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Digital Edition

दिल्ली: पूर्व सीबीआई अधिकारी राकेश अस्थाना बने दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर

सीबीआई के पूर्व निदेशक रहे राकेश अस्थाना को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। राकेश अस्थाना ने आज दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर जाकर पदभार ग्रहण किया। अस्थाना को यह जिम्मेदारी सेवानिवृत्ति से मात्र तीन दिन पहले ही सौंपी गई है।
 

गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं अस्थाना
गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक अस्थाना को तत्काल प्रभाव से अपना पद संभालने को कहा गया है।

31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे अस्थाना को कुछ दिन पहले ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अस्थाना अगले एक साल तक दिल्ली पुलिस के आयुक्त रहेंगे। 1984 बैच के आईपीएस अस्थाना सीबीआई के विशेष निदेशक रहे हैं।

उस दौरान उनका तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के साथ विवाद सुर्खियों में आया था। इस मामले में सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

कौन हैं राकेश अस्थाना?
राकेश अस्थाना झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1961 में रांची में हुआ था। उनके पिता एचके अस्थाना नेतरहाट स्कूल में अध्यापक थे। इसी स्कूल से अस्थाना ने शुरुआती पढ़ाई पूरी की है। गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद बिहार-झारखंड से उनका खासा लगाव रहा है। 

अस्थाना ने उच्च शिक्षा दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पूरी की है। उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज में इतिहास भी पढ़ाया है। लेकिन 1984 में यूपीएससी की परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बतौर आईपीएस अधिकारी गुजरात कैडर मिला। 
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delhi police commissioner rakesh asthana delhi police commissioner rakesh asthana

राहत : दिल्ली में ब्लैक फंगस के मरीज निजी अस्पतालों में करा सकेंगे निशुल्क ऑपरेशन

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों को अब निजी अस्पताल में भी निशुल्क ऑपरेशन कराने की सुविधा मिलेगी। पैनल वाले अस्पतालों में यह मरीज अपना इलाज करा सकेंगे। इस बाबत दिल्ली सरकार ने मंगलवार को आदेश जारी कर दिया है।    

आदेश के मुताबिक, ब्लैक फंगस(म्यूकोरमाइकोसिस) एक ऐसी बीमारी है जिसका समय पर इलाज होना जरूरी है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की अधिक संख्या के चलते कई बार सर्जरी की तारीख मिलने में समय लग जाता है, चूंकि ब्लैक फंगस का इलाज समय पर होना जरूरी है।

ऐेसे में सरकारी अस्पतालों में भर्ती जिन मरीजों को ऑपरेशन की तारीख सात दिन से आगे की मिलगी  उनको सर्जरी के लिए पैनल वाले निजी अस्पतालों में रेफर किया जा सकता है।  कैशलेस हेल्थ स्कीम के तहत  वह अपना ऑपरेशन निशुल्क करा सकते हैं। । यह सुविधा सिर्फ दिल्ली के लोगों को ही मिलेगी।

 कोरोना संक्रमित मरीजों में ब्लैक फंगस के चलते अब तक दिल्ली में 252 लोगों की मौत हो चुकी है।  अब तक 1734 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इनमें से 519 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जिनमें से करीब 300 से ज्यादा मरीजों को आंख या नाक की सर्जरी करानी पड़ी। 252 मरीजों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अभी भी दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों में 928 मरीजों का उपचार चल रहा है।
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विश्व हेपेटाइटिस दिवस आज : कोरोना काल में जरूरी है विशेष देखभाल, जल्द लगवाएं टीका

दिल्ली में कई मरीज हेपेटाइटिस बीमारी से पीड़ित हैं। जिन मरीजों को यह समस्या है और अगर उनको कोरोना का संक्रमण हो जाता है तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस के मरीजों को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। ऐसे मरीजों के लिए जरूरी है कि वह अपनी जीवनशैली सही करें और खानपान का विशेष ध्यान रखें। साथ ही इन मरीजों को जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन भी लगवा लेनी चाहिए।  

पीएसआरआई अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर दिनेश सिंघल ने बताया कि कोरोना से पीड़ित जो मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे उनमें लिवर और हाइपोप्रोटीनेमिया संबंधी जटिलताएं देखी गई थीं। इसके अलावा, पहले से हेपेटाइटिस से ग्रसित मरीजों में कोरोना निमोनिया के गंभीर परिणाम दिखाई दिए हैं। डॉ. सिंघल ने कहा कि कोरोना के कारण हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। 

यह देखा गया है कि जिन मरीजों को लिवर से जुड़ी समस्या पहले से है उनके लिए कोरोना जानलेवा बन गया है। आमतौर पर जितना ज्यादा गंभीर कोरोना का संक्रमण होता है, उसी गंभीरता से लिवर एंजाइम्स बढ़ने की संभावना होती है। कुछ लोगों में हल्के कोविड के साथ भी हेपेटाइटिस हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि हेपेटाइटिस के मरीजों को प्राथमिकता के तौर पर बिना देरी करे कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए, उनके लिए यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

आकाश अस्पताल के गैस्ट्रो विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर शरद मल्होत्रा ने कहा कि हेपेटाइटिस बी भारत में बहुत तेजी से फैलने वाली बीमारी है। यह दुनिया की लगभग 3 से 4% आबादी को अपनी चपेट में लिए हुए है। हालांकि भारत में हेपेटाइटिस सी के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस से पीड़ित ज्यादातर वे लोग हैं जो आईवी दवाओं का दुरुपयोग करते हैं, हेपेटाइटिस बी और सी से मौतें ज्यादा होती हैं क्योंकि इनसे लीवर में सिरोसिस और लीवर कैंसर होता है। 

हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए टीका आमतौर पर जन्म के समय दिया जाता है लेकिन यह टीका जिंदगी में कभी भी किसी भी समय लिया जा सकता है। हेपेटाइटिस वाले लोग सुरक्षित रूप से कोविड की वैक्सीन लगवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें किसी विशेष सावधानी या किसी दवा को बंद करने की आवश्यकता नहीं होती है। लीवर सिरोसिस वाले लोग वैक्सीन लगवाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। अच्छी जीवन शैली, स्वस्थ भोजन की आदतों और शराब से परहेज कर इस बीमारी को खत्म किया जा सकता है। 
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दिल्ली-एनसीआर में मानसून मेहरबान: बारिश का दौर जारी, माहौल में ठंडक

दिल्ली-एनसीआर में कल देर रात शुरू हुआ मानसूनी बरसात का सिलसिला अभी जारी है। रात भर रुक-रुक कर बारिश होती रही जिसका सिलसिला अभी थमा नहीं है। लगातार बारिश होने और हल्की हवाओं के कारण माहौल में ठंडक हो गई है। 

मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बारिश को लेकर जानकारी दी है। विभाग का कहना है कि फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, हिंडन एयर फोर्स स्टेशन, गाजियाबाद, इंदिरापुरम, छपरौला, नोएडा, दादरी और ग्रेटर नोएडा आदि में गरज के साथ बारिश होगी।  आपको बता दें कि जुलाई में कल तक 381 मिमी बारिश हुई, जो 18 साल में सर्वाधिक है। वर्ष 2003 के बाद यह पहला मौका है, जब इतनी अधिक बारिश हुई है।भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने बताया कि दिल्ली के लिए डाटा उपलब्ध कराने वाली सफदरजंग वेधशाला ने मंगलवार सुबह के मात्र तीन घंटे में 100 मिमी बारिश रिकॉर्ड की। यह जुलाई माह में 24 घंटे के दौरान आठ साल में सर्वाधिक वर्षा है। 


वर्ष 2013 में दिल्ली में 21 जुलाई को 123.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई थी। इस माह राजधानी में बारिश वाले 14 दिन दर्ज हुए हैं। मानसून 16 दिन की देरी से 13 जुलाई को दिल्ली पहुंचा था। मानसून की देरी ने 19 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। जबरदस्त बारिश के कारण दिल्ली के निचले इलाकों में पानी भर रहा है और लंबे यातायात जाम लग रहे हैं।

आईएमडी के मुताबिक, सफदरजंग वेधशाला ने 27 जुलाई तक 108 प्रतिशत ज्यादा 380.9 एमएम बारिश दर्ज की है, जबकि सामान्य बरसात 183.5 मिमी होती है। पूरे जुलाई माह में सामान्य तौर पर 210.6 मिमी बरसात होती है। पिछले साल जुलाई में 236.9, 2019 में 199.2, 2018 में 286.2, 2017 में 170.5, 2016 में 292.5 और 2015 में 235.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई थी। 2013 में 340.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई थी। अब तक का सर्वाधिक वर्षा जुलाई 2003 में 632.2 मिमी हुई थी।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटों में बारिश होने की वजह से तापमान में और कमी आएगी। इस कड़ी में अधिकतम तापमान 28 व न्यूनतम तापमान 2भ5 डिग्री सेल्सियस बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह बारिश की संभावना बताई है। 
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गांव की बात : दल्लूपुरा के आंगन में आबाद हुए दिल्ली और नोएडा, खुद किराएदारों के भरोसे

rain in delhi ncr
पूर्वी दिल्ली के दल्लूपुरा गांव ने दिल्ली और नोएडा दोनों को आबाद किया है। इस गांव ने अपनी 2000 बीघा खेती की जमीनें दिल्ली और नोएडा को दे दीं और अब पूरा गांव खुद किरायेदारों के भरोसे जीवनयापन करने को मजबूर है। मौजूदा समय में पूरा गांव बाजार में तब्दील हो गया है। किरायेदारों की सहूलियत के लिए स्थानीय लोगों ने घरों में दुकानें खोल ली हैं।

करीब 800 साल पुराना यह गांव गुर्जरों का है। दिल्ली के संस्थापक राजा अनंगपाल के लिए इस गांव के लोगों में अत्यधिक सम्मान है। गांव के लोग खुद को उनका वंशज मानते हैं। दल्लूपुरा दिल्ली में गुर्जरों के उन 24 गांवों में से एक है, जिनकी श्याम गिरी बाबा में सर्वाधिक आस्था है। दल्लूपुरा गांव का एक छोर हिंडन-यमुना नहर से सटा है, तो दूसरा छोर नोएडा सीमा से सटा है। दल्लूपुरा के निवासी शीशपाल बताते हैं कि पहले यह गांव ब्राह्मणों का था, लेकिन वे यहां से प्रयागराज चले गए। बाद में इस गांव में गुर्जरों ने डेरा डाला और यहीं के हो गए।

दलहन-तिलहन और गन्ना पैदा होता था
दल्लूपुरा में दलहन-तिलहन से लेकर गन्ने की भी खूब खेती होती थी। जगत सिंह बताते हैं कि नहर का किनारा होने के कारण यहां 10-12 फुट तक लंबे गन्ने होते थे। ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, मटर, गेहूं, सरसों और अरहर भी पैदा होता था, लेकिन गांव की आधी जमीनें पहले दिल्ली सरकार ने अधिग्रहीत कर लीं और 1980 तक बचे खेत नोएडा में चले गए।

दिल्ली जाने के लिए शाहदरा से मिलता था तांगा
दल्लूपुरा के बुजुर्ग करन सिंह ने बताया कि उनके बचपन में दिल्ली जाने के लिए कड़कड़डूमा के रास्ते पहले शाहदरा जाना पड़ता था, फिर वहां से दिल्ली के लिए इक्का या फिर तांगा मिलता था। शाहदरा तक करीब 12 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। लोहा पुल को पार करके दिल्ली जाते थे। 

दल्लूपुरा की जमीन पर दो बड़ी कॉलोनियां बसीं
दल्लूपुरा की जमीन पर आज दो बड़ी कॉलोनियां बस चुकी हैं। वसुंधरा एन्क्लेव और दुर्गा पार्क कॉलोनी के अलावा धर्मशिला अस्पताल, चिल्ला खेल परिसर दल्लूपुरा की जमीन पर बना है। गांव वालों को इस बात का मलाल है कि उनके गांव में बने खेल परिसर का नाम चिल्ला गांव के नाम पर आखिर क्यों रखा गया है।

जितना पुराना गांव, उतना पुराना पीपल का पेड़
दल्लूपुरा गांव में पीपल चौक पर पीपल का पेेड़ उतना ही पुराना है, जितना पुराना यह गांव है। जगत सिंह ने बताया कि आसपास कितनी बार लोगों के घर बने-बिगड़े, लेकिन पीपल को सुरक्षित रखा गया, जबकि गांव के प्राचीन खेड़ा देवर मंदिर का बीते साल जीर्णोद्धार कराया गया है। यह गांव के कुल देवता का मंदिर है। 

ग्रामीण बोले...
दिल्ली के गांव को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, ऐसी कोई सुविधा गांव के पास नहीं है, आज न ही गांव रहे और न शहर बन पाए।
- जगत सिंह

दल्लूपुरा के लोग कई साल से पानी की समस्या सेे जूझ रहे हैं। गांव में राजनीतिक लोगों की कमी नहीं है, लेकिन जल समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
- वेद प्रकाश, प्रधान

बाबूजी रतनपाल जिन्होंने गुर्जरों का इतिहास लिखा, वह दल्लूपुरा में ही पैदा हुए थे। गांव में आज भी उनके वंशज हैं, उनका बड़ा सम्मान है।
- करन सिंह

राजा अनंगपाल को हम अपना राजा मानते हैं, उनसे जुड़ी कहानियां आज भी बच्चों को सुनाई जाती हैं। 
- शीश पाल

हमारे बच्चे बेरोजगार घूम रहे हैं। गांव के अधिकतर घरों का खर्च किरायेदारों की बदौलत ही चल रहा है। 
- रनवीर

हिंडन-यमुना नहर का पानी इतना साफ होता था कि सिंचाई के साथ-साथ इसे पीने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। अब जरूरत भर पानी नहीं मिल पा रहा।
- अजब सिंह

बचपन में हम नहर में नहाने जाते थे, तो साथ में पानी भरकर घर भी लाते थे। नहर के पानी से ही भोजन बनता था।
- सिंह राज
 
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जिम्मेदारी: दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर बने राकेश अस्थाना, मोदी सरकार ने की नियुक्ति

गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक अस्थाना को तत्काल प्रभाव से अपना पद संभालने को कहा गया है। 

31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे अस्थाना को कुछ दिन पहले ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अस्थाना अगले एक साल तक दिल्ली पुलिस के आयुक्त रहेंगे। 1984 बैच के आईपीएस अस्थाना सीबीआई के विशेष निदेशक रहे हैं। 

उस दौरान उनका तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के साथ विवाद सुर्खियों में आया था। इस मामले में सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 

राकेश अस्थाना ने झारखंड के नेतरहाट विद्यालय से पढ़ाई की है। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना ने मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद रांची के सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई की थी। 

आईपीएस में चयन के बाद उन्हें गुजरात कैडर मिला था। आपको बता दें कि सीबीआई में रहते हुए तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा के साथ हुए विवाद के बाद राकेश अस्थाना काफी चर्चा में रहे थे। हालांकि विवाद के बाद उनका तबादला सीबीआई से कर दिया गया था। 


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Delhi News Today 28 July : दिल्ली समाचार | सुनिए शहर की ताजातरीन खबरें

केजरीवाल बोले: दिल्ली सरकार इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए भेजेगी केवल स्वास्थ्यकर्मियों के नाम, जनता करेगी चुनाव

दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान में बड़ा फैसला लिया है। इस बार सरकार देश के सर्वोच्च पुरस्कार के लिए सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ही केंद्र सरकार से आग्रह करेगी। इतना ही नहीं आम जनता से पूछ कर ही इस सम्मान के लिए आग्रह किया जाएगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस बार पद्म अवार्ड के लिए केवल डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों के नाम केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पद्मश्री अवार्ड के लिए जिनके नाम केंद्र को भेजेगी, वह नाम दिल्ली की जनता बताएगी। 

दिल्ली का कोई भी नागरिक [email protected] पर पूरी जानकारी के साथ किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी का नाम 15 अगस्त तक भेज सकता है। इसे लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में सर्च एंड स्क्रीनिंग कमेटी भी बनाई गई है। स्क्रीनिंग के बाद वे नाम 15 सितंबर से पहले केंद्र को भेजा जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि दिल्ली सरकार पूरे देश में अकेली सरकार है, जिसने कोरोना काल में लोगों की सेवा करते-करते शहीद हुए स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी है। अब यह समय सभी डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान करने का है कि हम सब उनके कितने शुक्रगुजार हैं?

पूरा देश डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों की कर्जदार है: अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री ने डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कोरोना काल में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्यकर्मियों और पैरामेडिकल ने लोगों की बहुत सेवा की है। अपनी जान को दांव पर लगाकर इन्होंने लोगों की जान बचाई है। मैं कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को जानता हूं जो कई-कई दिनों तक अपने घर नहीं गए। उन लोगों ने रात-दिन, 24 घंटे मेहनत करके हमलोगों की जान बचाई। 

कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को मैं जानता हूं, जो लोगों की सेवा करते-करते उनको खुद कोरोना हो गया और वे दुनिया छोड़कर चले गए, शहीद हो गए। पूरा देश और सारी इंसानियत इनकी कर्जदार है। इनका जितना शुक्रिया अदा करें, उतना कम है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हमारे पास इनका शुक्रिया अदा करने के लिए शब्द नहीं है।
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