सीबीएसई: वर्ष 1975 से 2004 तक की बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट एक क्लिक पर मिलेगी, डिजिटल होने जा रहे दस्तावेज

एजूकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 14 Oct 2021 06:00 AM IST

सार

सीबीएसई जल्द ही वर्ष 1975 से 2004 तक के परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल करने जा रहा है। ऐसे लोगों को यह सब अब एक क्लिक पर ही घर बैठे प्राप्त हो जाएगा। अभी तक वर्ष 2004 से 2021 तक का दसवीं-बारहवीं का रिजल्ट डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है।
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विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से वर्ष 2004 से पहले दसवीं व बारहवीं की परीक्षा दे चुके पूर्व छात्रों को अब उनकी मार्क शीट, माइग्रेेशन सर्टिफिकेट व पास सर्टिफिकेट के लिए बोर्ड के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ऐसे लोगों को यह सब अब एक क्लिक पर ही घर बैठे प्राप्त हो जाएगा।
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सीबीएसई वर्ष 1975 से 2004 तक के रिकॉर्ड को डिजिटल करने जा रहा
सीबीएसई जल्द ही वर्ष 1975 से 2004 तक के परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल करने जा रहा है। अभी तक वर्ष 2004 से 2021 तक का दसवीं-बारहवीं का रिजल्ट डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है।


अंक पत्र और दस्तावेज प्राप्त करने में समय की होगी बचत
सीबीएसई से परीक्षा पास कर चुके पूर्व छात्रों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि उन्हें नौकरी या अन्य किसी कार्य के लिए दस्तावेज की जरूरत होती है, लेकिन खो जाने के कारण वह दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। ऐसे में उन्हें बोर्ड से डुप्लीकेट दस्तावेज निकलवानेे पड़ते हैं। डुप्लीकेट दस्तावेेज प्राप्त करने में समय अधिक लगता है।

ऐसे मेें बोर्ड ने छात्रों के हित में 1975 से 2004 तक के परीक्षा संबंधी दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह सब डिजिलॉकर में उपलब्ध करा दिए जाएंगे। साथ ही परीक्षा परिणाम संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रहें, इसके लिए बोर्ड की ओर से एकेडेमिक ब्लॉक चेन तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।

सीबीएसई के आईटी व प्रोजेक्ट निदेशक अंतरिक्ष जौहरी के मुताबिक 2004 से 2021 तक का रिजल्ट का डाटा ऑनलाइन उपलब्ध का दिया गया है। अब 2004 से पहले के डेटा को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। जल्द सेे जल्द यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। वर्ष 1975 के रिकॉर्ड डिजिलॉकर में उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

बोर्ड ने 2004 में डिजिटल अकादमिक रिपोजिटरी (परिणाम मंजूषा) तैयार की थी। जिसमें दसवीं से बारहवीं तक के रिजल्ट डिजिटल रूप में हैं। अब 1975 के बाद दस्तावेज को डिजिटल करने का कार्य प्रगति पर है और एक वर्ष के समय में इसे रिपोजिटरी में जोड़ दिया जाएगा।

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