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संजीवनी पर तकरार : केंद्र की रिपोर्ट से लेकर दिल्ली सरकार के जवाब तक, ऑक्सीजन संकट का जिम्मेदार कौन?

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Fri, 25 Jun 2021 12:21 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने एक रिपोर्ट में दिल्ली में ऑक्सीजन संकट के लिए केजरीवाल सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि दिल्ली सरकार का कहना है कि राज्य में मरीजों की संख्या एक तिहाई से भी कम हुई है, इसी वजह से ऑक्सीजन की मांग में कमी आई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से 24 अप्रैल को जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल में 25 कोरोना मरीजों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई थी। इसके बाद भी कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से कोरोना मरीजों की मौत की खबरें आईं। ऑक्सीजन की कमी को लेकर राजनीतिक बवंडर भी उठ खड़ा हुआ। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार पर कम ऑक्सीजन सप्लाई का आरोप लगाया। इसे लेकर दिल्ली सरकार हाईकोर्ट पहुंची और ज्यादा ऑक्सीजन की मांग की।



हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से किसी भी कीमत पर दिल्ली को पर्याप्त ऑक्सीजन की सप्लाई करने का आदेश दिया। आदेश का पालन न होने पर कोर्ट ने केंद्र के उच्चाधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई भी शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद केंद्र सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि केंद्रीय अधिकारियों को जेल भेजने से ऑक्सीजन की उपलब्धता नहीं सुधरेगी। इसके लिए केंद्र सरकार को मिल-जुलकर काम करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिल्ली को हर हाल में आवश्यक ऑक्सीजन देने का निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायलय के इस आदेश का असर भी हुआ और दिल्ली को पहली बार 6 मई को 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली। हालांकि, इसके बाद के दिनों में यह उपलब्धता 450-500 मीट्रिक टन के ही आसपास रही।

इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली ने अपने लिए 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की थी। लेकिन केंद्र ने दिल्ली की इस मांग को हमेशा गैर-वाजिब बताया और कहा कि वे जिस फार्मूला पर पूरे देश को ऑक्सीजन उपलब्ध करा रहे हैं, केजरीवाल सरकार उससे ज्यादा ऑक्सीजन मांग रही है। जबकि इतनी ऑक्सीजन की मांग दिल्ली में है ही नहीं। 

केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच ऑक्सीजन पर बढ़े इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक फार्मूला तय कर जानने की कोशिश भी कि थी कि दिल्ली या देश के किसी भी राज्य में ऑक्सीजन की वास्तविक आवश्यकता कितनी है और इसकी कितनी सप्लाई सुनिश्चित की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया। 

रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार पर सवाल
केंद्र सरकार ने इसी दौरान एक कमेटी का गठन कर दिल्ली में ऑक्सीजन की मांग की असली स्थिति जानने की कोशिश की थी।  64 अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद टीम द्वारा जारी हुई इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की कमी की कृत्रिम मांग पैदा की थी। जबकि इसी दौरान दिल्ली सरकार के पास न तो इतनी ऑक्सीजन की मांग थी और न ही उसके पास अतिरिक्त ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता ही थी।    
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लेकिन यह है सच्चाई
दरअसल, केंद्रीय टीम ने 64 अस्पतालों की जांच कर यह रिपोर्ट बनाई । जबकि जानकारी के अनुसार यह रिपोर्ट अस्पतालों की स्थिति पर आधारित थी। जबकि इसी दौरान दिल्ली में कोरोना के मामलों में भारी कमी आई है। 5 मई को दिल्ली में कोरोना के नए मामले 20,960 सहित कुल लगभग एक लाख संक्रमित थे। इनमें भारी संख्या में गंभीर रोगी भी शामिल थे, जिन्हें ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत थी। बाद में कोरोना रोगियों की संख्या कम होती गई।

6 मई को दिल्ली में 19,133 नए मामले सामने आए, 12 मई को 13,287, तेरह मई को 10,489 और 14 मई को यह संख्या केवल 8506 रह गई। जाहिर है जैसे-जैसे दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या में गिरावट आ रही है, दिल्ली में ऑक्सीजन की मांग में कमी आने लगी। 

यही कारण है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यहां तक कह दिया था कि अब दिल्ली को इतनी मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है। केंद्र को यह अतिरिक्त ऑक्सीजन अन्य राज्यों को सप्लाई करनी चाहिए, जिन्हें इसकी ज्यादा आवश्यकता है। हालांकि, केंद्र सरकार इसे दिल्ली सरकार की पोल खुलने के बाद बचाव की कार्रवाई बता रही है। 

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