5G टेक्नोलॉजी : जूही चावला पर लगा 20 लाख का जुर्माना, कोर्ट ने जताई नाराजगी

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: विजयाश्री गौर Updated Fri, 04 Jun 2021 05:28 PM IST

सार

  • 5G टेक्नोलॉजी के खिलाफ जूही चावला की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया खारिज
  • जूही चावला पर लगा 20 लाख रुपये का जुर्माना
  • कोर्ट ने मुकदमे को बताया मीडिया पब्लिसिटी
जूही चावला
जूही चावला - फोटो : जूही चावला
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विस्तार

बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला पिछले काफी समय से 5G नेटवर्किंग के खिलाफ याचिका को लेकर सुर्खियों में थीं। अब हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए अभिनेत्री को झटका दिया है। 5G टेक्नोलॉजी  के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट ने जूही चावला की याचिका खारिज करते हुए उन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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बता दें कि याचिका में दावा किया गया था कि 5G वायरलेस तकनीक योजनाओं से इंसानों, पशु पक्षियों और वातावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा है। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है और उन पर जुर्माना लगाया जाता है।




कोर्ट का कहना है कि इससे प्रतीत होता है कि इस मुकदमें को सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर किया गया था। दरअसल जूही चावला ने सुनवाई का लिंक भी सोशल मीडिया पर साझा किया था। जूही की याचिका पर फैसला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इनकी याचिका में सिर्फ कुछ ही ऐसी जानकारी है जो सही है बाकी सिर्फ कयास लगाए गए हैं और संशय जाहिर किया गया है। कोर्ट ने इसके साथ ही जूही चावला से कहा कि वो इस मामले में नियमों के साथ जो कोर्ट की फीस बनती है वो भी जमा करें।

बता दें कि इससे पहले सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जे आर मिधा की पीठ ने 2 जून को मामले की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा था कि जूही चावला दोषपूर्ण हैं और ये याचिका सिर्फ मीडिया पब्लिसिटी के लिए दायर की गई। पीठ ने जूही ये भी पूछा था कि उन्होंने इस मामले में पहले सरकार के पास जाने के बजाय अदात में याचिका दायर क्यों की?

कोर्ट ने जूही चावला के सरकार को प्रतिवेदन दिए बिना 5जी वायरलेस नेटवर्क तकनीक को चुनौती देने के लिए सीधे अदालत आने पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति जे आर ने कहा कि जूही चावला और दो अन्य लोगों को पहले अपने अधिकारों के लिए सरकार से संपर्क करने की आवश्यकता थी और अगर वहां से इनकार होता तब उन्हें अदालत आना चाहिए था।

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