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लॉकडाउन में छूट उद्योगों के लिए साबित हो रही नाकाफी

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 11:17 PM IST
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फरीदाबाद। कोरोना संक्रमिताें की संख्या में लगातार कमी आने के बाद भी सरकार की ओर से उद्योगों को चलाने के लिए कोई खास राहत नहीं दी गई है। पिछले दिनों लॉकडाउन में दी गई ढील से उद्योगों को उबारने का प्रयास जरूर किया गया। लेकिन उद्यमी इस ढील को नाकाफी बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तेजी से कोरोना के मरीजों की संख्या में कमी आ रही है, उसी तेजी से उद्योगों को भी छूट देनी की जरूरत है। लेकिन प्रशासन की तरफ से छूट धीमी गति से दी जा रही है। उद्योगों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई अभी पूरी तरह शुरू नहीं की गई है। करीब एक साल से मंदी की मार से जूझ रहे उद्योगों की हालत खस्ता हो गई है। लॉकडाउन में सरकार ने उद्योगों को चलाने की छूट प्रदान की, लेकिन उद्योगों से जुड़े अन्य व्यवसाय बंद हैं। बाजार 50 प्रतिशत खुलने से न तो उद्योगों को जरूरत के सामान की आपूर्ति हो पा रही है और ना ही उत्पादों की मांग बढ़ रही है। जबकि उद्योगों के खर्च में कोई कमी नहीं आई है।
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कच्चे माल की कीमत बढ़ी
कच्चे माल की कीमत में करीब छह गुना बढ़ोतरी से उद्यमी परेशान हैं। उद्यमियों को बैंक लोन, बिजली और अन्य शुल्कों का निरंतर भुगतान करने के साथ महंगाई की मार भी झेलनी पड़ रही है। वहीं उद्योगों में डीजल का खूब इस्तेमाल होता है। पेट्रोल के साथ डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। जिससे उद्योगों का खर्च बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि सरकार की तरफ बिजली व अन्य कई तरह के शुल्कों में किसी तरह की राहत नहीं दी गई। मंदी के बावजूद उद्योगों को बैंक लोन की किश्तें भी निरंतर भरनी पड़ रही हैं।

बाजार बंद रहने का पड़ा असर
दूसरी लहर में लॉकडाउन लगाते समय सरकार ने उद्योगों को निरंतर चलाने की छूट दी थी। लेकिन बाजारों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश दिए थे। बाजार बंद होने का सीधा असर जिले के उद्योगों पर पड़ने लगा, क्योंकि उद्योग काफी हद तक बाजारों पर ही निर्भर हैं। उद्यमियों का कहना है कि एक उद्योगों के साथ करीब 30 तरह के अन्य व्यवसाय जुड़े हुए हैं। बाजार आंशिक रूप से खुला होने के कारण उद्योगों को उत्पादन करने में कई तरह की परेशानियों आ रही हैं।
वाहनों की मांग कम होने का भी पड़ा असर
मार्च 2020 में कोरोना का प्रकोप शुरू होने के बाद बाजारों में तेजी नहीं आ पाई है। शहर में काफी संख्या में उद्योग ऑटो कंपनियों के पार्ट्स का उत्पादन करते हैं। कोरोनाकाल में वाहनों की मांग कम हो गई है। मांग कम होने से ऐसे में कंपनियों के पास भरपूर स्टॉक जमा हो गया है।
नहीं लौटाए जा रहे हैं ऑक्सीजन सिलिंडर
उद्यमियों ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मारामारी शुरू होते ही जिला प्रशासन ने शहर के सभी उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीजन सिलिंडर अपने कब्जे में ले लिए थे। अब ऑक्सीजन की मारामारी करीब करीब खत्म हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की तरफ उद्योगों को ऑक्सीजन सिलिंडर लौटाने के लिए कदम नहीं बढ़ाया जा रहा है।
संक्रमितों की संख्या कम होती जा रही है। उद्योग और उनसे संबंधित क्षेत्रों को पर्याप्त छूट देने की जरूरत है। जिससे उद्योगों को जरूरत के सामान की आपूर्ति सुचारु रूप से हो सके। - रमनीक प्रभाकर, महासचिव, मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन फरीदाबाद
कोरोना के पीक के दौरान उद्योगों ने ऑक्सीजन सिलिंडरों का स्वैच्छिक सहयोग किया था। अब स्थिति सामान्य हो गई है। इसलिए उद्योगों को ऑक्सीजन सप्लाई शुरू कर देनी चाहिए। - वीरभान शर्मा, फरीदाबाद आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सरकार को चाहिए कि वह उद्योगों को ज्यादा से ज्यादा छूट प्रदान करे। इसके साथ ही बाजार खोलने की दिशा में कदम उठाए। बाजार में मांग बढ़ने से ही उद्योगों को रफ्तार मिलेगी। - जेके शर्मा, निदेशक, न्यूटेक मेडिकल डिवाइसेस लिमिटेड
लॉकडाउन में ढील देने के साथ ही जीएसटी की दरों में सुधार की जरूरत है। बिजली व अन्य बिलों में छूट दी जाए। जिससे मंदी की मार से जूझ रहे उद्योग फिर रफ्तार पकड़ सकें। - राजीव नाथ, एमडी, हिंदुस्तान सिरिंज, मेडिकल डिवाइसेस लिमिटेड
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