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MCD Result: भ्रष्टाचार पर लामबंद नहीं हुई दिल्ली, BJP का केंद्रीय नेतृत्व भी हुआ चित, जानें आखिर कहां हुई चूक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 07 Dec 2022 07:08 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहली बार एमसीडी चुनाव भाजपा स्थानीय मुद्दे और स्थानीय नेताओं के भरोसे नहीं लड़कर केंद्रीय नेतृत्व के रणनीति के तहत चुनाव लड़ी।

अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एमसीडी की सत्ता में वापसी के सपने को भाजपा का पूरा कुनबा भी पूरा नहीं कर सका। लोकल मुद्दे से अलग भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव में उतरी भाजपा उस जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी, जिससे वह पार्टी का निर्विरोध मेयर बना सके। वहीं, आम आदमी पार्टी के लोकल नेताओं ने भाजपा के दिग्गजों को विधानसभा चुनाव की तरह एमसीडी में हार का मुंह देखने को मजबूर कर दिया।

हर दिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा के दिग्गज नेता आम आदमी पार्टी को घेरते नजर आ रहे थे तो कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री समेत संगठन के महामंत्री, मंत्री और प्रदेश पदाधिकारी रोड शो, रैली, चुनावी सभा कर माहौल बना रहे थे। बावजूद दिल्ली वालों ने भाजपा के मुद्दे और कैबिनेट मंत्रियों पर भरोसा नहीं जताते हुए केजरीवाल पर ही विश्वास किया। यही वजह है कि पार्टी ने एमसीडी में भी सत्ता हासिल करने वाले आंकड़े को पार कर लिया। हालांकि चुनाव के बाद जिस तरह से भाजपा नेता निराश थे उससे अलग जरूर परिणाम दिखा। लिहाजा, भाजपा अभी भी एकीकृत निगम में मेयर बनाने के सपने को पाल रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहली बार एमसीडी चुनाव भाजपा स्थानीय मुद्दे और स्थानीय नेताओं के भरोसे नहीं लड़कर केंद्रीय नेतृत्व के रणनीति के तहत चुनाव लड़ी। पहली बार दिल्ली के सातों सांसद अपने-अपने इलाके व सोशल मीडिया में सक्रिय थे। आए दिन दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया पर आरोप मढ़ रहे थे, लेकिन दिल्ली वालों ने इन सभी मुद्दों को दरकिनार कर आप का साथ दिया। इसके पीछे व्यापारी वर्ग की परेशानी, एमसीडी की नीति, अल्पसंख्यकों समुदाय की दूरी भी मुख्य वजह रही।

संघ के साथ भी समन्वय बैठाने में प्रदेश पदाधिकारी रहे विफल
हर चुनाव में स्वयंसेवक मुख्य भूमिका में रहते हैं, लेकिन पूरे चुनाव में स्वयंसेवक भी संगठित रूप से मैदान में नहीं उतरे थे जबकि स्वयंसेवक ही मतदाताओं को चुनाव के दिन घर से बाहर निकालने में मुख्य भूमिका में रहते हैं। इसका नजारा चुनाव वाले दिन कम मत प्रतिशत पड़ना भी रहा। कई चुनाव केंद्र पर तो आम आदमी पार्टी की दोपहर के पहले मजबूती को देखते हुए भाजपा कार्यकर्ता मायूस हो कर अंतिम क्षणों तक मतदाताओं को बूथ तक नहीं पहुंचा सके।

अति उत्साह भी कामयाबी की राह में बना रोड़ा
जिस तरह से भाजपा का पूरा कुनबा प्रचार में उतरा था, इससे प्रदेश पदाधिकारी अति उत्साहित थे। यह उत्साह उन्हें एक कार्यकर्ता के रूप में मेहनत की जगह यह मान बैठने के लिए मजबूर किया कि एमसीडी की सत्ता में वापसी हो रही है।

टिकट बंटवारे पर भी उठे सवाल
टिकट बंटवारे के बाद कई नेता नाराज हो गए थे। वह अपने-अपने क्षेत्र में प्रत्याशियों के साथ तो थे, लेकिन अंदरखाने पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए पूरी लगन और मेहनत करने से बचते रहे। टिकट के कई दावेदारों ने तो खुलेआम टिकट बेचने की भी शिकायत केंद्रीय नेतृत्व को दी थी।

व्यापारी वर्ग की नाराजगी दूर करने में रहे नाकाम
पंद्रह साल से सत्ता में रही भाजपा से कई वर्ग दूरी बना ली थी। सीलिंग, कन्वर्जन चार्ज, पार्किंग, गंदगी, लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी जैसे विषयों से व्यापारी जूझ रहे थे। कोविड के बाद भी उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला। वहीं, केजरीवाल ने टाउन हॉल मीटिंग में व्यापारियों से मुलाकात कर समस्याओं को सुना। उन्हें आश्वस्त किया कि निगम में आप आएगी तो सीलिंग और कन्वर्जन चार्ज के मुद्दे पर गंभीरता से काम करेंगे। जरूरत पड़ने पर अदालत भी जाएंगे। भ्रष्टाचार नहीं हो इसके लिए लाइसेंस ऑनलाइन मिलेंगे। किसी को सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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