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कोयला ब्लॉक आवंटन: मंत्रालय के पूर्व सचिव को तीन और पूर्व संयुक्त सचिव को दो साल कैद, कोर्ट ने सुनाई सजा

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 08 Aug 2022 08:29 PM IST
सार

पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने इन दोनों के अलावा तीसरे आरोपी मुकेश गुप्ता को चार साल कैद और दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने अलावा ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

कोयला आवंटन
कोयला आवंटन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अदालत ने महाराष्ट्र स्थित लोहारा ईस्ट कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव एचसी गुप्ता को तीन वर्ष व पूर्व संयुक्त सचिव केएस क्रोफा को दो साल की सजा सुनाई है। अदालत ने गुप्ता पर एक लाख व क्रोफा पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है।



पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने इन दोनों के अलावा तीसरे आरोपी मुकेश गुप्ता को चार साल कैद और दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने अलावा ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।


अदालत ने 29 जुलाई को तीनों आरोपियों को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का दोषी ठहराया था। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए थे। अदालत ने कहा कि यह जानने के बावजूद कि मेसर्स ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने बुनियादी ढांचे और उत्पादन क्षमता के बारे में गलत जानकारी दी थी, कोई कार्रवाई नहीं की गई।

2012 में हुई थी मामले में शिकायत

यह मामला दो सांसदों- प्रकाश जावड़ेकर और हंस राज अहीर, और एक राजनीतिक नेता अधिवक्ता भूपेंद्र यादव द्वारा मार्च 2012 में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को कोयला मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा कोयले के मुफ्त आवंटन द्वारा भ्रष्टाचार के बारे में शिकायत करने के बाद शुरू हुआ।

आरोप पत्र में उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने 2005-2011 के बीच आपराधिक साजिश रची और जीआईएल के पक्ष में 'लोहरा ईस्ट कोल ब्लॉक' की खरीद के लिए कोयला मंत्रालय को धोखा दिया।

आरोप पत्र में कहा गया है कि आवेदन पत्र में कंपनी की कुल संपत्ति, उपकरण, मौजूदा क्षमता, खरीद की स्थिति और संयंत्र और मशीनरी की स्थापना के बारे में झूठे दावे करके साजिश को अंजाम दिया गया था। अदालत ने हालांकि जीआईएल की पूर्व निदेशक सीमा गुप्ता और भूविज्ञान एवं खनन के पूर्व निदेशक, महाराष्ट्र विश्वास सवाखंडे को बरी कर दिया था।
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