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जिले में नहीं हैं बढ़ रहा ब्लैक फंगस के उपचार की जरूरी दवाएं

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 10:28 PM IST
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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। कोरोना काल में म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस करीब 90 फीसदी जानलेवा साबित हो रहा है, बावजूद इसके कारगर दवाएं जिले में उपलब्ध ही नहीं हैं। वहीं, इसके लिए जरूरी सर्जरी की सुविधा भी सरकारी अस्पताल में मौजूद नहीं है। दवा और इलाज के अभाव में केवल वही मरीज इससे निजात पा सकते हैं, जो आर्थिक रूप से इसका लाखों का खर्च उठाने में सक्षम हों।
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जिला सिविल अस्पताल प्रबंधन, वरिष्ठ दवा एवं औषधि नियंत्रण अधिकारी व पीड़ित मरीज के परिजनों ने इसकी पुष्टि की है। ऐसे ही एक परिवार करीब 14 लाख रुपये के खर्च के बाद ब्लैक फंगस से निजात पाने में कामयाब हुआ। विडंबना यह भी है कि जिला स्तर पर निजी एजेंसी भी दवाओं का जरूरी स्टॉक 21 मई तक उपलब्ध करा सकेंगी। इसके बाद ही इस दिशा में कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

14 लाख में मिला ब्लैक फंगस से छुटकारा
बीपीटीपी निवासी सुरेश अरोड़ा(71) की पत्नी(61) सहित बेटा(29) कोरोना के शिकार हुए। इसमें पत्नी को नाक से खून आया। ईएनटी सलाह पर पता चला कि वह ब्लैक फंगस की संदिग्ध हैं। एमआरआई और बायोप्सी से इसकी पुष्टि हुई। द्वारका स्थित निजी अस्पताल में तीन घंटे की सर्जरी और लगातार सात दिन तक कुछ इंजेक्शन पर वह रही। इस दौरान परिवार का करीब 14 लाखरुपये का खर्च आया। सुरेश अरोड़ा बताते हैं कि प्लेन एम्फोथेरेसीन और लीपोसोमल, एम्फोथैरेसिन नाम के इंजेक्शन उन्हें बड़ी मुश्किल से दिल्ली में उपलब्ध हुए। फरीदाबाद में यह दवाएं मौजूद ही नहीं थी। सोमवार तक उनकी पत्नी अस्पताल में ही भर्ती थी। इस दौरान हर दिन केवल इंजेक्शन खरीद के लिए 56 से 60 हजार रुपये का खर्च आया। अन्य दवा और सर्जरी का खर्च अलग से करना पड़ा। उनका मानना है कि मधुमेह रोगी के लिए यह घातक है। किसी भी परेशानी को सामान्य न समझें, वह बड़ी मुश्किल से पत्नी को खतरे से बाहर ला सके हैं।
आंख में सूजन आने पर दो दिन में जा सकती है रोशनी
सर्वोदय अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. रवि भाटिया ने बताया कि काला फंगस अमूमन कोविड के कारण कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर घातक साबित हो रही है। अंग प्रत्यारोपण, डायलिसिस, मधुमेह और कैंसर रोगी के अलावा खून की कमी से पीड़ित को सबसे अधिक खतरा है। यह जन साधारण को भी यह अपना शिकार बना सकता है। कोविड के बाद इस वर्ग के लोगों में यह बीमारी घातक हो रही है। शुरुआती चरण में इस बीमारी के कारण चेहरे में अजीब सी हरकत महसूस होती है। अगले दो दिन में दांतों में दर्द, नाक में दर्द, आंखों में लालपन, पानी आना व दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। आंख की पलक झपकना कम होने लगती है। इस दौरान आंख में सूजन आने पर दो दिन में आंख की रोशनी जा सकती है। इसके बाद यह बीमारी सीधे आंख पर असर डाल सकती है।
अस्पताल में नाम मात्र लोग करा रहे सीटी स्कैन
इन दिनों बीके सिविल अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहे एमआरआई सेंटर के प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण की सीटी स्कैन से पुष्टि कराने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। बीते एक माह में जहां संक्रमण का दबाव बढ़ने के कारण यहां हर दिन सौ लोग जांच के लिए पहुंचकर एचआर-सीटी के जरिये कोविड की पुष्टि में जुटे रहे। इसमें से 90 फीसदी मामलों में कोविड की पुष्टि हुई। वहीं, बीते करीब सात दिनों से इस केंद्र पर 70 फीसदी कम लोग ही जांच के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि अभी तक ब्लैक फंगस का एक भी मामला यहां रिपोर्ट नहीं हुआ।
वर्जन-
दवाओँ के लिए पोर्टल पर डिमांड भेजी है। अस्पताल के विशेषज्ञों को सभी जरूरी तैयारी के लिए कहा गया है। ब्लैक फंगस नोटिफाइड बीमारी है, इसका कोई भी मरीज आते ही तुरंत जिला स्तर पर सूचना दी जाएगी। - डॉ. सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
ब्लैक फंगस की दवाएं जिले में मौजूद नहीं है। सप्लायर 21 मई तक इसे सुनिश्चित करेंगे। दवा उपलब्ध होते ही जिला प्रशासन को सूचना दे दी जाएगी। अब दवा नियंत्रण के लिए निर्देश नहीं मिले, हालांकि सभी को जरूरत अनुसार दवा मिले, इसका पूरा ख्याल औषधि विभाग रखेगा। - करण गोदारा, वरिष्ठ दवा एवं औषधि नियंत्रण अधिकारी

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