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ऑक्सीजन संकट पर बोले पीड़ित: उस रात मिल जाती ऑक्सीजन तो बच जाती मेरी मां, नहीं भूल सकती वो रात

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 22 Jul 2021 12:36 PM IST

सार

जयपुर गोल्डन अस्पताल की वो घटना सुनाते-सुनाते 28 वर्षीय नव्या फफक पड़ी और कहा कि भगवान से बढ़कर सरकारें नहीं हैं अब वही न्याय करेंगे।
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अपनी मां के साथ दोनों बहनें (फाइल फोटो)
अपनी मां के साथ दोनों बहनें (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

23 अप्रैल की उस रात को मैं कभी भूल नहीं सकती। देखिए मेरे अभी भी रोंगटे खड़े हो रहे हैं। उस रात अगर ऑक्सीजन मिल जाती तो मेरी प्यारी मां आज जिंदा होतीं। वो मेरी दोस्त भी थीं और सबसे अच्छी टीचर भी लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपनी आंखों के आगे उन्हें तड़पता देखूंगीं।
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आप महसूस कर सकते हैं जब डॉक्टरों ने कहा कि कुछ ही दिन में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। मैं बहुत खुश थी लेकिन अचानक से रात को फोन आया कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा है और ऑक्सीजन नहीं है। यह किसी के लिए भी सोच से परे वाली स्थिति थी। 


हमने कैसे भी करके रुपये का इंतजाम करके प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। उस रात मदद मांगने के लिए मैंने हर दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और अस्पताल वालों के हाथ जोड़े लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मेरी मां सीमा अवस्थी को थोड़ी देर बाद मृत घोषित कर दिया। 

यह कहते ही 28 वर्षीय नव्या फफक पड़ीं। रोते हुए नव्या बोलीं, जो लोग कह रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में बिस्तर न मिलने से किसी मरीज की मौत नहीं हुई। उन लोगों को भगवान माफ नहीं करेगा। सरकारें भगवान से ऊपर नहीं है। अब वही हमारा न्याय करेंगे। 
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