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JEE Advanced 2021: आईआईटी में पढ़ रहे छात्र नहीं दे सकेंगे जेईई एडवांस, सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सोनिया चौहान Updated Fri, 01 Oct 2021 05:03 PM IST

सार

JEE Advanced 2021: जेईई एडवांस 2021 के लिए परीक्षा कार्यक्रम 3 अक्तूबर 2021 को आयोजित किया जाएगा। बता दें कि एससी ने इस शर्त की वैधता को बरकरार रखा है कि आईआईटी में शामिल होने वाले छात्र परीक्षा के लिए उपस्थित नहीं हो सकते।
र्जईई एडवांस परीक्षा 2021
र्जईई एडवांस परीक्षा 2021 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

संयुक्त प्रवेश परीक्षा, जेईई एडवांस 3 अक्टूबर, 2021 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी खड़गपुर द्वारा आयोजित की जाने वाली है। शुक्रवार को परीक्षा से संबंधित एक और मामले की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त की वैधता को बरकरार रखा है कि जो छात्र पहले ही आईआईटी में शामिल हो चुके हैं, वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने यह फैसला सुनाया  है।  

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शुक्रवार को बेंच ने मामले की सुनवाई की और सर्वसम्मति के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आईआईटी में पढ़ रहे छात्रों को जेईई एडवांस में न शामिल होने देने को मनमाना और भेदभावपूर्ण प्रकृति का बताते हुए इस शर्त को हटा दिया था।


यह था पूरा मामला
जेईई एडवांस 2021 के लिए एक छात्र के आवेदन को खारिज किए जाने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। इस अस्वीकृति का आधार यह था कि छात्र ने पहले ही 2020 में आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश प्राप्त कर लिया था। इस स्थिति का उल्लेख जेईई एडवांस 2021 सूचना विवरणिका के मानदंड 5 में किया गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था कि गैर-आईआईटी के एक छात्र के परीक्षा देने पर कोई रोक नहीं है लेकिन आईआईटी के एक छात्र को परीक्षा देने पर रोक है। ऐसी स्थिति स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण थी क्योंकि छात्रों को निष्पक्ष और समान अवसर नहीं मिल रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
उच्च न्यायालय के इस फैसले को रद्द करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह मानदंड वैध और उचित था क्योंकि इसका उद्देश्य 'आईआईटी सीटों के मूल्यवान सार्वजनिक संसाधन को संरक्षित करना' है। इस वजह से IIT और गैर-IIT को वर्गीकृत करने के पीछे का पूरा विचार भी मान्य और आवश्यक है। इसने आगे कहा कि सभी अकादमिक मामलों को विषय-विशेषज्ञों पर छोड़ दिया जाना चाहिए और कानूनी दुनिया का हस्तक्षेप हर संभव तरीके से कम से कम होना चाहिए।

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