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15 साल बाद स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड घोटाले की फिर से होगी जांच

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 01:18 AM IST
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15 साल बाद स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड घोटाले की फिर होगी जांच
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गाजियाबाद। स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड आवंटन घोटाले की जांच अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। घोटाले के 15 साल बाद मेरठ मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह फिर मामले की जांच के लिए बुधवार को गाजियाबाद पहुंचेंगे। मेरठ मंडलायुक्त घोटाले की अब तक की जांच संबंधी रिकॉर्ड को खंगालने के साथ योजना का मौके पर जाकर निरीक्षण कर सकते हैं। जीडीए की ओर 2019 में घोटाले में शामिल 36 दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के आरोप पत्रों की ड्राफ्ट रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। करीब दो साल से मामला ठंडे बस्ते में था। मामले के मुख्य शिकायतकर्ता वरिष्ठ भाजपा नेता व निगम पार्षद राजेंद्र त्यागी की मार्च 2021 में शासन में फिर की गई शिकायत के बाद मंडलायुक्त जांच को आ रहे हैं।
नियमों को ताक पर रख कर किया भूखंड आवंटन
जीडीए ने 1998 से 2003 के बीच स्वर्णजयंतीपुरम आवासीय योजना के तहत 1583 भूखंडों की 10 से ज्यादा योजनाओं को लांच किया था। आवंटन के बाद निर्धारित राशि जमा न करने या फिर भूखंड सरेंडर करने के कारण कई लोगों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। निरस्त हुए 139 भूखंडों को नियमों को ताक पर रखकर फरवरी 2005 से फरवरी 2007 के बीच फिर से आवंटित कर दिया गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुरादाबाद मंडलायुक्त ने की थी जांच
स्वर्णजयंतीपुरम भूखंड घोटाले की शिकायत भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने पहले मेरठ मंडलायुक्त से की। फिर कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने 2011 में हाईकोर्ट में सरकार से मामले में हुए बड़े राजस्व के नुकसान की बात कहकर पीआईएल दायर की। पीआईएल पर जुलाई 2017 में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 137 भूखंडों के मामले में जीडीए के आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर और जांच के आदेश दिए। फिर मुरादाबाद मंडलायुक्त ने लंबी जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी।
सभी दोषियों से लिया गया जवाब, आरोप-पत्र की ड्राफ्ट रिपोर्ट भेजी
शासन ने जीडीए से मामले में शामिल अधिकारियों का लिखित पक्ष देने को कहा। जीडीए की ओर से मांगे गए जबाव में गिने-चुने अधिकारियों व कर्मियों ने ही अपना पक्ष रखा। मुरादाबाद मंडलायुक्त की जांच के बाद जीडीए ने 2019 में भूखंड आवंटन घोटाले में दोषियों के आरोप पत्रों की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी थी। जीडीए ने आरोप पत्र तैयार करने से पहले सभी अधिकारियों व कर्मियों से उनका जवाब भी लिया था।
घोटाले की जांच अवैध निर्माण की ओर मोड़ने का आरोप
मामले के मुख्य शिकायत कर्ता भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि मामले में जीडीए के अधिकारी डीपी सिंह, हीरालाल, आरपी पांडेय, आरसी मिश्रा सहित कर्मचारियों को बचाने के लिए बड़ा खेल किया गया है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में पीआईएल भूखंड आवंटन में घोटाले व राजस्व को 400 करोड़ से अधिक के नुकसान का मामला उठाया गया था। इसी मामले में हाईकोर्ट ने दोषियों पर एफआईआर व जांच के आदेश दिए थे। लेकिन मामले की मुरादाबाद मंडलायुक्त की ओर से अधिकारियों कोे बचाने के लिए जांच मामले को भूखंड आवंटन की जगह अवैध निर्माण की ओर मोड़ दिया गया। बीते दो साल से मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखकर मामले की सही दिशा में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद मेरठ मंडलायुक्त दोबारा से जांच को आ रहे हैं। --
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