सोशल मीडिया पर छाए वसीम रिजवी: खूब ट्रेंड हुए जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी, प्यार के साथ नफरत भी बरसी

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 07 Dec 2021 10:51 PM IST

सार

ट्विटर पर मंगलवार को हैशटैग वसीम रिजवी, हैशटैग अरेस्ट वसीम रिजवी ने खूब ट्रेंड किया। तमाम लोग उनके इस कदम की ट्विटर पर तारीफ करते नजर आए तो विभिन्न मुल्कों के लोगों की ओर से नफरत भरे ट्वीट किए गए।
वसीम रिजवी बने जीतेंद्र त्यागी
वसीम रिजवी बने जीतेंद्र त्यागी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाने वाले शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (पूर्व में वसीम रिजवी) मंगलवार को इंटरनेट और सोशल मीडिया पर छाए रहे। एक ओर ट्विटर पर उनका नाम ट्रेंड होता रहा। साथ ही सोशल मीडिया में मिलीजुली प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। वहीं जितेंद्र नारायण त्यागी ट्विटर पर दिनभर सक्रिय रहे। सनातन धर्म अपनाने पर उन्होंने अपनी कई प्रतिक्रिया भी दीं।
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ट्विटर पर मंगलवार को हैशटैग वसीम रिजवी, हैशटैग अरेस्ट वसीम रिजवी ने खूब ट्रेंड किया। तमाम लोग उनके इस कदम की ट्विटर पर तारीफ करते नजर आए तो विभिन्न मुल्कों के लोगों की ओर से नफरत भरे ट्वीट किए गए।


भाजपा नेत्री उदिता त्यागी ने बांधा रक्षा सूत्र
सनातन धर्म अपनाने के अगले दिन भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री डॉ. उदिता त्यागी ने जितेंद्र नारायण त्यागी को रक्षा सूत्र बांधा। रक्षा सूत्र बांधने के बाद उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शामिल होने पर उनको अपना बड़ा भाई माना है।

वसीम रिजवी बने जितेंद्र नारायण त्यागी
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश शिया वक्फ  बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सोमवार को इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया था। डासना देवी मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरि महाराज ने वैदिक रीति से उन्हें सनातन धर्म स्वीकार कराया।

परिवार में जो नहीं अपनाएगा उसे त्याग दूंगा
धर्म परिवर्तन के बाद वसीम रिजवी को नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी दिया गया था। धर्म परिवर्तन की औपचारिकताओं के बाद वसीम रिजवी ने कहा कि आज से वह सिर्फ हिंदुत्व के लिए काम करेंगे। उनके परिवार के हिंदू धर्म अपनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो हिंदू धर्म नहीं अपनाएगा, मैं उनको त्याग दूंगा। 

वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण बनने के बाद उन्होंने कहा कि किताब के विमोचन के बाद मुझे इस्लाम धर्म से निष्कासित कर दिया गया था। उसके बाद मेरी मर्जी थी कि मैं किस धर्म को अपनाऊं। मैंने सभी धर्मों को पढ़ा और जाना तो मुझे सबसे अच्छा हिंदू धर्म लगा। इसमें इंसानियत की रक्षा की बात कही जाती है। इस्लाम धर्म से मुझे निकालने के बाद हर जुमे के बाद मेरा सिर काटने का फतवा जारी किया जाता और इनाम बढ़ाया जाता है। इसलिए सनातन धर्म स्वीकार कर लिया।
 
मेरे पिता के तीसरे पुत्र के रूप में जाने जाएंगे वसीम : यति नरसिंहानंद 
यति नरसिंहानंद ने कहा कि वसीम मानवतावादी और दिलेर व्यक्ति हैं। उन पर कोई आंच नहीं आने देंगे। सनातन धर्म स्वीकार करने के बाद उनके सामने जाति का सवाल न खड़ा हो इसलिए त्यागी समाज, अपने पिता और खानदान के सभी व्यक्तियों की सहमति से अपनी जाति का नाम दिया है। अब से वसीम रिजवी मेरे पिता के तीसरे पुत्र के रूप में जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को चाहिए कि वह तन, मन और धन से वसीम का साथ दें। 
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