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ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली में आईसीयू बेड तो बन गए लेकिन अब पड़ा डॉक्टर-नर्स का टोटा, अस्पतालों में भी कमी

परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 15 May 2021 03:47 PM IST

सार

देश की राजधानी में करीब 40-60 फीसदी तक स्वास्थ्यकर्मियों की जगह खाली। आईसीयू कोविड सेंटर के लिए नया स्टाफ चुनौती बन गया है। सरकार दो दिन में चार नियुक्तियों के विज्ञापन जारी कर चुकी है। देखने में आ रहा है कि ज्यादा वेतन देकर प्राइवेट अस्पतालों ने स्टाफ ले लिया है। मोहल्ला क्लीनिक तक का स्टाफ इस वक्त मरीजों की देखभाल में लगा है।
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रामलीला मैदान में बना 500 बेड वाला कोविड सेंटर
रामलीला मैदान में बना 500 बेड वाला कोविड सेंटर - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

मडेसिविर, ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड और अन्य तरह की दवाओं के बाद अब दिल्ली में डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ का टोटा भी पड़ गया है। राजधानी दिल्ली के अस्पताल लंबे समय से स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे थे लेकिन कोरोना महामारी की नई लहर से बढ़े मरीजों के भार ने इस कमी को और भी अधिक नासूर बना दिया है।
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नीति आयोग की हेल्थी स्टेट्स प्रोग्रेसिव इंडिया 2019 रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में करीब 40 से 60 फीसदी तक स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। वर्तमान हालात देखें तो अस्पतालों में 5863 आईसीयू और 2057 वेंटिलेटर हैं जिनमें से क्रमशः 60 और छह खाली हैं लेकिन अस्पतालों में पूछने पर पता चलता है कि यह सभी बेड भरे हुए हैं।


दिल्ली सरकार के अनुसार 27 से 29 अप्रैल के बीच नियुक्ति के लिए चार अलग अलग आदेश दिए हैं। इनमें मोहल्ला क्लीनिक के अलावा सेवानिवृत्त चिकित्सीय कर्मचारियों तक से आवेदन मांगे हैं जिन्हें शिफ्ट के आधार पर वेतन दिया जाएगा। करीब दो सप्ताह बाद भी यह नियुक्ति अभी सरकारी प्रक्रिया में है। हाईकोर्ट ने भी स्वास्थ्य सेवाओं का हवाला देते हुए कोविड सेंटर और स्टाफ की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।

फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (फोर्डा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज सोलंकी का कहना है कि वे पिछले कई सप्ताह से स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाते आ रहे हैं। दिल्ली में यह कमी सालों से है। हर दिन कहीं 100 तो कहीं 500 बेड के कोविड सेंटर शुरू किए जा रहे हैं।

ऐसे में सवाल यही है कि यहां स्टाफ आएगा कहां से? जीटीबी और लोकनायक अस्पताल सालों से सीमित स्वास्थ्य कर्मचारियों की मार झेल रहे हैं। फोर्डा के ही सर्जन डॉ. सुनील अरोड़ा का कहना है कि राजधानी के सरकारी अस्पताल कई साल से अतिरिक्त बोझ झेल रहे थे लेकिन अब कोरोना की मार ने इनकी स्थिति को विस्फोटक बना दिया है।

दरअसल दिल्ली सरकार ने जीटीबी और लोकनायक अस्पताल के पास ही 500-500 आईसीयू बेड की क्षमता वाले कोविड केयर सेंटर बनाए हैं जिनमें से एक जीटीबी सेंटर मंगलवार से शुरू हो चुका है। इनके अलावा खेलगांव, बुराड़ी निरंकारी, डीआरडीओ, छतरपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल के अलावा होटल, गुरुद्वारे और बारात घर में भी कोविड सेंटर बनाए हैं। करीब पांच हजार से अधिक बिस्तरों की सुविधा यहां है। इनके अलावा सांसद और विधायक भी अपने अपने क्षेत्र में ऑक्सीजन बेड युक्त सेंटर बना रहे हैं।
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