3 घंटे का इंतजार करने के बाद मिलता है उपचार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 10:47 PM IST
बल्लबगढ़ एम्स शाखा में बच्चों की ओपीडी में उपचार करते डॉक्टर।
बल्लबगढ़ एम्स शाखा में बच्चों की ओपीडी में उपचार करते डॉक्टर। - फोटो : Faridabad
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बल्लभगढ़ (हेमलता रावत)। जिले में वायरल, डेंगू व डायरिया के मरीजों की संख्या में करीब 70 प्रतिशत इजाफा हुआ है। यहां स्थित एम्स शाखा में आने वाले मरीजों को उपचार के लिए कम से कम तीन घंटे का समय लग रहा है। पर्ची बनवाने के बाद भी काफी देर तक डॉक्टर के पास जाने के लिए बैठना पड़ रहा है। यही नहीं, टोकन सिस्टम के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। जैसे-तैसे नंबर आता है। उसके बाद दवाओं के लिए लंबी लाइन में खडे़ होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। रोगियों की परेशानी और यहां के हालात पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट :
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सुबह जल्दी उठकर आना पड़ता है
बल्लभगढ़ एम्स में उपचार करवाना है तो ओपीडी की पर्ची कटवाने के लिए सुबह उठकर जल्दी आना पड़ेगा। ये कहना है पूजा का। बकौल, पूजा, पहले पर्ची के लिए घंटों लाइन में लगो, फिर डॉक्टर तक पहुंचने के लिए। वहां किसी तरह से परामर्श मिला तो पूरी दोपहर दवा के लिए काउंटर पर खड़े रहो। इतनी प्रक्रिया के लिए सुबह जल्दी उठकर यहां पहुंचना पड़ता है।

टोकन के बाद डॉक्टर का नंबर
इन दिनों अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज बुखार, डेंगू व डायरिया के आ रहे है। बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में हर रोज 250 बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। उनको उपचार के लिए पर्ची बनवाने के बाद टोकन लेना पड़ता है। इन दिनों ओपीडी में चार डॉक्टरों के द्वारा इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर इशिता ने बताया कि बुखार पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। एक बच्चे को देखने में कम से कम आधा घंटे का समय तो लग ही जाता है। उसके बाद उनकी दवाओं के बारे में भी माता-पिता को समझाना पड़ता है। ऐसे में दूसरे मरीज को थोड़ा इंतजार करना पड़ जाता है।
घंटों लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल पाती दवा
मरीज पुष्पेंद्र ने बताया कि उनको दवाई लेने के लिए कम से कम एक घंटे का इंतजार करना पड़ता है। बच्चों की दवाओं के लिए अलग से काउंटर बनाया हुआ है लेकिन अगर किसी बड़े को दवाई लेनी है तो उसके लिए उनको घंटों इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि काफी लंबी लाइन लगी होती है। इसी वजह से मरीजों को काफी दिक्कत होती है। घंटों लाइन में लगने के बाद उनको सभी दवाइयां यहां से नहीं मिलती है।
वहीं, नंगला की रहने वाली नेहा ने बताया कि उसको पांच दिन से बुखार है। एम्स में उपचार करना था, सो सुबह 8 बजे ही यहां आ गई थी। पहले पर्ची बनवाई और उसके बाद टोकन लेकर डॉक्टर के पास नंबर आने का इंतजार किया। बताया कि उनका नंबर 135 था। जैसे तैसे करके डॉक्टर से उपचार लिया। उसके बाद एक घंटे तक लाइन में इंतजार करने के बाद कुछ दवाएं मिल पाईं।
इमरजेंसी में मिलता है जल्द उपचार
वैसे तो आपातकाल वार्ड में भी हर रोज 200 मरीज उपचार के लिए आ रहे है। यहां बुखार, डेंगू व डायरिया सभी प्रकार की दवाइयां मौजूद हैं। राजीव कॉलोनी की रहने वाली राजकुमारी ने बताया कि दो साल के बेटे को बुखार, दस्त व उल्टी हो रही है। यहां आकर दवा और उपचार मिल सका है। (संवाद)
डेंगू-मलेरिया का सीजन है। ऐसे में लोगों को अति सावधानी से रहना होगा। आसपास पानी न इकट्ठा होने दें। घरों में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। यहां पूरी कोशिश है कि हर मरीज को अच्छा उपचार और दवाएं मिल सकें।
- डॉ. इशिता, एम्स-बल्लभगढ़
इमरजेंसी में सभी मरीजों को सुविधा देने का प्रयास है। दवा के स्तर पर भी और उपचार के स्तर पर भी। ओपीडी एम्स के अंतर्गत आती है, इसके लिए फैकल्टी में बात की जा सकती है।
- डॉ. टीसी डिडवाल, एसएमओ

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