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धरती कांपी, दहला दिल, 50 मीटर उठा धूल का गुबार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 02:06 AM IST
Earth trembled, heart trembled, a cloud of dust lifted 50 meters
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नोएडा। ट्विन टावर के वो 12 सेकेंड.... इस बीच धमाके से धरती कांप गई और धूल के गुबार ने आसमान को ढंक लिया। इतिहास दर्ज करने जा रहे इस पल को देखने के लिए जुटे लोगों के पल भर के लिए दिल भी दहल गए। जी हां, ट्विन टावर जमींदोज होने के दौरान का मौके का यही नजारा रहा। कुतुब मीनार से भी ऊंचा ट्विन टावर 12 सेकेंडों में ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। 32 मंजिला एपेक्स और 29 मंजिला सियान टावर जहां खड़े थे, वहीं ढह गए। एक के बाद एक कई धमाकों से करीब 100 मीटर के दायरे में 50 मीटर से भी ज्यादा ऊंचा धूल का गुबार उठा। इससे करीब दस मिनट तक ट्विन टावर की नजदीकी इमारतें नजरों से ओझल रहीं। अनुमान है कि धमाके का कंपन 25 से 30 मिमी प्रति सेकेंड का रहा।

दोनों इमारतों को सुरक्षित तरीके से ध्वस्त करने के लिए पुख्ता तैयारियां की गई थीं। वाइब्रेशन (कंपन) मापने के लिए एडिफिस कंपनी ने दस और सीबीआरआई की तरफ से दस मशीनें लगाई थीं। रविवार शाम तक मलबे के ढेर से तीन-चार मशीनों को निकाल लिया गया था। बाकी की तलाश सोमवार को होगी। सभी के आंकड़े मिलने के बाद ही कंपनी कंपन का सटीक आंकड़ा दे सकेगी, लेकिन ट्विन टावर के 200 से 300 मीटर के दायरे में 25 से 30 एमएम के कंपन का अंदाजा इंजीनियरों ने लगाया है। बिजली कड़कने जैसी आवाज के साथ जैसे ही इमारतें धराशायी हुईं, इसके बेहद नजदीक एमराल्ड कोर्ट, एटीएस और पार्श्वनाथ सोसाइटी की इमारतें कांप उठीं। एमराल्ड और एटीएस सोसाइटी के फ्लैट खाली करा लिए गए थे, लेकिन पार्श्वनाथ सोसाइटी में लोग धरती हिलते ही सहम उठे। ट्विन टावर के सौ मीटर के दायरे में विस्फोटकों की गंध और करीब एक घंटे तक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से वहां मौजूद लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

धमाके से नहीं, इमारत गिरने से कंपन
टावर ध्वस्त करने वाली एडिफिस कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के लिहाज से नोएडा सेस्मिक जोन-5 में आता है। आमतौर पर यहां भूकंप की गति रिक्टर स्केल के पैमाने पर चार के आसपास रही है। मतलब 300 से 400 मिमी प्रति सेकंड का कंपन हुआ है। इस लिहाज से 25 मिमी का कंपन होने से इमारतें सुरक्षित हैं। ट्विन टावर के गिरने से इससे 12 से 16 गुना कम होने का अनुमान है। एडिफिस के पार्टनल जिगर छेदा ने बताया कि ट्विन टावर में धमाकों से नहीं, बल्कि उसके जमीन पर गिरने से कंपन की स्थिति पैदा हुई।
एक घंटे तक विस्फोटकों की जांच
ट्विन टावर गिरने के बाद सबसे बड़ी चुनौती जिंदा विस्फोटकों को तलाशने की थी। करीब आधे घंटे बाद एडिफिस और उसकी सहयोगी कंपनी जेट डिमोलिशन के एक्सपर्ट मलबे के ढ़ेर के पास पहुंचे। शाम चार बजे तक विस्फोटकों की तलाश के बाद सुरक्षित डिमोलिशन की जानकारी दी गई। हालांकि, निवासियों को पांच बजे के बाद ही अपने घर लौटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने सफाई व्यवस्था के चलते रात 9 बजे से पहले सोसाइटी की एंट्री खोलने के इंकार कर दिया।
रातभर घर नहीं लौटे 90 फीसदी निवासी
एमराल्ड कोर्ट और एटीएस सोसाइटी को पूरी तरह खाली करा लिया गया था। यहां के पांच हजार से ज्यादा निवासी शनिवार शाम और रविवार सवेरे ही अपने घरों पर ताला लगाकर जा चुके थे। टावर ध्वस्त होने के बाद शाम पांच बजे बिजली आपूर्ति सही कर दी गई। रात नौ बजे से लोगों को घर लौटने की अनुमति दी जा चुकी थी, 90 फीसदी निवासियों ने घर से बाहर रहना ही मुनासिब समझा।

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