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दिल्ली हिंसा पीड़ितों की आपबीती: दहशत और हिम्मत की अलग-अलग दास्तान

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Mar 2020 01:43 AM IST
दंगों के बाद...
दंगों के बाद... - फोटो : अमर उजाला
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यमुना विहार में उपद्रवियों ने एक मकान के ग्राउंड फ्लोर पर आग लगा दी। 9 साल के मासूम संयम और उसका भाई विहान (5) अपने परिवार के साथ पहली और दूसरी मंजिल पर फंस गए थे। उपद्रवियों ने पथराव करने के अलावा ऊपर पेट्रोल बम भी फेंके। हिंसा देखकर संयम की मां प्रीति तो बेहोश हो गई थी। 
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ऐसे में दादी संतोष रानी (55) को मासूम बच्चों की चिंता सताने लगी। मकान से निकलने के सभी रास्ते बंद थे। ऐसे में संयम ने हिम्मत दिखाकर दादी से कहा कि वह पहली मंजिल से नीचे कूद जाएगा। दादी को भी कुछ समझ आया। पीछे वाली गली में कुछ पड़ोसी आ गए। पड़ोसियों के कहने पर दादी ने कलेजे पर पत्थर रखकर पहले संयम को पहली मंजिल से नीचे कुदाया। पड़ोसियों ने पहले संयम को लपका बाद में  विहान को। संतोष व उनके दोनों बेटे मनीष व दीपक व प्रीति ने पड़ोसी की 10 फुट ऊंची दीवार से कूदकर अपनी जान बचाई।


संतोष रानी ने बताया कि वह परिवार के साथ बी-3/43ए यमुना विहार में पिछले 33 सालों से रहती हैं। पति महेश कुमार गर्ग का अपना कारोबार है। दोनों बेटे मनीष व दीपक भी पिता के साथ कारोबार करते हैं। मकान के ग्राउंड फ्लोर को एक रेस्टोरेंट वाले को किराए पर दिया हुआ है। पहली और दूसरी मंजिल पर उनका परिवार रहता है। मकान के पीछे भी एक सर्विस रोड है। सोमवार दोपहर बलवा हुआ तो उपद्रवी घर के सामने पहुंच गए। कई बाइकों को आग लगाने के अलावा घर में खड़े तीन दोपहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया। रेस्टोरेंट में आग लगाने के अलावा मकान की पहली और दूसरी मंजिल पर भी पथराव किया और पेट्रोल बम से हमला कर दिया।

बचने का कोई  रास्ता नहीं दिखा
संतोष रानी ने बताया कि हिंसा देख सभी घबरा गए। नीचे 400-500 उपद्रवी परिवार की जान लेने को उतारू थे। बचने का कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया। पहली मंजिल पर  दोनों पोतों को उन्होंने पहली मंजिल से नीचे फेंककर कर पड़ोसियों को लपकवाया। इसके बाद वह दोनों बेटों और बहू के साथ पड़ोसी राम अवतार गुप्ता के मकान में कूद गई। इसके बाद पीछे के रास्ते सभी परिवार सुरक्षित स्थान पर पहुंचा। संतोष ने बताया कि आग ग्राउंड फ्लोर तक ही सीमित रही। ऊपर की मंजिलों पर नहीं पहुंच पाई। तीन दिन  बाद हालात सामान्य होने पर परिवार अपने घर पहुंचा।

अस्पताल पर कब्जा कर छत से पथराव

चांदबाग में हिस्सा के दौरान उपद्रवियों ने अस्पताल को भी नहीं बख्शा था। यमुना विहार के सी ब्लॉक स्थित मोहन नर्सिंग होम पर उपद्रवियों ने पहले जमकर पत्थर बरसाए। इसके बाद अस्पताल पर कब्जा कर छत से गोलीबारी और पथराव करने लगे। अस्पताल के नजदीक हुई हिंसा में शाहदरा जिले के पुलिस उपायुक्त की गाड़ी तक को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था।
अस्पताल के डॉक्टर अनिल ने सोमवार के उस खौफनाक मंजर को बयां करते हुए कहा कि दोपहर में चांदबाग में सीएए का विरोध में हजारों की संख्या में लोग सड़क पर जमा थे। लोग विरोध में नारे लगा रहे थे। वहां मौजूद शाहदरा के पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा व करीब पचास की संख्या में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों से रास्ते से हटने की अपील कर रहे थे। उधर, उनके अस्पताल में रोजमर्रा की तरह ओपीडी में करीब 8 से 10 मरीज बैठे थे। जबकि पांच से सात मरीज अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल में करीब 30 की संख्या में कर्मचारी व पांच- छह डॉक्टर मौजूद थे। दोपहर करीब एक बजे प्रदर्शनकारी अस्पताल पर पथराव करने लगे। इससे अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टर अनिल के मुताबिक लोग इधर- उधर भागकर अपना बचाव करने की कोशिश करने लगे। उपद्रवी काफी उग्र हो चुके थे और बाहर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले करने लगे थे। इसके बाद डॉक्टरों ने अस्पताल में मौजूद मरीजों को पीछे के रास्ते से निकलना शुरू कर दिया। तब तक उपद्रवी अस्पताल के पास पहुंच चुके थे। डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल को बिना बंद किए ही पीछे के रास्ते से निकलकर अपनी जान बचाई। उसके बाद उपद्रवी अस्पताल में घुस गए और छत पर कब्जा कर सामने पथराव व गोलीबारी करने लगे।

अमरोहा के कायम की जान बचा ललित ने कायम की मिसाल

एयर कंडीश्नर कंपनी में काम करने वाले अमरोहा के नौगांवा सादात के मोहल्ला फकरपुरा निवासी मोहम्मद कायम परिवार के साथ दिल्ली से घर लौट आए हैं। अब भी परिवार दहशत में गुजरे करीब 36 घंटों को याद कर सिहर जाता है। माहौल सही होने पर ही अब उनका परिवार दिल्ली जाएगा। फिलहाल तब तक उनका परिवार नौगांवा में ही रहेगा। मोहम्मद कायम बीवी और चार बच्चों के साथ दिल्ली के मुस्तफाबाद में भागीरथी बिहार गली नंबर-13 में रहते हैं। यहां वह करीब 25 साल से रहते हैं। उनका अपना मकान है। बताते हैं कि सोमवार को वह कनाट प्लेस में अपने ऑफिस गए थे। इस बीच दंगा भड़क गया। मुस्तफाबाद में भी आगजनी, फायरिंग और पत्थरबाजी होने लगी। जानकारी होने पर वह अपने घर पहुंचना चाहते थे, लेकिन हालात को देखते हुए बीवी और बच्चों ने मना कर दिया। वह कनाट प्लेस में ही फंस गए। बीवी बच्चों के दंगों में फंसे होने से उन पर पल-पल पर भारी पड़ रहा था। जैसे-तैसे उन्होंने रात काटी। दूसरे दिन माहौल और बिगड़ने लगा। बीवी बच्चे गोलीबारी आगजनी से दहशत में थे। दंगाई उनकी गली से दो सौ मीटर दूर तक पहुंच गए थे। ऐसे में बीवी बच्चों के पास जाने से नहीं रोक पाए। दोस्त जौहरीपुर निवासी ललित के परिवार के सहारे वह किसी तरह मंगलवार की शाम अपने घर पहुंचे।

दोस्त के परिवार ने पार कराया हिंदू इलाका
मोहम्मद कायम ने बताया कि मुस्तफाबाद में लगातार आगजनी फायरिंग और पत्थरबाजी हो रही थी। वह घबराए थे। कनाट प्लेस से मुस्तफाबाद पहुंचने के लिए उन्हें हिंदू इलाका पार करना था। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त ललित का सहारा लिया। फोन कर माहौल जाना। फिर उसके घर पहुंचे। ललित के परिवार ने उन्हें मुस्तफाबाद के बाहरी इलाके तक छोड़ा। जहां वह मुस्तफाबाद के दोस्तों के साथ अपने घर तक पहुंचे। मोहम्मद कायम का बेटा अकबर मेंहदी कक्षा आठ में पढ़ता है। वह मुस्तफाबाद में ही अरुण मॉडल पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। दंगाइयों ने बेटे के स्कूल को जला दिया। दंगे में बुलंदशहर के रहने वाले अशफाक की जान चली गई। वह भाई जैसा था। मेरे बगल में रहता था। उसका बड़ा भाई मुदस्सिर मेरे साथ काम करता है।
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