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सेमेस्टर सिस्टम पर साल में दो बार बोर्ड परीक्षा, जानें CBSE ने क्या कहा

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Sat, 21 Sep 2019 11:52 AM IST

सार

  • नई शिक्षा नीति पर आज होगी कैब की विशेष बैठक 
  • कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर होगा अंतिम मंथन
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विस्तार

बोर्ड परीक्षा के तनाव और असफल छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर लगाम के लिए सेमेस्टर सिस्टम की तर्ज पर बोर्ड परीक्षा साल में दो बार कराई जा सकती है। इससे 10वीं और 12वीं के छात्रों को एक-एक साल के कोर्स की जगह केवल छह-छह महीने के कोर्स की परीक्षा देनी होगी। यह जल्द घोषित होने वाली नई शिक्षा नीति का अहम बिंदु है। 



ये सिफारिश इसरो के पूर्व प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने नई शिक्षा नीति में की है। आज केंद्र और राज्य सरकारों के शिक्षा मंत्री इस शिक्षा नीति को अंतिम रूप देंगे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने साल में दो बार परीक्षा कराने के बारे में क्या कहा है, यह हम आपको आगे बता रहे हैं।


एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई शिक्षा नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए कैब की विशेष बैठक बुलाई गई है। इससे पहले जुलाई में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु समेत 25 राज्यों ने इस पर अपनी सहमति दी थी। हालांकि मसौदे पर कुछ आपत्तियों व देशभर से मिले करीब दो लाख सुझावों के आधार पर भी कुछ बदलाव किए गए हैं। 

नई शिक्षा नीति में ये हैं समिति की अहम सिफारिशें

  • शिक्षा का अधिकार कानून को पहली की बजाय नर्सरी और आठवीं की बजाय 12वीं कक्षा तक विस्तार।
  • सेमेस्टर परीक्षा छात्रों की तैयारी के आधार पर लेने सुझाव दिया गया है। सेमेस्टर परीक्षा में 24 से अधिक विषय न हों।
  • एक बार असफल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौके मिलने चाहिए।
  • बच्चों को कुपोषण से बचाने और शिक्षा से जोड़ने के लिए मिड-डे मील में लंच के बाद नाश्ता देना।
  • यूजीसी (UGC) व एआईसीटीई (AICTE) भंग कर हायर एजूकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HCI) एक्ट 2018 बनाना।
  • सभी प्रवेश व प्रतियोगी परीक्षाएं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से कंप्यूटर आधारित करवाना।
  • शिक्षा सुधार व योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में न्यू एपेक्स एजुकेशनल बॉडी बनाना।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करना।
  • स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी राज्यों की शिक्षा, गुणवत्ता, फीस, शिक्षकों की निगरानी करेगी।

मेडिकल

  • गुणवत्ता के लिए एमबीबीएस, डेंटल एजुकेशन में एग्जिट एग्जाम की सिफारिश। 
  • छह सौ जिलों के अस्पतालों में मेडिकल पढ़ाई शुरू करवाई जाए। यहां मेडिसिन, डेंटल, नर्सिंग, आयुष आदि के विशेषज्ञ रखे जाएं।

पैरा टीचर

  • गुणवत्ता की शुरुआत स्कूली शिक्षा से करने को हर पांच साल बाद समीक्षा की जाए। 
  • वर्ष 2022 के बाद पैरा टीचर नहीं रखे जाएं। 
  • शिक्षकों की भर्ती सिर्फ नियमित होगी। 
  • सेवानिवृत्त से पांच साल पहले शिक्षकों की नियुक्ति का काम केंद्र और राज्य शुरू कर दें।

दो बार बोर्ड परीक्षा के बारे में CBSE ने क्या कहा?

नई शिक्षा नीति में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराए जाने के प्रस्ताव पर सीबीएसई ने आपत्ति जताई है। बोर्ड ने अपने फीडबैक में कहा है कि इसे लागू करना संभव नहीं हो सकेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, बोर्ड को मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने में 6 से 8 महीने का समय लगता है। 

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