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ICSE, ISC Result 2021: 10वीं और 12वीं का रिजल्ट जारी, लड़कियों ने फिर मारी बाजी, ऐसे देखें

काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के 10वीं (आईसीएसई) व 12वीं (आईएससी) के नतीजे घोषित हो गए हैं। नतीजों को सीआईएससीई की वेबसाइट से देखा जा सकता है। 

सीआईएससीई का दसवीं का पास परसेंटेज 99.98 है, बाहरवीं का 99.76 प्रतिशत। इस बार दसवीं में लड़के और लड़कियों का पास प्रतिशत बराबर रहा। वहीं बाहरवीं में लड़कियां फिर लड़कों से आगे रही हैं, लड़कियों का पास परसेंटेज 99.86 रहा है। वहीं लड़कों का 99.66 प्रतिशत रहा है। 

उत्तर प्रदेश का दसवीं का पास परसेंटेज 99.95 और बाहरवीं का 99.71 फीसदी रहा। वहीं उत्तराखंड का दसवीं का 99.96 और बाहरवीं का 99.85 फीसदी रहा। 

भारत में दसवीं का रिजल्ट दक्षिण क्षेत्र में 100 फीसदी रहा है। जबकि बाहरवीं का 99.91 प्रतिशत रहा है। बता दें कि इस साल मैरिज लिस्ट नहीं बनेगी। बोर्ड ने कोरोना के मद्देनजर यह फैसला लिया है।

बोर्ड की वेबसाइट
www.cisce.org और  www.results.cisce.org पर बोर्ड ने रिजल्ट जारी कर दिया है। नतीजों को एसएमएस  से भी प्राप्त किया जा सकता है। मालूम हो कि इस बार कोरोना महामारी के कारण 10वीं व 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। परीक्षा ना होने के कारण नतीजे विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर जारी किए गए हैं। 

सीआईएससीई बोर्ड से संबद्धित स्कूल नतीजों को बोर्ड के कैरियर पोर्टल पर जाकर देख सकते हैं। इसके लिए स्कूलों को पोर्टल पर जाकर लॉग इन करना होगा। एसएमएस से रिजल्ट प्राप्त करने के लिए दसवीं के छात्र को आईसीएसई लिखकर अपना सात अंकों का यूनिक आईडी नंबर टाइप कर इस नंबर पर 09248082883 पर भेजना होगा। 

इसी तरह 12 वीं के छात्रों को रिजल्ट प्राप्त करने के लिए आईएससी अपना सात अंकों का यूनिक आईडी टाइप कर इस नंबर पर 09248082883 पर भेजना होगा।  ... और पढ़ें
फाइल फोटो फाइल फोटो

किसान आंदोलन : सड़क पर लगी संसद में 'कृषि मंत्री' को देना पड़ा इस्तीफा, नए कानूनों पर घिर गए थे 

जंतर-मंतर पर दूसरे दिन 200 किसान प्रतिनिधियों की संसद में जमकर हंगामा हुआ। सरकार के पैरोकार के तौर पर बतौर कृषि मंत्री चुने गए किसान नेता रवनीत सिंह बराड़ विपक्ष के सवालों से घिरे रहे। जवाब देने में नाकाम रहने पर आखिर में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उधर, लगातार दूसरे दिन किसान संसद में मंडी कानून पर चर्चा जारी रही।

इस दौरान किसान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के कानून को सिरे से खारिज कर दिया। किसानों ने केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के बयानों की भी आलोचना की है। आखिर में शाम को किसान संसद का सत्र सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सोमवार की किसान संसद में सिर्फ महिलाएं हिस्सा बनेंगी। 200 महिला किसान प्रतिनिधियों पर सत्र के संचालन से लेकर हर गतिविधि तक की जिम्मेेदारी होगी।

सिंघु बॉर्डर से जंतर-मंतर पहुंचे किसानों की करीब 11.20 बजे संसद लगी। सत्र की शुरुआत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के साथ कृषि कानूनों पर पक्ष रखने के लिए अपने बीच से कृषि मंत्री का भी चुनाव किया। किसानों ने जैसे ही दोगुनी आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी कानूनों पर सवाल उठाए, कृषि मंत्री को इसका जवाब नहीं देते बन रहा था। पूरे सत्र में वह किसानों के सवालों से घिरे रहे। इससे नाराजगी जाहिर करते हुए किसानों ने नारेबाजी की। पहला सत्र इसी माहौल में चलता रहा।

लंच ब्रेक के बाद करीब 2:30 बजे शुरू हुए दूसरे सत्र में भी हालात नहीं बदले। किसान प्रतिनिधि अपने सवालों का माकूल जवाब न मिलने की बात करते हुए हंगामा करते दिखे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बार-बार समझाने के बाद भी शोरगुुल नहीं थमा। इस सबके बीच सवालों से घिरे मंत्री जवाब नहीं दे सके और पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह किसानों के सामने निरुत्तर हैं। इसके बाद सभी सदस्यों ने तालियां बजाते हुए अपनी जीत पर खुशियां जताई। इसके बाद ही किसानों की संसद की कार्यवाही हो सकी। दिन के आखिरी और तीसरे सत्र में भी मंडी कानून पर चर्चा हुई। आखिर में करीब 5 बजे किसान संसद का सत्र सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

एक दिन भी नहीं बचा सके अपना पद
पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रवनीत सिंह बराड़ ने कहा कि एक दिन के लिए किसान संसद में मंत्री बनाए जाने पर बेहद खुश हुए, लेकिन सदस्यों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। सदस्य बार-बार दोहरा रहे थे कि न तो उनकी आय दोगुना हुई है और न ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कोई कानून बनाया। मंडी कानूनों पर भी सदस्यों ने असहमती जताई और मंत्री से इस्तीफे की मांग पर अड़ गए।

90 फीसदी सदस्य करते रहे विरोध 
सत्र के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने बताया कि मंडी कानूनों पर बिल लाएंगे। सदस्यों की तरफ से लगातार इसका विरोध किया जा रहा है। सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, लेकिन मंडी कानून पर बहस छिड़ते ही सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इससे किसान संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई। सत्र के दौरान 90 फीसदी सदस्यों ने कानून पर एतराज जताया। तीन अलग-अलग सत्रों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी छह सदस्यों को सौंपी गई थी।
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अश्लील सामग्री परोसने का मामला : न ट्विटर ने दिया जवाब और न दिल्ली पुलिस खोल पाई लिंक

ट्विटर पर बच्चों को लेकर अश्लील सामग्री परोसने के मामले में दर्ज मामले की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। करीब 20 दिन बाद भी ट्विटर ने दिल्ली पुलिस के पत्र का जवाब नहीं दिया है। दिल्ली पुलिस अश्लील सामग्री ट्विटर पर डालने वाले लिंक को भी नहीं खोल पा रही है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के पुलिस अधिकारी ट्विटर के जवाब का इंकार कर रहे हैं ताकि ट्विटर पर अश्लील सामग्री डालने वाले का पता लगाया जा सके।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की शिकायत के बाद कथित तौर पर अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक पहुंच की अनुमति देने के लिए ट्विटर के खिलाफ दो जुलाई को एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आईपीसी, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम और आईटी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। 

बताया जा रहा है कि करीब 10 लिंक के जरिए ट्विटर पर बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री डाली गई थी। ये सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। साइबर सेल के डीसीपी अन्येश रॉय ने बताया कि जिन लिंक से ट्विटर पर अश्लील सामग्री डाली गई थी वह खुल नहीं रहे हैं। ऐसे में लिंक डालने वाले की पहचान नहीं हो पा रही है। 

उन्होंने बताया कि लिंक डालने वालों का आईपी एड्रेस पता करने के लिए ट्विटर को पत्र लिखा है, मगर अभी तक ट्विटर ने पत्र का जवाब नहीं दिया है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल इस मामले में ट्विटर के अधिकारियों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुला सकती है।

दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार नए कानून के तहत ट्विटर पर कोई भी सामग्री या लिंक डालने से पहले ट्विटर को उसे फिल्टर करना चाहिए थे। मगर ट्विटर ने ऐसा नहीं किया। इसके लिए ट्विटर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने ट्विटर पर बच्चों से संबंधित अश्लील लिंक डाले थे।
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बर्ड फ्लू से बच्चे की मौत : पशुपालन व डेयरी विभाग ने किया जांच कमेटी का गठन

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दिल्ली एम्स में बर्ड फ्लू से गुड़गांव के बच्चे की मौत के मामले में केंद्रीय पशुपालन व डेयरी विभाग ने जांच कमेटी का गठन किया है। विभाग ने महामारी विज्ञान के आधार पर इस मामले की जांच के लिए संयुक्त आयुक्त डॉ. एच. आर. खन्ना की निगरानी में डॉ. विजय तेवतिया और एनसीडीसी के डॉ. रोवंती एन बागे को जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस टीम में भोपाल स्थित आईसीएआर के प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे। 

उधर दिल्ली एम्स ने बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया है। एम्स के बालरोग विभाग की डॉ. रचना सेठ का कहना है कि एक्यूट ल्यूकेमिया के चलते बच्चे की मौत हुई है। बच्चा कीमोथैरेपी पर चल रहा था। उसकी हालत खराब होने पर एम्स लाया गया था जहां उसे आईसीयू और फिर वेंटिलेटर पर रखा गया। इसी दौरान बच्चे में उच्च बुखार के चलते सैंपल की जांच पुणे स्थित लैब भेजी गई जहां इंन्फ्लूएंजा ए और बी की पुष्टि हुई। 

अमर उजाला ने 21 जुलाई को प्रकाशित की खबर में एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के हवाले से यह जानकारी दी थी कि बच्चे को एक्यूट ल्यूकेमिया कैंसर के चलते भर्ती किया था लेकिन बाद में उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई। 

बहरहाल इस मामले में उच्च स्तरीय जांच शुरू हो चुकी है। नई दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने एक दिन पहले बयान जारी किया था कि परिवार को आइसोलेट कर दिया है। एम्स में भर्ती अन्य बच्चों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। परिवार में भी कोई सदस्य संक्रमित नहीं मिला है। साथ ही गुड़गांव स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के 10 किलोमीटर के क्षेत्र को सर्विलांस पर लिया है लेकिन अब तक किसी भी तरह के संक्रमण का कोई संदिग्ध मामला भी नहीं मिला है। 
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मनी लांड्रिंग : एक हजार करोड़ के मामले में चीनी नागरिक को जमानत

अदालत ने एक हजार रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में आरोपी चीनी नागरिक को जमानत प्रदान की है। अदालत ने आरोपी को गूगल मैप पर पिन ड्रॉप करने का निर्देश दिया है ताकि जांच एजेंसी को उसकी लोकेशन की जानकारी रहे। 

पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने आरोपी लू सांग को जमानत प्रदान करते हुए इस बात पर गौर किया कि मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय चलेगा। वहीं आरोपी के भागने की भी कोई शंका नहीं है। 

अदालत ने आरोपी को बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाने और पासपोर्ट कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा आरोपी को जांच में सहयोग करने और केस की हर तारीख पर पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में अपराध की कमाई का स्रोत पता नहीं चल पाया है। 

कोर्ट के समक्ष आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि ईडी फंड का स्रोत पता लगाने और ये अपराध से हुई कमाई है, ये तय करने में नाकाम रही है। हालांकि मामले में जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में आरोपी को फिलहाल हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। 

अदालत ने हिरासत की अवधि, उसके फरार न होने की आशंका और जांच के कारण केस की सुनवाई में लगने वाले समय के मद्देनजर आरोपी लू सांग को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये का निजी मुचलका व इतनी ही राशि के दो जमानती पेश करने की शर्त पर ये राहत प्रदान की है। 

ईडी के अनुसार आरोपी को 15 जनवरी को अपने व्यावसायिक साझेदार ली झेंगुआ के साथ मिलकर कथित रूप से मनी लांड्रिंग करने के आरोप में 15 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर मैसर्स सुनहारा बर्ड प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई जिसका इस्तेमाल मनी लांड्रिंग के लिए किया गया। 
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दिल्ली दंगा: पुलिस पर पिस्तौल तानने वाला शाहरुख पठान ने अदालत से मांगी जमानत

आस्था: संकट कटे मिटे सब पीरा...हनुमान चालीसा पढ़ती रही महिला, डॉक्टर करते रहे ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा... हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए एक महिला ने एम्स में अपने ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी कराई है। ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया के दौरान वह होश में थी। उसके साथ अस्पताल के न्यूरो विभाग के डॉक्टर भी चालीसा का पाठ कर रहे थे। महिला को चार दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया गया था। शनिवार को उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी।

एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के शाहदरा इलाके की रहने वाली 24 साल की राधिका (बदला नाम) के सिर के विभिन्न हिस्सों में ट्यूमर था। इसके लिए उसकी सर्जरी की गई। सबसे पहले उसके सिर के ऊपरी हिस्से की नस को सुन्न कर दिया गया, ताकि चीरा लगाने पर दर्द न हो। 

इसके बाद सिर के अंदर नसों की अलग-अलग रंगों से र्कोंडग की गई, जिसे ट्रेक्टोग्राफी कहते हैं। इस आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन करने में एक तो ब्रेन को कम से कम नुकसान होता है। डॉक्टर दीपक ने बताया कि सिर में दर्द नहीं होता है।  ऐसे में मरीज को बिना बेहोश किए भी  सर्जरी की जा सकती है। 






कई बार सामान्य ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है, लेकिन इससे सर्जरी के दौरान उसके मस्तिष्क के स्पीच एरिया पर पड़ रहे प्रभाव की निगरानी नहीं की जा सकती। लेकिन इस तकनीक (अवेक ब्रेन सर्जरी)  से मरीज की बोलने की क्षमता को सर्जरी के दौरान बार-बार जांचा जा सकता है। इसी क्षमता को जांचने के लिए हम चाहते थे कि मरीज से कुछ बुलवाया जाए। ऐसे में धार्मिक लोगों के लिए हनुमान चालीसा से बेहतर और क्या हो सकता था।  
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