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जेब पर पड़ा कोरोना का असर तो सरकारी स्कूलों में कराया बच्चों का दाखिला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 01:15 AM IST
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जेब पर पड़ा कोरोना का असर तो सरकारी स्कूलों में कराया बच्चों का दाखिला
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गाजियाबाद। कोरोना के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रहे निजी स्कूलों के अभिभावकों ने अपने बच्चों के नाम कटवाकर परिषदीय स्कूलों में प्रवेश करा दिया है। एक वर्ष में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अंदर 1963 छात्र-छात्राओं का नामांकन बढ़ा है। इसमें काफी संख्या में ऐसे अभिभावक हैं, जो पहले निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे थे, अब सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के कारण नौकरी छूट गई हैं, व्यापार चौपट हो गए हैं। ऐसे में फीस के साथ महंगे कोर्स ले पाना संभव नहीं है। कम खर्चे के बाद भी स्कूल पूरी फीस वसूल रहे हैं।
केस-1
शास्त्रीनगर डी-ब्लॉक निवासी निशा वर्मा ने बताया कि उनके पति अधिवक्ता हैं। उनका बेटा शहर के एक निजी स्कूल में कक्षा सात में पढ़ता था। कोरोना संक्रमण के कारण आर्थिक स्थिति खराब हुई तो स्कूल की फीस जमा नहीं हो पाई। कहीं से व्यवस्था करके फीस जमा कर दी तो छह हजार रुपये का कोर्स लेने के लिए कहा गया। जबकि एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदने के आदेश दिए गए हैं। मजबूरी में बेटे का नाम कटवाकर कन्या वैदिक स्कूल में प्रवेश कराया है।

केस-2
मूलरूप से बिहार के रहने वाले अमर नाथ शाह ने बताया कि उनकी बेटी निधि कविनगर स्थित निजी स्कूल में पढ़ती थी, लेकिन कोरोना के कारण उनका व्यापार बंद हुआ तो उन्होंने बच्ची का नाम कटवाकर परिषदीय स्कूल में करा दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद दूसरा कोई विकल्प ही नहीं बचा था। स्कूलों में भी पढ़ाई नहीं हो रही। ऑनलाइन कक्षाओं के बाद भी पूरी फीस वसूली जा रही है। अब सरकारी स्कूल में पढ़ाना मजबूरी हो गया है।
केस-3
महेंद्रा एंक्लेव निवासी रामनाथ ने बताया कि उनकी बेटी इशिका सिल्वर साइन स्कूल में कक्षा छह की छात्रा है। कोरोना में व्यापार बंद हो गया है। स्कूल लगातार फीस के लिए दबाव बना रहा था। जब फीस की व्यवस्था नहीं हुई तो मजबूरी में बच्ची का नाम कटाकर कन्या वैदिक स्कूल में उसका प्रवेश कराया है। जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता है बच्ची को सरकारी स्कूल में ही पढ़ाएंगे।
केस-4
एमपी एंक्लेव शास्त्रीनगर निवासी राधिका ने बताया कि उनके पति एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका वेतन कम हो गया, जिससे बेटे संयम की कांवेंट पब्लिक स्कूल की फीस जमा नहीं हुई। उसका नाम उच्च प्राथमिक विद्यालय रजापुर में लिखवाया है।
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परिषदीय स्कूलों में बढ़ा नामांकन
कोरोना के बाद जहां निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के नामांकन कम हुए हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन की संख्या बढ़ी है। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गत वर्ष 93736 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। पिछले एक साल में 1963 छात्र-छात्राओं का नामांकन बढ़ा है। अब 95,699 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार नामांकन बढ़ रहा है।
वर्जन....
परिषदीय स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है। कुछ स्कूलों से जानकारी मिली है कि निजी स्कूलों के बच्चे भी प्रवेश ले रहे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर अच्छा हो रहा है। इसका परिणाम देखने को मिल रहा है। - ब्रजभूषण चौधरी, बीएसए
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