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इन तीन राशियों के लिए निवेश का शुभ समय, भाग्यफल से जानें अन्य राशियों का हाल
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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली में 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी, दो फ्रंटलाइन वर्कर ने नहीं ली वैक्सीन

दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुए चार माह का वक्त गुजर चुका है लेकिन जमीनी हालात यह हैं कि 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी और दो फ्रंटलाइन वर्कर अभी भी वैक्सीन से दूर हैं। छोटा राज्य, बेहतर संसाधन और तकनीकी ज्ञान में माहिर होने के बाद भी चार महीने में दिल्ली टीकाकरण का पहला चरण पार नहीं कर पाया है। इसे लेकर जब अमर उजाला ने जब पड़ताल शुरू की तो सरकारी आंकड़े ही चौंकान्ने वाले सामने आए। 

16 जनवरी से देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण चल रहा है। पहले चरण के तहत जनवरी और फरवरी माह में इन्हें प्राथमिकता देते हुए वैक्सीन दी गई थी लेकिन अभी हालात ऐसे हैं कि पहला चरण ही दिल्ली में 80 फीसदी तक नहीं पहुंचा है। केवल 78 फीसदी ही स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले पाए हैं। वहीं फ्रंटलाइन वर्करों की बात करें तो पहली खुराक इनमें से 80 फीसदी ने ली है। 

यह भी पता चला कि स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 या उससे अधिक साल वाले लोगों के लिए पांच दिन की कोविशील्ड और एक दिन की कोवाक्सिन उपलब्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार दूसरी खुराक पर अधिक ध्यान देने की वजह वैक्सीन की कमी पर जोर दे रही है। सरकार के पास इस वर्ग के लिए 623 केंद्र हैं जहां 75 हजार लोगों को एक दिन में वैक्सीन दिया जा सकता है। 
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स्वास्थ्य केंद्र पर जांच स्वास्थ्य कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच स्वास्थ्य कर्मचारी

टूटती सांसों को सहारा: 10 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन से रेलवे ने दी राहत, ताउते चक्रवात के बीच गुजरात पहुंचाई संजीवनी

रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन चलाकर कोरोना संक्रमण की वजह से टूटती सांसों को ऑक्सीजन दे रही है। अभी तक रेलवे ने दस हजार मीट्रिक टन से भी अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरे देश में की है। औसतन प्रतिदिन रेलवे आठ सौ मीट्रिक टन तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरे देश में कर रही है। जो जो केंद्र शासित प्रदेश व देश की राजधानी दिल्ली के एक दिन के खपत से कुछ टन अधिक व एनसीआर के खपत से कम अनुमानित है। हालांकि दिल्ली में अभी तक सबसे अधिक 3,734 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है।

आने वाले चक्रवाती तूफान के बावजूद, तेज हवाओं को मात देते हुए सोमवार को देश को 150 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए रेलवे ने गुजरात से 2 ऑक्सीजन एक्सप्रेस रवाना कर 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाने में कामयाबी हासिल की। सभी बाधाओं को पार करते ऑक्सीजन एक्सप्रेस यात्रा जारी रखे हुए है। अब तक भारतीय रेलवे ने 600 से अधिक टैंकरों में 10,300 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन की खेप पहुंचाया है। 

ताउते चक्रवात की आहट के बावजूद वडोदरा से एक ऑक्सीजन एक्सप्रेस 2 मीट्रिक टन लेकर रवाना हुई। इस ट्रेन में कुल 45 मीट्रिक टन ऑक्सीजन है जो मंगवार तक दिल्ली क्षेत्र में आपूर्ति के लिए पहुंचेगी। इसी तरह उत्तर प्रदेश और दिल्ली क्षेत्र में वितरण के लिए दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस 106 एमटी ऑक्सीजन सहायता से लदे 6 टैंकरों के साथ सोमवार सुबह 5:30 बजे हापा से रवाना हुई है तो बोकारो से पंजाब के लिए पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस दो टैंकरों के साथ 41.07 मीट्रिक टन ऑक्सीजन राहत के साथ फिल्लौर पहुंचने के लिए तैयार है। उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल से चलनी शुरू हुई थी और अब तक लगभग 160 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने अपनी यात्रा पूरी करते हुए विभिन्न राज्यों को राहत प्रदान की है।

किस राज्य में कितनी ऑक्सीजन की आपूति अभी तक हुई
. महाराष्ट्र में 521 मीट्रिक टन
. दिल्ली में लगभग 3734 मीट्रिक टन
. उत्तर प्रदेश में लगभग 2652 मीट्रिक टन
. उत्तराखंड में 200 मीट्रिक टन
. हरियाणा में 1290 मीट्रिक टन
. पंजाब में 40 मीट्रिक टन
. मध्य प्रदेश में 431 मीट्रिक टन
. तेलंगाना में 564 मीट्रिक टन
. राजस्थान में 40 मीट्रिक टन
. कर्नाटक में 361 मीट्रिक टन
. तमिलनाडु में 231 मीट्रिक टन
. केरल में 118 मीट्रिक टन
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अब नॉ मोर: श्मशान घाटों पर हर दिन लकड़ियां लेकर पहुंच रहे ट्रक, शवों की संख्या अधिक होने से बढ़ी मांग

राजधानी में कोरोना से मृतकों की संख्या को श्मशान घाटों में लकड़ियों की मांग बनी हुई है। हर दिन विभिन्न राज्यों से लकड़ियों से लदे ट्रक पहुंच रहे हैं। हालांकि, पिछले माह के हिसाब से इस माह लकड़ियों की खपत कम हो गई है।

सीमापुरी श्मशान घाट का संचालन करने वाले शहीद भगत सिंह सेवा दल के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि पिछले एक माह में श्मशान घाट में 8 टन 800 किलो लकड़ियों का इस्तेमाल किया जा चुका है। हालांकि, पिछले माह के मुकाबले इस माह शवों की संख्या में कुछ कमी होने के साथ-साथ लकड़ियों का प्रयोग भी कम हो रहा है, जोकि अब 50 फीसदी तक गिर गया है। 

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के रामपुर, उत्तराखंड के हल्द्वानी, पंजाब और राजस्थान से लकड़ियां श्मशान घाट पहुंच रही हैं। क्योंकि, अभी दिल्ली में शवों की संख्या में अधिक कमी नहीं आई है। ऐसे में प्रतिदिन ट्रकों की आवाजाही लगी हुई है। वहीं, उत्तरी दिल्ली के सबसे बड़े श्मशान घाट निगमबोध घाट के संचालन समिति के महाप्रबंधक सुमन कुमार गुप्ता ने बताया कि श्मशान घाट में शवों की संख्या को देखते हुए लकड़ी का स्टॉक पूरा किया जा रहा है। फिलहाल, शव को जलाने के लिए लकड़ी की कोई कमी नहीं है।

एक अंत्येष्टि के लिए 3-4 क्विंटल लकड़ी की जरूरत
श्मशान घाट में एक शव को जलाने के लिए 3-4 क्विंटल तक लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए 600 से 700 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। इसकी पर्ची भी लोगों को उपलब्ध कराई जाती है। चिता जल्दी से आग पकड़ सके इसके लिए आम की लकड़ियों की अलग से व्यवस्था होती है। इसके लिए शुल्क चुकाना पड़ता है।

सीमापुरी में अब तक तीन बच्चों को किया जा चुका है दफन
सीमापुरी के श्मशान घाट में अब तक तीन कोविड बच्चों को दफन किया जा चुका है। इनकी उम्र आठ से 10 महीने के बीच है और कोरोना से मौत हुई थी।  कोरोना संक्रमित बच्चों के शवों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट में 200 गज में अलग से व्यवस्था की गई है। 
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स्टेशनों पर पसरा सन्नाट: ट्रेन के पहिए नहीं थमे, यात्रियों के पदचाप थम से गए

कोरोना संक्रमण के दौर में मानों देश और दुनिया ठहर गई है। नई दिल्ली स्टेशन पर जहां रोजाना पांच लाख से अधिक लोगों की प्रतिदिन चहल-पहल रहती थी वहीं इनदिनों बमुश्किल यात्री दिखाई पड़ रहे है। लंबी दूरी की ट्रेनें तो चल रही हैं, बावजूद स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रह रहा है। मानों देश की राजधानी का नहीं किसी कस्बे का स्टेशन हो। यात्रियों की कमी को देखते हुए रेलवे भी लगातार ट्रेनों को निरस्त करने को मजबूर है।

पिछले साल के देश व्यापी लॉकडाउन में जहां ट्रेन के पहिए थम गए थे तो इस साल ट्रेन के पहिए पटरी पर तो दौड़ रहे हैं, लेकिन यात्री महामारी के दौर में गायब हैं। देश की राजधानी दिल्ली के स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। आने व जाने वाली ट्रेनें 40 प्रतिशत भी नहीं भरी रह रही है। कुछ यात्री स्टेशन पर पहुंच भी रहे हैं तो वह प्लेटफार्म पर चहलकदमी करने की बजाए कोविड प्रोटोकॉल या संक्रमण के खतरे को भांपते हुए सीधा शांतिपूर्वक ट्रेन में अपनी सीट पर बैठ जा रहे हैं। यहां तक कि खाने-पीने के स्टॉल पर भी नहीं पहुंच रहे हैं। इस वजह से प्लेटफार्म पर खाद्य पदार्थ बेचने वालों के भी रोजगार का साधन इनदिनों खत्म हो रहा है। ऑटो-टैक्सी वालों की भीड़ तो है, लेकिन यात्रियों का टोटा हो गया है।

ट्रेनों की संख्या घटी: सुनित शर्मा
इस स्थिति को देखते हुए रेलवे भी ट्रेनों की संख्या में लगातार कटौती कर रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष सुनित शर्मा ने बताया कि कोरोना के पहले देशभर में कुल मेल व एक्सप्रेस ट्रेन 1768 चल रही थीं तो इस दौरान महज 1005 ट्रेनें ही लंबी दूरी की चल रही हैं। इसी तरह देशभर में महज 517 पैसेंजर ट्रेन तो सबअर्बन रेलवे में 3893 लोकल चल रही हैं। ट्रेनों में यात्रियों की संख्या की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। 

खाद्य पदार्थ बिक्री करने वालों के सामने रोजगार का टोटा: रविंद्र गुप्ता
स्टेशन पर यात्रियों की कमी की वजह से खाद्य पदार्थ की बिक्री करने वालों के के सामने भी खाने की समस्या उत्पन्न हो रही है। कई छोटे-छोटे वेंडर हैं जो रोज कमाते हैं व रोज खाते हैं। कोविड की वजह से उनका भी रोजगार खत्म हो रहा है। रेलवे खानपान लाइसेंसी वेंडर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने बताया कि स्टेशन पर लाखों छोटे वेंडर खाने-पीने का सामान बिक्री कर अपना जीवन यापन करते हैं। कोविड के दौरान उनका रोजगार संकट में आ गया है। स्टेशन पर यात्री नहीं होने की वजह से खरीदार भी नहीं है। भूखमरी का शिकार हो रहे लाइसेंसी वेंडरों के परिजनों के कानूनी उत्तराधिकार के लिए भी कई बार रेलवे अधिकारियों से अपील की गई, लेकिन सुनवाई तक नहीं है।

नई दिल्ली: शाम साढ़े पांच बजे का नजारा
नई दिल्ली से हावड़ा जाने वाली पूर्वा एक्सप्रेस सोमवार शाम पांच बजे प्लेटफार्म नंबर 15 पर लग गई। यह ट्रेन तय समय के अनुसार शाम 5:40 बजे रवाना होनी थी। इस दौरान पूरे 40 मिनट तक प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहा। चंद यात्री ही इस ट्रेन से रवाना होने के लिए नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे हुए थे। जबकि आम दिनों में इस ट्रेन पर चढ़ने की आपाधापी मची रहती है। इसी तरह सुबह करीब आठ बजे पटना राजधानी जब नई दिल्ली पहुंची तो इस ट्रेन से पहुंचने वालों की संख्या भी गिनती की ही थी। इस ट्रेन से दिल्ली पहुंचे राकेश व अनामिका ने बताया कि ट्रेन में भीड़ बिलकुल ही नहीं थी। इस वजह से सफाई व्यवस्था भी बेहतर थी। यह भी कहा कि ट्रेन की लेटलतीफी इस दौरान भी कम नहीं हो रही है।
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डॉक्टरों ने किया आगाह: शरीर में हो रहे किसी भी बदलाव को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पसरा सन्नाटा
दिल्ली में कोरोना से रोजाना करीब 10 हजार से ज्यादा लोग स्वस्थ हो रहे हैं। इन सभी लोगों को लोगों को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में कोई भी बदलाव नजर आ रहा है या स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो रही है तो उस पर ध्यान देना की जरूरत है। ऐसा न करना घातक साबित हो सकता है। दिल्ली में बीते एक माह मे स्वस्थ होने वाले लोगों को अभी भी सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द और थकावट कि शिकायत हो रही है। कई मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें कोरोना से स्वस्थ होने के कुछ समय बाद इस प्रकार की समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है।
    
जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर अजय कुमार ने बताया कि अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटे कुछ मरीजों को दो सप्ताह बाद भी सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द की शिकायत हो रही है। वह टेली मेडिसन के माध्यम से ऐसे मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों को ह्रदय संबंधी समस्याएं भी हुई हैं। इनमें एक मरीज को जीबी पंत अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। राजीव गांधी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि स्वस्थ हुए कई लोगों को अलग-अलग प्रकार की समस्याएं हो रही हैं। इन लोगों को पोस्ट कोविड केयर के विषय में सभी जानकारी दी जा ही है। 

आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर देश दीपक ने बताया कि पोस्ट कोविड केयर भी उतना ही जरूरी है, जितना कोविड केयर। उन्होंने कहा कि मरीज जितना ख्याल कोरोना के दौरान रखता है। बीमारी से ठीक होने के बाद भी कुछ हफ्तों या महीनों तक अपना उतनी ही सतर्कता से ख्याल रखना चाहिए। ऐसा कभी नहीं समझना चाहिए कि अब उन्हें कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने बताया कि संक्रमण से स्वस्थ हो चुके मरीज को अगर कोई समस्या हो रही है। या शरीर में कोई बदलाव नजर आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

डॉक्टर दीपक के मुताबिक, गंभीर लक्षण वाले मरीज को पूरी तरह से ठीक होने में दो से तीन महीने तक का वक्त लग सकता है, जो ज्यादा दिन अस्पताल में रह कर लौटे हैं, उनकी रिकवरी औरों के मुकाबले थोड़ी धीमी हो सकती है। ऐसे लोगों को ठीक होने के बाद प्राणायाम से दिन की शुरुआत करनी चाहिए। साथ ही ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे काफी थकान होने लगे। 
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मजबूरी का फायदा: आईसीयू में भर्ती कराने के नाम पर पांच लाख मांगने पर एम्स कर्मी गिरफ्तार, भाई-बहन देते थे वारदात को अंजाम

उत्तरी रोहिणी थाना पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में आईसीयू बेड पर मरीज को भर्ती कराने के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग करने वाले  एम्स कर्मी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी एम्स के हेमेटोलॉजी विभाग में कार्यरत है। अपनी बहन के साथ मिलकर वह वारदात का अंजाम दे रहा था। पुलिस मामले दर्ज कर आगे की जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित हरिपाल ने पुलिस को सूचना दी थी कि कोरोना संक्रमित उनकी पत्नी को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने के नाम पर भूषण कुमार और सुनील कुमार नाम के दो शख्स ने 2.80 लाख रुपये लिए हैं। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दोनों शख्स से पूछताछ की। 

भूषण कुमार ने पूछताछ में बताया कि पीड़ित का साला रविंद्र पाल सिंह उनका जानकार है। रविंद्र पाल सिंह ने अपनी बहन की तबीयत बिगड़ने पर भूषण कुमार को कॉल कर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करने के लिए कहा था। भूषण का वेल्डिंग का काम होने की वजह से उसने खाली सिलेंडर की व्यवस्था कर दी थी।

इसके बाद गत 30 अप्रैल को रविंद्र पाल सिंह ने बहन की तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए भूषण से अस्पताल में भर्ती की मांग की। इसके बाद भूषण ने एम्स में कार्यरत पंकज कुमार से मरीज को भर्ती कराने के लिए कहा। इस पर पंकज ने महामारी का हवाला देते हुए कहा कि अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है, लेकिन यदि पैसों का इंतजाम हो जाए तो मरीज को भर्ती कराया जा सकता है। 

पंकज ने भूषण कुमार से पांच लाख रुपये की मांग करते हुए ममता नाम की महिला का फोन नंबर भेज दिया और कहा कि महिला अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था करा देगी। इसके बाद भूषण ने ममता का नंबर मरीज के बेटे को दिया और मरीज को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपियों ने भर्ती के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग की। इस पर हरीश के बेटे ने पंकज और ममता को 2.80 लाख रुपये की राशि भेज दी। राशि मिलने पर पंकज और ममता दोनों फरार होकर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पहुंच गए।

पुलिस ने पीएसआई सुरेंद्र खत्री, हेड कांस्टेबल शैलेंद्र और महिला कॉन्स्टेबल मुकेश की टीम बनाकर जांच शुरू की। इसके बाद पंकज और ममता की कॉल डिटेल खंगाली गई तो उनकी लोकेशन हिमाचल प्रदेश के मंडी में मिली। पुलिस ने आरोपी पंकज और उसकी बहन ममता को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस दोनों पर मामला दर्ज कर आगे की पूछताछ कर रही है। 
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दिल्ली : अदालत ने पूछताछ के लिए नवनीत कालरा को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

दिल्ली पुलिस ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के आरोपी फरार नवनीत कालरा को रविवार देर रात गुरुग्राम के सोहना स्थित फार्म हाउस से गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली की साकेत कोर्ट में व्यवसायी कालरा की रिमांड को लेकर सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने पूछताछ के लिए कालरा को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। 



दिल्ली पुलिस ने अदालत से पांच दिन की हिरासत की मांग की थी। व्यवसायी के वकील विनीत मल्होत्रा ने पांच दिन की पुलिस हिरासत की मांग वाली दिल्ली पुलिस की याचिका का विरोध किया था। अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत को खारिज कर तीन दिन की हिरासत में भेज दिया। 

बता दें कि खान मार्केट स्थित ख्यातनाम रेस्तरां खान चाचा का मालिक कालरा गत 5 मई से फरार था। पुलिस उसकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही थी। कालरा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। दक्षिण जिला पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद कालरा को अपराध शाखा के हवाले कर दिया। 

दक्षिण जिला पुलिस ने कालरा के खिलाफ 4 मई को मामला दर्ज किया था। इससे पहले पुलिस ने उसके मैनेजर रितेश व दूसरे कारोबारी गौरव सहित चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने छह मई को लोदी कॅालोनी स्थित रेस्तरां-बार से 419 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर बरामद किए थे। इसके बाद 7 मई को खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्तरां और टाउन हॉल रेस्तरां में छापा मारकर105 कन्संट्रेटर बरामद किए। जांच में पता चला कि तीनों ही रेस्तरां का मालिक नवनीत कालरा है। इस पूरे मामले में पुलिस को उसकी तलाश  थी। 

जांच के लिए मामला दक्षिण जिला पुलिस से अपराध शाखा को सौंप दिया गया था। अपराध शाखा समेत दक्षिण जिला पुलिस की कई टीमें आरोपी की तलाश कर रही थी। पुलिस को रविवार देर रात सूचना मिली थी कि नवनीत कालरा सोहना में करण की खेड़ली नामक जगह पर स्थित फॉर्म हाउस में छिपा है। इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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सागर हत्याकांड: सुशील पहलवान पर एक लाख का इनाम, तलाश में लगातार दबिश दे रही दिल्ली पुलिस

छत्रसाल स्टेडियम में सागर धनकड़ की हत्या में फरार ओलंपियन सुशील पहलवान को पुलिस ने इनामी घोषित कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने सुशील पहलवान पर एक लाख रुपये का इनाम तय किया है। वहीं, उसके साथी व फिजिकल एजूकेशन ट्रेनर अजय कुमार पर 50 हजार रुपये का इनाम है। 

दूसरी तरफ पुलिस आरोपी की तलाश में दिल्ली एनसीआर में दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुशील के लिए सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। इनाम घोषित करने के बाद आरोपी तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अजय ट्रेनर ही नहीं, सुशील का गहरा दोस्त भी है। आशंका इसी बात की ज्यादा है कि अजय ही सुशील के छिपने में मदद कर रहा है। इसलिए दोनों पर एक साथ इनाम घोषित किया गया है। इससे अब दोनों के बचने के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। पुलिस दिल्ली-एनसीआर में अलग-अलग जगहों पर छापा मार रही है। हालांकि, अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। 

दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि बचने के सभी रास्ते बंद होने के बाद संभव है कि सुशील आत्मसमर्पण कर दें। इस लिहाज से अगले एक-दो दिन उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस बीच वह पुलिस के सामने सरेंडर कर दे। पुलिस का कहना है कि सुशील के दर्जन भर ठिकानों पर छापेमारी की गई है। ऐसे में उसका जोर इसी बात पर है कि वह सुशील को आत्मसमर्पण का मौका न दे। इसकी जगह वह गिरफ्तार करने में कामयाब हो जाए।
 
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हाईकोर्ट: दवा इकट्ठा करना नेताओं का काम नहीं, राजनीतिक फायदे के लिए न हो जमाखोरी

दिल्ली हाईकोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल उपकरणों और दवाइयों की जमाखोरी को लेकर आज सुनवाई हुई। इस दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि कोरोना के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाई को जमा करने का काम राजनेताओं का नहीं है। नेताओं द्वारा दवा  बांटने के मामले में कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए दवाइयों की जमाखोरी ठीक बात नहीं है, ऐसा न हो।  

कोर्ट ने नेताओं को निर्देश दिया है कि अगर आप भला करना चाहते हैं तो जिन दवाइयों की जमाखोरी की है, उसे सरकारी अस्पतालों में वितरण के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को सौंप दें। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आपसे दवाइयों की जमाखोरी की उचित जांच करने की उम्मीद है। साथ ही कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत ने पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वह लगाए कि नेता कहां से दवा लाकर इकट्ठा कर रहे हैं और साथ ही इस मामले की सही जांच करें।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ऐसा बताया गया है कि ये दवाएं जनता की भलाई के लिए खरीदी गईं हैं, न कि सियासी फायदे के लिए। इसलिए नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे कोविड-19 दवाओं के अपने भंडार दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) को सौंप देंगे, ताकि सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंदों के बीच इनका वितरण किया जा सके।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा पेश की गई उस स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की जो राष्ट्रीय राजधानी में रेमडेसिविर तथा कोविड-19 की अन्य दवाओं की नेताओं द्वारा जमाखोरी तथा वितरण के आरोपों के संबंध में की गई जांच से संबंधित थी।

कोर्ट ने पुलिस की उस स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताया जिसमें यूथ कांग्रेस के बीवी श्रीनीवास समेत नौ लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर की जमाखोरी के मामले में क्लीन चिट दी गई है। अदालत ने कहा हमें यह स्वीकार नहीं है। वह कैसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के ऑक्सीजन सिलिंडर खरीद सकते हैं। राजनीतिक पार्टियां महामारी को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि नेता बड़ी मात्रा में कोविड-19 की दवाओं को खरीद रहे हैं और उन्हें वितरित कर रहे हैं जबकि मरीज इन दवाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं। याचिका में इस बारे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।
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