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निर्भया केस में एक और याचिका, दावा- विनय बीमार, मां को भी नहीं पहचान पा रहा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 20 Feb 2020 03:48 PM IST
विनय के नोटबुक 'दरिंदा' के अंश
विनय के नोटबुक 'दरिंदा' के अंश - फोटो : विनय के नोटबुक से
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निर्भया के दोषी विनय ने अपने वकील के माध्यम से पटियाला हाउस कोर्ट में एक नई याचिका डाली है जिसमें उसने कहा है कि वह मानसिक रूप से बीमार है और उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा की जरूरत है। पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई शनिवार दोपहर 12 बजे होगी।

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बता दें कि एपी सिंह ने अर्जी में कहा है कि विनय को सिर में हल्की नहीं बल्कि गंभीर चोटें आई हैं और उसके दाहिने हाथ में भी फ्रैक्चर है। इसके साथ ही वह मानसिक रूप से बीमार है और उसे सीजोफ्रेनिया हो गया है और इसलिए उसे इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलायड साइंसेज(इहबास) अस्पताल रेफर किया जाए।


इस दौरान निर्भया के वकील ने दोषी की मानसिक बीमारी और सिर की चोट के उपचार संबंधी याचिका का विरोध किया और कहा कि यह विचार योग्य नहीं है। वहीं विनय के वकील एपी सिंह ने बताया कि वह अपनी मां सहित अन्य लोगों को नहीं पहचान पा रहा है।

आज ही दायर की चुनाव आयोग में याचिका

निर्भया केस में फांसी से बचने के लिए दोषी नित नए हथकंडे अपना रहे हैं। इसी सिलसिले में दोषी विनय ने एक नया हथकंडा अपनाया है। जब उसे सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक सबसे निराशा हाथ लगी तो उसने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।

विनय के वकील एपी सिंह ने बताया कि उन्होंने विनय की तरफ से आज (20 फरवरी) ही एक याचिका चुनाव आयोग में डाली है। इसमें उन्होंने कि जब दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने राष्ट्रपति के पास विनय की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश भेजी थी, तो वो ना तो मंत्री थे और ना ही विधायक। एपी सिंह ने बताया कि जैन ने 29 जनवरी को ये याचिका भेजी थी तब दिल्ली में आचार संहिता लागू थी।

एपी सिंह ने बताया कि सत्येंद्र जैन ने अपना हस्ताक्षर व्हाट्सएप के जरिए 30 जनवरी को भेजा था। इसी को आधार बनाते हुए अर्जी में कहा गया है कि ऐसे में दया याचिका खारिज करना गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ है, क्योंकि उस समय दिल्ली में आचार संहिता लागू थी। इसी का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से इस पर कानूनी संज्ञान लेने की मांग की गई है।
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