प्राधिकरण के बड़े प्रोजेक्टों में गड़बड़ी का पता लगाएगा कैग

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jul 2021 01:30 AM IST
CAG will find out the irregularities in the big projects of the authority
विज्ञापन
ख़बर सुनें
नोएडा। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की टीम कोरोना काल के बाद फिर प्राधिकरण आ गई है। कैग की ओर से नोएडा प्राधिकरण के बड़े-बड़े प्रोजेक्टों का ऑडिट शुरू किया गया है। इसमें लेनदेन का ऑडिट किया जा रहा है।
विज्ञापन

सूत्रों के मुताबिक, इस बार सिविल की सभी बड़ी परियोजनाओं के टेंडर आदि का ऑडिट होगा। यह 2005 से लेकर दिसंबर 2020 तक की परियोजनाओं पर लागू होगा। इस दौरान आय, व्यय, वेतन से लेकर टेंडर में भुगतान को लेकर कैग की टीम ऑडिट करेगी। इसमें यह पता लगेगा कि कहां-कहां प्राधिकरण ने ज्यादा भुगतान किया है और किन परियोजनाओं में देरी से प्राधिकरण को नुकसान झेलना पड़ा है। इन सभी परियोजनाओं के ऑडिट की रिपोर्ट बाद में जारी होगी। इससे पहले कैग ने प्राधिकरण का परफॉर्मेंस ऑडिट का काम पूरा किया है।

एलिवेटेड रोड परियोजना पर लगाई आपत्ति
एमपी-2 रोड पर विश्व भारती स्कूल से शॉप्रिक्स मॉल तक 6 लेन के एलिवेटेड रोड परियोजना पर आपत्ति लगने की बात सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो इसमें 17 करोड़ रुपये के ज्यादा भुगतान पर आपत्ति है। परियोजना का काम 15 अक्तूबर 2014 को शुरू किया गया था। इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस काम को छह माह पहले पूरा किया गया था। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 415 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
लोकल फंड ऑडिट के बाद कैग को कमान
योगी सरकार के आने के बाद प्राधिकरणों के ऑडिट का काम लोकल फंड ऑडिट से छिनकर सीएजी को दे दिया गया। सीएजी ने पहले चरण में करीब दस वर्षों के लेखाजोखा का पता लगाया था। इसमें इंजीनियरिंग से जुड़े कार्य भी शामिल रहे, लेकिन बाद में 2005 से लेकर 2017-18 के प्रॉपर्टी ऑडिट के काम को अंजाम तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, जिसमें बिल्डरों को अलग-अलग स्तरों पर जमीन का आवंटन किया गया। खास बात यह कि यह सब कुछ बेहद ढीले नियमों के तहत किया गया। इससे प्राधिकरण के करोड़ों रुपये फंस गए।
इन परियोजनाओं का चल रहा ऑडिट
एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर, अंडरपास, पार्किंग, स्टेडियम, सड़क, नाली, महत्वपूर्ण इमारतों के निर्माण आदि की परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रोजेक्टों की लेटलतीफी से भी पड़ा असर
प्राधिकरण ने कई प्रोजेक्टों को शुरू तो काफी पहले किया था, लेकिन इसके बनने में कई वर्ष लग गए। इस वजह से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ गई। इसका असर प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ा। इससे प्राधिकरण को नुकसान हुआ।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00