पीएम मोदी ने इस बार पेशेवर तीरंदाजों के धनुष-तीर से रावण पर साधा निशाना

हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Thu, 10 Oct 2019 03:15 AM IST
पीएम मोदी मनोज तिवारी और अन्य नेता
पीएम मोदी मनोज तिवारी और अन्य नेता - फोटो : Amar Ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार दशहरा पर द्वारका रामलीला में पेशेवर तीरंदाजों के धनुष-तीर से दशानन रावण पर निशाना साधा। खास बात यह भी रही कि पश्चिमी दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा ने पहले खुद धनुष तीर चलाने का प्रशिक्षण लिया और उसके बाद मंच पर प्रधानमंत्री को इसे चलाने के बारे में बताया। पीएम ने भी कुछ ही सेकंड में न सिर्फ इसे बखूबी समझा, बल्कि सफलतापूर्वक तीर को रावण के पुतले की ओर चलाया भी।
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दरअसल, वर्मा इस बात को लेकर चिंतित थे कि पीएम के धनुष से निकला तीर किस तरह से दूर तक जाए। उनकी चिंता जायज भी थी क्योंकि पिछले कई दशहरे के दौरान रावण के वध के लिए पीएम के धनुष से निकला तीर महज कुछ ही मीटर की दूरी तक गया था। इस बार ऐसा नहीं हो, इसके लिए सांसद ने पीएम को ऐसा धनुष उपलब्ध कराने की कोशिश शुरू की, जो रावण के पुतले की ओर उड़ता हुआ दूर तक जाए। इसके लिए उन्होंने तीरंदाजी संघ से संपर्क साधा और पेशेवर तीरंदाजों के लिए इस्तेमाल होने वाला धनुष मंगवाया।


यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से मंगवाया गया धनुष

दिल्ली तीरंदाजी संघ के सचिव और भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने खुलासा किया कि सांसद प्रवेश वर्मा चाहते थे कि रावण वध के लिए पीएम के धनुष से निकला तीर वहीं न गिरे, बल्कि काफी दूर तक जाए। उन्होंने इसका उपाय उनसे पूछा। उन्होंने सांसद से कहा कि तीरंदाज इंडियन राउंड में बांस से बने धनुष का प्रयोग करते हैं। इस धनुष से निकला तीर कम से कम 60 मीटर तक जा सकता है। अगर पीएम थोड़ी से भी प्रत्यंचा खींचेंगे तो यह काफी दूर तक जाएगा।

वर्मा ने उनसे धनुष उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद उन्होंने यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से बांस का धनुष मंगवाया। इसे चलाने के बारे में उन्होंने सांसद को बताया। सचदेवा के अनुसार, सांसद को दी गई ट्रेनिंग काम कर गई और पीएम ने भी इसे बखूबी समझते हुए इसे शानदार अंदाज में चलाया।

दीपिका, तरुणदीप जैसे तीरंदाज इसी धनुष की मदद से बढ़े आगे

सचदेवा के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले तीरंदाज इसी धनुष से शुरुआत करते हैं। चाहें कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन दीपिका कुमारी हों या एशियन गेम्स मेडलिस्ट तरुणदीप रॉय या फिर ओलंपियन अतानु दास। इन सभी तीरंदाजों ने इसी धनुष से अपने कॅरिअर की शुरुआत की और उसके बाद मेटल के रीकर्व धनुष को अपनाया। पहले यह धनुष मणिपुर, झारखंड में बनते थे, लेकिन अब कई राज्यों में बनाए जा रहे हैं। इस धनुष से खेले जाने वाले इंडियन राउंड की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में इवेंट होती है।

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