बल्लभगढ़ : एक सीख ने महावीर नागर को बुंलदियो पर पहुंचाया 

संवाद न्यूज एजेंसी/संदीप पाराशर Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Tue, 23 Mar 2021 03:59 PM IST

सार

  • चार साल में 20 गोल्ड और 20 सिल्वर पर जमाया अधिकार
  • खर्चा न होने के कारण विदेश में नहीं कर पा रहे बेहतर प्रदर्शन
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार

कहते है साथ रहने वाले के गुण व अवगुण व्यक्ति में जरूर आते हैं इसलिए आपको सोच समझकर मित्रता करनी चाहिए, ऐसी एक सीख ने सिर में चोट लगने के बाद खाली घर बैठें व्यक्ति को एक दो नहीं बल्कि 20 गोल्ड और 10 सिल्वर मेडल दिलाने में सहायक बन गई। 
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जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा, लेकिन इतनी बुलंदियों के बाद उनकी सरकारी व गैर सरकारी किसी संस्था ने सुध नहीं ली, जबकि उनका सपना विदेश में जाकर अपने देश व जिले का नाम रोशन करना है। लेकिन सहयोग न मिलने के कारण वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जिन्होंने आगे बढ़ने व खर्चे के लिए कई बार ड्रैस की नौकरी प्राप्त करने का प्रयास भी किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।


आज के हालात में, वे जिम में ट्रेनर की नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। हम यहां बात कर रहें है नीमका गांव में रहने वाले महावीर नागर की। महावीर नागर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कुश्ती का बहुत शौक था ओर वे भारतीय फौज या पुलिस में जाना चहाते थे, परंतु बचपन में उनको सिर पर गहरी चोट आई और डॉक्टरों ने उन्हें खेलने के लिए मना कर दिया। जिसके कारण वह बहुत निराश हुए और मानसिक तनाव में आ गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 

इसी बीच उनके साले ने सन 2014 में उनको शरीर का ध्यान रखने की बात कह, बॉडी बिल्डर में किस्मत आजमाने की बात कहीं, बस यही से उनकी जिंदगी बदल गई। इसके बाद वे पहली बार सन 2014 में जिम में दाखिला लें मेहनत शुरू कर दी। इसके बाद वर्ष 2015 में जुमलपुर दिल्ली में में होने वाली प्रतियोगिता में उनका चयन हुआ और इसी वर्ष उनको मिस्टर इंडिया में उतरने का मौका मिला जहां उनको पहली बार में सिल्वर से संतोष करना पड़ा, लेकिन अब उन्होंने गोल्ड के लिए प्रयास शुरू कर दिए। 

जिसमें उनको एक बार फिर 2015 में एक प्रतियोगिता में खोलने का मौका मिला जहां उन्होंने गोल्ड पर निशाना ही नहीं साधा बल्कि स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसी क्रम में वे आगे बढ़ते हुए सन 2016 में चार,सन 2017 में तीन, साल 2018 में सबसे अधिक छह स्वर्ण पदक जीते, वर्ष 2019 में चार स्वर्ण पदक झटके, 2020 में कोरोना काल की वजह से कोई प्रतियोगिता नहीं हो सकी। वर्ष 2021 में दो स्वर्ण पदक जीत कर शहर का नाम रोशन किया है।

कामयाबी में है गुरू का आर्शिवाद
महावीर नागर बताते है कि उन्होंने वर्ष 2014 में बॉडी जब बॉडी बिल्डर के क्षेत्र में अपना कदम रखा तो उनकी इंटरनेशनल कोच सुभाष भड़ाना  मुलाकात हुई और इसके बाद उनके दिशा निर्देश में वे कदम दर कदम आगे बढ़ाते चले गए। वे अपनी कामयाबी में सुभाष भड़ाना को श्रेय देते है जो आजकल दिल्ली में उप चेयरमैन है। उनका कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके गुरु सुभाष भडाना का बहुत बड़ा हाथ रहा है।

लोगों को दी नसीयत
महावीर नागर बताते है कि वैसे तो बॉडी बनाना कोई आसान काम नहीं है और अच्छी बॉडी होना हर युवा का सपना होता है, ये उसका अधिकार भी लेकिन जिस तरह से आज बॉडी बनाने के लिए प्रचलन चल पड़ा है वह उनको बहुत दुख पहुंचाता है,क्योंकि कुछ युवा बॉडी के लिए इंजेक्शन और दवाइयां न जाने क्या क्या करते है, जो समाज के लिए भविष्य में खतरा पैदा कर सकती हैं।

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