प्रदूषण पर वार : ग्रेप पर सख्ती अगले सप्ताह से, दिल्ली की हवा ठीकठाक

किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 16 Oct 2021 06:05 AM IST

सार

फिलहाल संतोषजनक श्रेणी में है दिल्ली की हवा। इस बार की जोरदार बारिश से मिली है मदद। पराली के मोर्चे पर भी राहत। 
दिल्ली में लागू है ग्रेप...
दिल्ली में लागू है ग्रेप... - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

प्रदूषण से निपटने के लिए राजधानी में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू हो गया है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) संतोषजनक श्रेणी में रहने के कारण अभी इसके नियम सख्ती से लागू नहीं किए गए हैं। अगले सप्ताह ग्रेप पर एजेंसियों की बैठक होनी है। इसमें दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण वाली गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रेप सख्ती से लागू करने की योजना है।
विज्ञापन


सर्दी की शुरुआत से पहले ही हर साल 15 अक्तूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप लागू किया जाता है। यह 15 मार्च तक जारी रहता है। इस दौरान एजेंसियां दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलानी वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती हैं। नियमों की अवहेलना पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले सप्ताह संबंधित एजेंसियों की बैठक में ग्रेप सख्ती से लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।


इधर, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार मानसून जमकर बरसा है। इसका रिकॉर्ड 1169 मिमी है। इसका असर एक्यूआई पर पड़ा है। हवा अभी ज्यादा नहीं बिगड़ी है। अगले तीन दिन में भी दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश के आसार हैं। इससे हवा को साफ होने में मदद मिलेगी। नतीजतन पीएम10 व पीएम2.5 का स्तर संतोषजक श्रेणी में है। 

पराली जलाने की घटनाओं में कमी, राहत के आसार
पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई हैं।

शुक्रवार को केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता आयोग ने बताया, बीते एक माह में पराली जलाने की कुल 1,795 घटनाएं दर्ज हुई हैं जबकि पिछले साल इसी दौरान यह संख्या 4,854 थी।

एनसीआर और उससे सटे इलाकों पर नजर रखने वाले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रोटोकॉल पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के दौरान धान के अवशेष जलाने की घटनाएं पंजाब में 64.49 फीसदी, हरियाणा में 18.28 फीसदी और एनसीआर में स्थित उत्तर प्रदेश के आठ  जिलों में 47.61 फीसदी कम हुई हैं। वहीं पिछले साल बड़ी तादाद में पराली जलाई गई थी।

आयोग ने कहा, 14 अक्तूबर तक एक महीने की अवधि में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जिन 1,795 जगहों पर पराली जलाने की घटना सामने आई, प्रवर्तन एजेंसियों ने उनमें से 663 घटनास्थलों का निरीक्षण किया। इनमें से 252 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया।

पंजाब सबसे ऊपर
इस अवधि में पंजाब में पराली जलाने की 1,286 घटनाएं हुई हैं जबकि पिछले साल वहां इसी दौरान यह संख्या 4,216 थी। वहीं, हरियाणा में पिछले साल ऐसी 596 घटनाएं हुई थीं, जो इस साल घटकर 487 हो गईं। उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में पिछले साल 42 घटनाओं के मुकाबले इस बार 22 घटनाएं ही दर्ज की गईं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान के दो एनसीआर जिलों में पराली जलाने की कोई घटना सामने नहीं आई।

सीएक्यूएम का कहना है, आगामी कुछ हफ्तों में फसल कटाई चरम पर होगी और राज्य सरकारें पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम उठा रही हैं। फसल कटाई के दौरान वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए आयोग 15 सितंबर से पराली जलाने वाली जगहों पर सक्रियता से नजर रख रहा है। साथ ही हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के उपायुक्तों समेत अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें भी कर रहा है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00