जंतर-मंतर भड़काऊ नारेबाजी केस: कार्यक्रम के आयोजक प्रीत सिंह को मिली जमानत

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 24 Sep 2021 11:36 AM IST

सार

गौरतलब है कि दिल्ली में कोविड के चलते बिना इजाजत लोगों को इकट्ठा कर किसी कार्यक्रम को करने की मनाही है और जंतर-मंतर पर हुए कार्यक्रम के लिए भी पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। इसके बावजदू यह कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें समुदाय विशेष के खिला आपत्तिजनक नारेबाजी की गई।
जंतर-मंतर पर आयोजित हुए भारत जोड़ो आंदोलन के कार्यक्रम का एक दृश्य
जंतर-मंतर पर आयोजित हुए भारत जोड़ो आंदोलन के कार्यक्रम का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की राजधानी स्थित जंतर-मंतर पर आठ अगस्त के दिन आयोजित भारत जोड़ो आंदोलन के दौरान समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी मामले में प्रीत सिंह को अदालत ने शुक्रवार को जमानत दे दी। प्रीत सिंह आयोजकों में से एक है और उसे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने और बिना अनुमति के कोविड काल में लोगों को इकट्ठा कर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।
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जस्टिस मुक्ता गुप्ता यह आदेश प्रीत सिंह के वकील विष्णु शंकर जैन की दलीलों को सुनने के बाद दिया। प्रीत सिंह सेव इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष होने के साथ ही भारत जोड़ो आंदोलन कार्यक्रम के कथित तौर पर सह आयोजक हैं। इसी कार्यक्रम में भड़काऊ नारेबाजी हुई थी। प्रीत सिंह की जमानत सत्र न्यायालय ने 27 अगस्त को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह साफ तौर पर सक्रिय रूप से भड़काऊ नारेबाजी करते हुए लोगों के साथ पार्टिसिपेट करते हुए दिख रहे हैं।


पिछली सुनवाई में क्या हुआ
भड़काऊ भाषण मामले में आरोपी प्रीत सिंह ने पिछली सुनवाई में अपनी हिंदू राष्ट्र की मांग को उचित ठहराया था। प्रीत सिंह ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंदू राष्ट्र की मांग धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के बराबर नहीं है। हाईकोर्ट के समक्ष अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने कहा था कि वो अपनी मांग पर अडिग है और यदि अदालत का रवैया उनकी मांग के विपरीत है तो वह जमानत नहीं मांगेंगे।

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प्रीत सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर ने अपने मुवक्किल को जमानत प्रदान करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया जिससे दो समुदायों के बीच दुश्मनी हो।

उन्होंने कहा था मैं जिम्मेदारी की भावना के साथ कहता हूं अगर अदालत यह मानती है कि हिंदू राष्ट्र की मांग आईपीसी की धारा 153 के तहत आती है तो वे जमानत अर्जी पर दबाव नहीं डालेंगे। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अगर यह मांग किसी भी हालत में दुश्मनी को बढ़ावा नहीं देती।

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उन्होंने अपने मुवक्किल द्वारा हिन्दू राष्ट्र के संबंध में मीडिया को दिए साक्षात्कार वाले आरोप को स्वीकार करते हुए तर्क दिया कि वह कथित रूप से सांप्रदायिक नारेबाजी का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा मेरे मुवक्किल ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो आईपीसी की धारा 153ए के तहत आता हो। पुलिस आईपीसी की धारा 34 (सामान्य इरादा) का मामला बना रही है लेकिन कार्यक्रम सुबह 11:45 बजे समाप्त हुआ और दोपहर 3:45 बजे नारेबाजी हुई। मेरे मुवक्किल उस समय मौजूद नहीं था।
 

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