिदिन यात्रियों की औसत संख्या करीब 1.15 लाख थी जो महामारी की दूसरी लहर में घटकर प्रतिदिन करीब 30,000 रह गई है।

दिल्ली हवाईअड्डे ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब भारत और यहां का विमानन क्षेत्र महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित है। नागर विमानन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की दैनिक संख्या जो 2.2 लाख से अधिक हुआ करती थी, अब घटकर करीब 75,000 रह गई है।

इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात भी महामारी की दूसरी लहर से प्रभावित हुआ है। उल्लेखनीय है कि भारत में कोविड-19 के 2,81,386 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर सोमवार को 2,49,65,463 हो गई। पिछले 27 दिन में एक दिन में सामने आए ये सबसे कम नए मामले हैं। वहीं, संक्रमण से 4,106 लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 2,74,390 हो गई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार की सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी 35,16,997 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 14.09 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमण से कुल 2,11,74,076 लोग उबर चुके हैं और मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 84.81 प्रतिशत है। वहीं, कोविड-19 से मृत्यु दर 1.10 प्रतिशत है।
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ग्राउंड रिपोर्ट : ब्लैक फंगस की दवा अचानक गायब, कालाबाजारी शुरू, 12 हजार में एक इंजेक्शन

कोरोना संक्रमित और रिकवर रोगियों में अचानक से बढ़े ब्लैक फंगस के मामलों ने एक बार फिर मुश्किलें पैदा कर दी हैं। राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती इन मरीजों के लिए अम्फोटेरीसीन बी नामक इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है। एक इंजेक्शन की कीमत 12 हजार रुपये तक ली जा रही है, जिसकी वजह से इसकी कालाबाजारी भी पिछले तीन दिन में काफी बढ़ गई है। पहले रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी के बाद अब अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल राजधानी के तीन अस्पताल एम्स, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और सर गंगाराम अस्पताल को मिलाकर 100 से ज्यादा मरीज उपचाराधीन हैं। अमर उजाला को मिली शिकायत के बाद जब भागीरथी पैलेस, चांदनी चौक के अलावा बड़े दवा दुकानदारों के पास जाकर पड़ताल की गई तो पता चला कि वाकई में यह इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है। दुकानदारों ने कहा कि पिछले दो-तीन दिन में इस इंजेक्शन की कालाबाजारी काफी बढ़ गई है।

दवा नहीं, कैसे करें मरीज भर्तीसर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मनीष मुंजल ने बताया कि उनके यहां बीते शनिवार शाम तक 45 ब्लैक फंगस के रोगी भर्ती थे। जिन मरीजों को कोविड के साथ यह संक्रमण है उन्हें भर्ती कर लिया जा रहा है लेकिन नॉन कोविड मरीज के लिए न पर्याप्त बेड हैं और न ही इंजेक्शन। अपने मरीजों के लिए वे लगातार दवा के लिए संपर्क कर रहे हैं लेकिन कहीं भी यह इंजेक्शन उन्हें नहीं मिला।

सरकार ने पहले नहीं दिया ध्यानपड़ताल के दौरान पता चला कि कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले पहली बार सामने नहीं आए हैं। पिछले साल भी सबसे पहले सर गंगाराम अस्पताल ने ऐसे मरीजों का खुलासा किया था लेकिन उस दौरान राज्य व केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया। अगर उस समय सतर्कता बरतते हुए इस संक्रमण के बारे में जागरुकता और दवा उत्पादन पर काम किया जाता तो शायद अभी नए मामले और कालाबाजारी नहीं होती। 

एक मरीज को 40 से 50 तक इंजेक्शनडॉक्टरों के अनुसार ब्लैक फंगस से ग्रस्त मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है। अगर जल्द से जल्द उसे उपचार न मिले तो आंखों की रोशनी या फिर मस्तिष्क तक संक्रमण के पहुंचने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए एक मरीज को 40 से 50 तक इंजेक्शन की खुराक दी जाती हैं। आमतौर पर एक इंजेक्शन करीब छह से साढ़े छह हजार रुपये में मिलता है।
 
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दिल्ली में कोरोना : घट रहे हैं संक्रमित, लेकिन कम नहीं हो रहा मौत का आंकड़ा

राजधानी में कोरोना संक्रमण के आंकड़े तेजी से सुधर रहे हैं। साथ ही संक्रमण दर में भी कमी आ रही है, लेकिन मौत के मामले कम नहीं हो रहे हैं।  विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के गंभीर मरीज कम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में मौत के मामलों में कमी आने में समय लग सकता है। 

दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह से कोरोना के मामले बढ़ने लगे थे। इसके बाद हर दिन दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ रहा था और 20 अप्रैल को चौथी लहर का पीक आया था। तब एक दिन में ही कोरोना के 28,395 मामले आए थे। इसके बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक हालात में कोई सुधार नहीं हुआ, लेकिन 1 मई से स्थिति बदलने लगी। इस दिन दैनिक संक्रमितों की जो संख्या 25219 थी, वह 16 मई को घटकर 6456 रह गई, लेकिन इस दौरान मौत के मामलों में कोई खास कमी नहीं आई। 

अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 18  हजार मामले आने पर 186 लोगों की मौत हो रही थी, वहीं मई में प्रतिदिन 7 हजार मामले आने पर भी 178 लोगों की मौत हो रही है। इस लिहाज से देखें तो संक्रमितों की संख्या आधे से भी कम हो गई है, लेकिन मौत के मामलों में कमी नहीं आ रही है। इससे दिल्ली में कोरोना से मृत्युदर भी बढ़कर 1.55 फीसदी हो गई है।

मौत के मामलों में कमी न आने के कारणों पर एम्स के डॉक्टर विक्रम का कहना है कि अभी भी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में करीब 6 हजार संक्रमित मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें से कई रोगियों की हालत गंभीर है। साथ ही कई मरीज गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। एक से दो दिन में ही उनकी मौत हो रही है। 

तारीखवार संक्रमित और मौत के आंकड़े
तारीख      दैनिक मामले      मौत
01 मई    25,219        412
03    18,043             448
06    19,133             335
09    13,336            273 
12    13,287            300
15    6430               337
(नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं।)
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दिल्ली : ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की कालाबाजारी का आरोपी नवनीत कालरा गिरफ्तार

corona in india
दिल्ली पुलिस ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के आरोपी फरार नवनीत कालरा को रविवार देर रात गुरुग्राम के सोहना स्थित फार्म हाउस से गिरफ्तार कर लिया है। खान मार्केट स्थित ख्यातनाम रेस्तरां खान चाचा का मालिक कालरा गत 5 मई से फरार था। पुलिस उसकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही थी। कालरा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। दक्षिण जिला पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद कालरा को अपराध शाखा के हवाले कर दिया। 

दक्षिण जिला पुलिस ने कालरा के खिलाफ 4 मई को मामला दर्ज किया था। इससे पहले पुलिस ने उसके मैनेजर रितेश व दूसरे कारोबारी गौरव सहित चार कर्मचारियों को गिरफ्तार  कर लिया था। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने छह मई को लोदी कॅालोनी स्थित रेस्तरां-बार से 419 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर बरामद किए थे। इसके बाद 7 मई को खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्तरां और टाउन हॉल रेस्तरां में छापा मारकर105 कन्संट्रेटर बरामद किए। जांच में पता  चला कि तीनों ही रेस्तरां का मालिक नवनीत कालरा है। इस पूरे मामले में पुलिस को उसकी तलाश  थी। 

आरोपी रेस्तरां-बार नेग-जू में कन्संट्रेटर की ऑनलाइन कालाबाजारी कर रहे थे। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बहुत ही घटिया क्वालिटी के थे और मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे । मामला दर्ज होने के बाद नवनीत कालरा 5 मई को अपने परिवार के साथ गायब हो गया था। उसने कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए दो बार याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया था। 

जांच के लिए मामला दक्षिण जिला पुलिस से अपराध शाखा को सौंप दिया गया था। अपराध शाखा समेत दक्षिण जिला पुलिस की कई टीमें आरोपी की तलाश कर रही थी। पुलिस को रविवार देर रात सूचना मिली थी कि नवनीत कालरा सोहना में करण की खेड़ली नामक जगह पर स्थित फॉर्म हाउस में छिपा है। इसके बाद पुलिस छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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मजबूरी: घर का खर्च चलाने के लिए बेच दिया अपना ही बच्चा, पुलिस के डर से उगला सच

डाबर तालाब कॉलोनी में बुधवार को 14 दिन के बच्चे की चोरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में पता चला है कि परिजनों ने घर का खर्च चलाने के लिए खुद ही अपने बच्चे को बेच दिया था। परिजन भीख मांगकर गुजारा करते हैं। तीन साल पहले भी परिजनों ने अपने एक बेटे को एक लाख रुपये में बेच दिया था। पुलिस बच्चे को खरीदने वाले की तलाश कर रही है।

लोनी पुलिस के मुताबिक बुधवार को डाबर तालाब में रहने वाले एक दंपती ने अपने 14 दिन के बच्चे को बेच दिया था। बच्चे को बेचने का शक उन पर ना जाए इसलिए परिजनों ने पुलिस कंट्रोल रूम को दो लोगों द्वारा उनके घर से 14 दिन का बच्चा चोरी करने की सूचना दी थी। लोनी कोतवाली एसएचओ ओपी सिंह ने बताया कि पीड़ित से बात करने पर वह बार-बार अपना बयान बदल रहा था। इसके बाद पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की थी। पूछताछ में पता चला कि पीड़ित के घर पर एक दंपती बुधवार दोपहर करीब 12 आए थे। करीब ढाई घंटे बाद दोनों दंपती दो काले रंग के बैग लेकर पीड़ित के घर से निकले थे। पुलिस को शक हुआ और बच्चे के पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि पीड़ित दंपती ने घर का खर्च चलाने के लिए ही अपने 14 दिन के बच्चे को बेच दिया था। इससे पहले भी दंपती ने तीन साल पहले अपने पहले बेटे को करीब एक लाख रुपये में बेच दिया था। एसएचओ ने बताया कि बच्चा बेचने वाला आरोपी पिता मूलरूप से बुलंदशहर के गुलावठी का रहने वाला है जबकि उसकी पत्नी उड़ीसा की रहने वाली है। आरोपी के कुछ रिश्तेदार भी डाबर तालाब कॉलोनी में रहते हैं। करीब तीन माह पूर्व ही वह लोनी के डाबर तालाब कॉलोनी में रहने आए थे। परिवार आसपास इलाकों में भीख मांगकर गुजारा करता है। लोनी से पहले वह मोदीनगर में किराए पर रहता था।

एक रिश्तेदार करता था डील
पुलिस के मुताबिक आरोपी दंपती ने पूछताछ में एक रिश्तेदार द्वारा बच्चे को बेचने की बात कही थी। रिश्तेदार ही ग्राहकों से डील करता था। एसएचओ ने बताया कि रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि रिश्तेदार पहले दंपती से बात करता था, इसके बाद ग्राहकों से संपर्क करता था। एसएचओ ने बताया कि अभी पूछताछ जारी है। पूछताछ पूरी होने पर और भी चीजें सामने आएंगी।

परिवार के अन्य सदस्यों ने भी अपने बच्चों को बेचा
एसएचओ ने बताया कि आरोपी दंपती के परिवार में 8 से 10 लोग हैं। परिवार के कुछ लोग उनके पड़ोस में ही रहते है। इन लोगों द्वारा भी बच्चा बेचने की बात सामने आ रही है। बच्चे को बरामद करने के लिए लोनी कोतवाली, गाजियाबाद की दो टीमें लगी हुई हैं। पुलिस आरोपी दंपती के रिश्तेदार द्वारा बताए गए ठिकानों पर छापे मार रही है। पुलिस ने आरोपी दंपती को हिरासत में रखा है। दंपती की दो बेटियां भी हैं।

यह लगाया था आरोप
डाबर तालाब कॉलोनी में रहने वाले दंपती ने पुलिस को सूचना दी कि दोपहर करीब दो बजे एक बाइक पर सवार दो युवक किराए के मकान लेने की तलाश में उनके घर में पहुंचे। इस दौरान दंपती घर पर थे। युवकों ने किराए पर कमरे की जानकारी मांगी। बातचीत के दौरान युवकों ने उन्हें नौकरी दिलाए जाने की बात कही। जिस पर पत्नी चाय बनाने के लिए चली गई। रसोई में चाय बनाने के दौरान आरोपी बच्चे के पिता की नजर बचाकर बच्चा चोरी कर ले गए।
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कोरोना काल में ठगी : 1000 से अधिक लोगों से दो करोड़ ऐंठे, दो विदेशी गिरफ्तार, झारखंड का गिरोह भी पकड़ा 

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने देशभर में एक हजार से अधिक लोगों के साथ ठगी करने वाले दो विदेशी नागरिकों को दबोचा है। आरोपी अब तक दो करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। दोनों पहले विदेश से पार्सल के जरिए दवाइयां भेजने के नाम पर ठगी करते थे। बाद में माहमारी का फायदा उठाने के लिए आरोपियों ने ऑक्सजीन सिलिंडर व दवाइयों के बदले ठगना शुरू कर दिया था। पुलिस ने आरोपियों से 22 मोबाइल फोन, 165 सिमकार्ड, पांच लैपटॉप, दो वाईफाई डोंगल बरामद किए हैं।

अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शिबेश सिंह के अनुसार आरोपी मूल रूप से घाना व नाईजीरिया निवासी हैं। आरोपियों की पहचान जोनाथन कोजो (44) व चीका बेनेथ (42) के रूप  में हुई। एक पीड़ित को रिश्तेदार की तबीयत खराब होने पर ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी। इस बीच सोशल मीडिया पर पीड़ित ने एक मोबाइल नंबर देखा, जिसमें सिलिंडर मुहैया करवाने का दावा था। पीड़ित की ओर से पूछने पर सिलिंडर देने की बात हो गई। इसके एवज में आरोपियों ने 16 हजार रुपये सिलिंडर की कीमत बता चार हजार रुपये भाड़ा बताया। पीड़ित ने बताए गए खाते में ऑनलाइन रुपये भेज दिए, लेकिन सिलिंडर नहीं मिला। वहीं, आरोपियों ने पीड़ित का मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया। 

इसके बाद पीड़ित ने गत पांच मई को ज्योति नगर थाने में केस दर्ज करा दिया। जांच के दौरान पाया कि इसी प्रकार के कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हुआ है। वहीं, बीते एक साल में अलग-अलग मोबाइल फोन से आरोपी दो सौ से ज्यादा सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। जांच के दौरान पुलिस को डाटा मिला कि खिड़की गांव, जामिया नगर, मालवीय नगर, संगम विहार, हौजरानी गांव व खिड़की एक्सटेंशन आदि इलाकों में विदेशी नागरिक लोगों से धोखाधड़ी कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने पंचशील विहार खिड़की निवासी चीका बेनेथ को ग्रीन पार्क इलाके से दबोच लिया। आरोपी की निशानदेही पर 15 मई को जोनाथन कोजो को भी पंचशील विहार से दबोच लिया। 

ऐसे करते थे ठगी
आरोपियों ने बताया कि वे पहले विदेश से गिफ्ट पार्सल, दवाइयां आदि भेजने के नाम पर लोगों को ठगा करते थे। बाद में कोरोना संकट में उन्होंने सिलिंडर की कमी को देख ठगी का तरीका बदला। इसके लिए ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सएप आदि पर मोबाइल नंबर की जानकारी साझा करते थे। वहीं, सोशल मीडिया से ही जरूरतमंद लोगों को नंबर हासिल कर लेते थे। लोगों द्वारा संपर्क करने पर वे वॉलेट अकाउंट व यूपीआई आईडी से खाते में रकम ले लेते थे। इसके बाद नंबर ब्लॉक कर देते थे। दूसरी ओर, बंगलुरु में बैठा आरोपियों का एक साथी रकम के लिए बैंक अकाउंट मुहैया करवाता था। 
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पहलवान सागर हत्याकांड : ओलंपियन सुशील कुमार और पीए पर इनाम घोषित करेगी पुलिस

दिल्ली पुलिस पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में अभी ओलंपियन सुशील कुमार व उसके पीए अजय पर ही इनाम घोषित करेगी। दिल्ली पुलिस सोमवार तक दोनों पर 50 हजार से एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर सकती है। दूसरी तरफ सुशील पहलवान की कई गैंगस्टरों से सांठगांठ सामने आई है। दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला है कि गैंगस्टरों के गुर्गे छत्रसाल स्टेडियम में आते थे। उधर, दिल्ली पुलिस की कई टीमों ने रविवार को भी सोनीपत, पानीपत, झज्जर व गुरुग्राम समेत कई जगहों पर दबिश दी, मगर सुशील के बारे में कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। 

 उत्तर-पश्चिमी जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल पहलवान सुशील कुमार व उसके पीए व ड्राइवर अजय पर ही इनाम घोषित किया जाएगा। हालांकि दिल्ली पुलिस ने सुशील पहलवान समेत नौ लोगों के खिलाफ शनिवार को गैर-जमानती वारंट किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अजय सुशील की गाड़ी चलाने के अलावा छत्रसाल स्टेडियम में एडहॉक पीटीआई भी है। 

जांच में सामने आया है कि पहलवान सागर धनखड़ की हत्या में सुशील के अलावा अजय ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। पीड़ितों के बयानों में इन दोनों का नाम स्पष्ट तौर पर सामने आ चुका है। उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने इन दोनों पर इनाम घोषित करने के लिए फाइल पुलिस मुख्यालय भेज दी है। जिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुशील कुमार की गैंगस्टर काला जठेड़ी व लारेंस विश्नोई से सांठगांठ सामने आई है। वह इन गैंगस्टर व उसके गुर्गों को शह देता था। 

गुरुग्राम में छिपे होने की आशंका
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को साथी पहलवान की दिल्ली में हत्या के बाद तलाश कर रही पुलिस का सफलता हाथ नहीं लगी है। इधर दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। हालांकि हत्या के पहले वह गुरुग्राम में फ्लैट देखने आया था। फरार होने के बाद से ही उसके गुरुग्राम में छिपे होने की आशंका है। इसे देखते हुए क्राइम ब्रांच अलर्ट मोड पर है, विकसित हो रहे सेक्टरों की सोसाइटियों में दबिश भी दी जा रही हैं। 

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में मारपीट के दौरान पहलवान की हत्या मामले में फरार चल रहे ओलंपिक पदक विजेता सुशील पहलवान को लेकर गुरुग्राम पुलिस भी अलर्ट मोड पर है। जिला एनसीआर का ऐसा स्पॉट है, जहां आस-पास के राज्यों के गैंगस्टर आकर छिपते हैं। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में उन्हें शक है कि सुशील यहां आकर छिप सकता है। खास तौर पर नए गुरुगांव के विकसित हो रहे सेक्टरों की सोसाइटियों में नजर रखी जा रही है। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद सुशील की गुरुग्राम में तलाश और तेज हो गई है।

पहलवान सुशील के मामले में भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली पुलिस को हर संभव मदद देने के लिए भी तैयार हैं।
- प्रीतपाल, एसीपी क्राइम
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दिल्ली : दवाइयां और ऑक्सीजन सिलिंडर वितरण मामले में नेताओं को पुलिस ने दी क्लीन चिट

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