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ईएसआई डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों के ट्रांसफर से बढ़ सकती मरीजों की परेशानी..

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 10:22 PM IST
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फरीदाबाद। कारोना महामारी में ईएसआई डिस्पेंसरियों में तैनात डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ को पानीपत-हिसार में बन रहे कोविड अस्पतालों में शिफ्ट करने से ईएसआई कर्मचारियों के समक्ष स्वास्थ्य सेवाओं का संकट खड़ा हो सकता है। ईएसआई मुख्यालय के आदेश से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इसके लिए ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने मख्यमंत्री मनोहरलाल समेत उच्च अधिकारियों पत्र लिखा है।
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जिले ईएसआई की 12 डिस्पेंसरी और सेक्टर-8 में एक बड़ा अस्पताल है। इसके अलावा एनआईटी-3 में ईएसआईसी का मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हैं। इस 500 बेड के अस्पताल को सरकार ने कोविड अस्पताल घोषित किया हुआ है। इस कारण यहां ओपीडी बंद चल रही है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज डिस्पेंसरियों में भेजा जा रहा हैं। इन डिस्पेंसरियों में पहले से स्टाफ की कमी बनी हुई है। 10 डॉक्टरों का काम चार डॉक्टर संभाल रहे हैं। ऐसे में डिस्पेंसरी से भी स्टाफ चले जाने पर जिले के कर्मचारियों को इलाज मिलना मुश्किल हो जाएगा।

10 डिस्पेंसरियों के 80 स्टाफ शिफ्ट करने की तैयारी
राज्य सरकार ने हिसार और पानीपत में बनने वाले विशेष कोविड अस्पताल में डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के लिए राज्य की 120 डिस्पेंसरियों के कार्यरत 136 डॉक्टर व 171 पैरामेडिकल स्टाफ को शिफ्ट करने के आदेश जारी किए हैं। इसमें फरीदाबाद की 10 डिस्पेंसरियों के 78 डॉक्टरों व स्टाफ भी शामिल हैं। इससे मजदूरों और कर्मचारियों में काफी रोष है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि जिले में पहले ही डॉक्टर व स्टाफ की कमी है। 10 डिस्पेंसरियों के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट के ट्रांसफर से डिस्पेंसरियां पूरी तरह बंद हो जाएगी। यहां के मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा। क्योंकि डबुआ और तिगांव डिस्पेंसरी में कुल 10 डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ है। सेक्टर-8 अस्पताल में रोजाना पांच सौ से अधिक मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसलिए मजदूर संगठनों की मांग है कि सरकार को यह आदेश तुरंत प्रभाव से वापस लेने चाहिए।
रोजाना तीन से चार हजार मरीज पहुंचते हैं
ऑल इंडिया ट्रेन यूनियन कांग्रेस व ईएसआईसी रीजनल बोर्ड के सदस्य बेचू गिरी ने बताया कि 12 डिस्पेंसरियों व अस्पताल में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सेवाएं बंद होने के बाद से रोजाना करीब तीन से चार हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इस कारण सुबह शाम डिस्पेंसरियों पर मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में पहले इलाज को लेकर डिस्पेंसरियों पर कई बार मरीजों के बीच झगड़ा भी हो जाता है। कई मरीजों को इलाज के अभाव में खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है। 10 डिस्पेंसरियों से स्टाफ का ट्रांसफर होने से समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
वर्जन-
इस बारे में ईएसआईसी प्रबंधक निदेशक और मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। सरकार से अपील की गई कि डिस्पेंसरियों को बंद न किया जाए। हिसार व पानीपत में बनाए जाने वाले विशेष कोविड अस्पताल के लिए डॉक्टर व स्टाफ अन्य जगह से व्यवस्था की जाए। - बेचू गिरी, ईएसआईसी रीजनल बोर्ड के सदस्य
डॉक्टर व स्टाफ ट्रांसफर के संबंध में सरकार ने आदेश जारी किए है। इस संबंध में वह कोई जानकारी नहीं दे सकते है। सरकार के फैसले पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। - डॉ. असीम दास, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

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