दो साल पहले शुरू हुई थी देश की एकमात्र बाल रामलीला

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 25 Sep 2019 03:50 AM IST

सार

  • बच्चों को भारतीय परंपरा से जोड़ने के लिए दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में दो साल पहले एक प्रयोग किया गया
  • तीन स्कूलों के करीब 100 बच्चों ने मिलकर तीन दिन के लिए बाल रामलीला का मंचन किया
  • इसे देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग पहुंचे
रामलीला की तैयारियां...
रामलीला की तैयारियां... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बच्चों को भारतीय परंपरा से जोड़ने के लिए दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में दो साल पहले एक प्रयोग किया गया। तीन स्कूलों के करीब 100 बच्चों ने मिलकर तीन दिन के लिए बाल रामलीला का मंचन किया। इसे देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग पहुंचे। 
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देश भर में इस तरह के आयोजन को बढ़ावा देने के लिए आयोजकों को संदेश मिलने लगे तो आयोजक लगातार तीसरी बार बाल रामलीला का आयोजन करने जा रहा है। द्वारका सेक्टर- 13 के डीडीए ग्राउंड पर होने वाली इस बाल रामलीला में फिलहाल दिल्ली के 39 स्कूलों से करीब 4 हजार बच्चे मंच पर दिखाई देंगे। 


गणेश वंदना से लेकर मुख्य किरदार तक की जिम्मेदारी अलग- अलग स्कूलों को सौंपी गई है। बाल उत्सव रामलीला समिति की अध्यक्ष प्रीतिमा खंडेलवाल बताती हैं कि वर्ष 2017 में सबसे पहले तीन दिन के लिए बाल रामलीला की शुरुआत की गई थी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 2 हजार स्कूली बच्चों ने मंचन किया था। इस बार भोजन की बर्बादी, जल संरक्षण और प्लास्टिक पर प्रतिबंध इत्यादि संदेशों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 

 दिल्ली सरकार के एक स्कूल में शिक्षिका प्रीतिमा खंडेलवाल का मानना है कि बच्चों में किसी भी तरह का संदेश तेजी से संप्रेषित होता है। रामलीला एक ऐसा मंच है, जिसके जरिये हम न सिर्फ भारतीय सभ्यता और परंपरा को बच्चों तक पहुंचा सकते हैं बल्कि बच्चों को व्यावहारिक भी बनाया जा सकता है। 

साथ ही आज के दौर में मोबाइल और इंटरनेट की लत में डूबे बच्चों को रामलीला के मंचन से नई दिशा दी जा सकती है। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर जब बाल रामलीला की शुरुआत की गई । वर्ष 2018 में फिर से बाल रामलीला का आयोजन हुआ तो दर्शकों की संख्या उम्मीद से कई गुना थी। दिल्ली पुलिस के ही अनुसार करीब एक लाख से ज्यादा लोग बाल रामलीला उत्सव देखने के लिए पहुंचे थे। 

उन्होंने बताया कि 28 सितंबर से शुरू होने वाली रामलीला में दूसरा राष्ट्रीय अवॉर्ड भी देश भर की उन चुनिंदा महिलाओं को दिया जा रहा है जिन्होंने उद्यमिता के क्षेत्र में कामयाबी हासिल की है। करीब 64 से ज्यादा महिलाओं के नाम सूची में है। 

गिनीज रिकॉर्ड तक पहुंचा नाम, फिर करेंगे आवेदन
समिति के अनुसार वर्ष 2018 में बच्चों की रामलीला को लेकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए नामांकन किया गया था, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी न होने के कारण इस वर्ष दोबारा भेजा जाएगा। पंख कतर दिए पर ना छोड़ी मैंने उड़ान मां, तेरी बिटिया ने बना ली अपनी पहचान। यह विशेष प्रस्तुति बाल विहार अनाथाश्रम कार्यक्रम का आयोजन 28 सितंबर को किया जाएगा।

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