एनडीसी दीक्षांत समारोह: राजनाथ सिंह ने कहा- दुनिया समझने लगी है आतंकवाद को पाक के समर्थन से जुड़ी भारत की चिंता

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 25 Sep 2021 02:47 PM IST

सार

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, महामारी के बावजूद छात्रों ने चुनौतियों को अवसर में बदला। एनडीसी ने रणनीतिक मामलों में हमेशा ही अहम भूमिका निभाई है। हम ज्ञान प्राप्त करने के लिए आपकी खोज को सुविधाजनक बना सकते हैं।
राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह - फोटो : एएनआई
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विस्तार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि आतंकवाद व आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की तरफ से मिल रहे समर्थन को लेकर भारत की चिंताओं को अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझने लगा है। उन्होंने साथ ही पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसका स्पष्ट हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में अशांति की स्थिति का कारण आक्रामक रूपरेखा और बाहरी तत्वों को गैरजिम्मेदार देशों की तरफ से दिया जा रहा सक्रिय समर्थन है। 
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रक्षा मंत्री राजनाथ नेशनल डिफेंस कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, बालाकोट और गलवां घाटी में भारत की कार्रवाईयों ने सभी ‘आक्रमणकारियों’ को स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देने के किसी भी प्रयास का ‘त्वरित और करारा’ जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना दोनों देशों को स्पष्ट चेतावनी दी।


उन्होंने कहा, हम हमारी भू-सीमाओं पर यथास्थिति को चुनौती देने वाली लड़ाई जैसी स्थिति, सीमापार से आतंकवाद को समर्थन और हमारे पड़ोस में हमारी सद्भावना व पहुंच का मुकाबले करने के बढ़ते प्रयासों का सामना कर रहे हैं। सिंह ने कहा, हालांकि भारत सभी देशों के बीच शांति व सद्भावना के लिए पूरी तरह समर्पित है, लेकिन उसने यह दृढ़ संकल्प भी दिखाया है कि आंतरिक व बाहरी सुरक्षा चुनौतियों को अब लंबे समय तक बरदाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, सुरक्षा के नजरिये से, देश और हमारी सेना इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं कि भविष्य की सैन्य रणनीतियों और प्रतिक्रियाओं को हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों के सभी हिस्सों के बीच सक्रिय तालमेल की आवश्यकता होगी।

अफगानिस्तान के घटनाक्रम ने खड़े किए आतंक के इस्तेमाल पर सवाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अफगानिस्तान के हालात पर भी बात की। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान का घटनाक्रम देश की संरचना और व्यवहार को बदलने के माध्यम के तौर पर ताकत की राजनीति और आतंकवाद के इस्तेमाल की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हैं।

सिंह ने तालिबान का नाम लिए बिना कहा, आतंकवाद के अस्थिर प्रभावों और खासतौर पर मान्यता हासिल करने के लिए ‘न्यू नॉर्मल’ दिखाने हिंसक कट्टरपंथी ताकतों की खतरनाक प्रवृत्ति को दुनिया देख रही है। आज सभी जिम्मेदार देशों को इस बात का अहसास हो गया है कि सामूहिक चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में होने वाली घटनाओं की गूंज क्षेत्र और उसके बाहर महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान के हाल के घटनाक्रमों ने हमारे समय की वास्तविकता को उजागर किया है। उभरती भू-राजनीति को लेकर निश्चितता सिर्फ उसकी अनिश्चितता ही है। देशों की सीमाओं में बदलाव आज बार-बार नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा, हालांकि देशों की संरचना में हो रहे तेज बदलाव और उस पर बाहरी ताकतों की तरफ से डाले जाने वाले प्रभाव साफ दिख रहे हैं। इन घटनाओं ने देश की संरचनाओं और व्यवहार को बदलने के उपकरण के रूप में ताकत की राजनीति और आतंकवाद के इस्तेमाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

अफगानिस्तान से सबक लेने की जरूरत

रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में जो कुछ हुआ है, उससे सबक सीखने की जरूरत है। जब इन घटनाओं को देखा जाता है, तो यह विश्वास करना अजब लगता है कि आतंकवाद, खौफ, मध्यकालीन विचार और कामकाज, लैंगिक भेदभाव, असमानता और हठधर्मिता पर आधारित प्रथाओं से लोगों के विचारों और समावेशी संरचनाओं को एकतरफ किया जा सकता है। राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि हालांकि अन्याय शक्तिशाली होता है, लेकिन  मानव अस्तित्व में अंतर्निहित अच्छाई की सामूहिक शक्ति को नहीं हरा सकता है।

ज्ञान और बुद्धिमता हैं सबसे बड़े गुण

राजनाथ सिंह ने कहा कि ज्ञान और बुद्धिमता को हमारे समाज में सर्वोच्च गुणों के रूप में माना गया है और जिनके पास ये रहे हैं, उन्होंने एक सभ्यता और एक देश के रूप में हमारे भाग्य का मार्गदर्शन किया है। ज्ञान किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति है, जो हमें किसी देश व क्षेत्र की ऐतिहासिक, सामाजिक, भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को समझने की अनुमति देता है।

यह हमें उन परिस्थितियों के बारे में बताता है, जो अफगानिस्तान में मौजूदा घटनाक्रम का कारण हैं। उन्होंने कहा, विदुर और श्रीकृष्ण द्वारा प्रदर्शित गुणों की खोज हमारे सीखने में निहित है। इसी तरह, हमें चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में कौटिल्य द्वारा निभाई गई भूमिका से भी निर्देश मिलता है। हमारा सिद्धांत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक संबंध बनाना है। ये सिद्धांत रणनीतिक सोच का मूलतत्व है, जो प्राचीन काल जितना ही मौजूदा चुनौतियों से पार पाने के लिए भी प्रासंगिक है।

महामारी के बावजूद छात्रों ने चुनौतियों को अवसर में बदला: राजनाथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने शनिवार को राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (एनडीसी) के दीक्षांत समारोह में देश के सामने उपस्थित चुनौतियों, जियोपॉलिटिक्स मसलों और भारत की रक्षा रणनीति के बारे में भी बात की।

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, महामारी के बावजूद छात्रों ने चुनौतियों को अवसर में बदला। एनडीसी ने रणनीतिक मामलों में हमेशा ही अहम भूमिका निभाई है। हम ज्ञान प्राप्त करने के लिए आपकी खोज को सुविधाजनक बना सकते हैं।
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