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12वीं की निजी-कंपार्टमेंट परीक्षा: 1152 छात्रों ने की रद्द करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ललित फुलारा Updated Sat, 19 Jun 2021 06:47 PM IST

सार

  • 1,152 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए सीबीएसई को फिजिकल मोड़ में बारहवीं कक्षा की निजी / कंपार्टमेंट परीक्षा को रद्द करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। 
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विद्यार्थी (फाइल फोटो)
विद्यार्थी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

1,152 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए सीबीएसई को फिजिकल मोड़ में बारहवीं कक्षा की निजी / कंपार्टमेंट परीक्षा को रद्द करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। छात्रों ने शिक्षा बोर्ड द्वारा अपनाए गए 'दोहरे और मनमाने' दृष्टिकोण पर सवाल उठाया है।  छात्रों ने समानता सुनिश्चित करने के लिए नियमित छात्रों के लिए सीबीएसई द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन मानदंडों के अनुरूप ही उनका मूल्यांकन किया जाए और समयबद्ध तरीके से परिणाम जारी किया जाए। याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई बोर्ड द्वारा 12वीं कक्षा के छात्रों के लिये  निजी/कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित करने के निर्णय से लाखों छात्रों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा क्योंकि वे फिजिकल मोड परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर होंगे। जो सीधे तौर पर संविधान द्वारा प्रदत उनके 'जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार' का उल्लंघन है। 
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छात्रों ने वकील अभिषेक चौधरी के माध्यम से सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में एक लंबित मामले में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है।  सुप्रीम कोर्ट  21 जून को उनकी याचिका पर सुनवाई कर सकता है। सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने गत बृहस्पतिवार को 12वीं कक्षा की परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के मूल्यांकन के लिए सीबीएसई और आईसीएसई द्वारा प्रस्तावित एक फॉर्मूले को सैद्धांतिक रूप से पहले ही मंजूरी दे दी है।

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अपनी याचिका में  निजी और कम्पार्टमेंट के छात्रों ने तर्क दिया कि देश में मौजूदा कोविड -19 स्थिति के कारण यह निर्णायक रूप से नहीं कहा जा सकता है कि फिजिकल मोड में परीक्षाओं के संचालन के लिए कब अनुकूल स्तिथि होगी। इसके अलावा यदि उनकी परीक्षाओं में अधिक देरी होती है तो वे न केवल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आवेदन करने और प्रवेश लेने का अवसर खो देंगे बल्कि उन्हें शिक्षा के मौलिक अधिकार से भी वंचित कर दिया जाएगा।

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