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Hush Hush Web Series Review: गालियों में खोई आधी आबादी की मजबूती की कोशिश, प्राइम वीडियो की एक और अधपकी सीरीज

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 23 Sep 2022 08:08 PM IST
हश हश
हश हश - फोटो : amar ujala
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Movie Review
हश हश
कलाकार
जूही चावला , सोहा अली खान , शहाना गोस्वामी , करिश्मा तन्ना , कृतिका कामरा और विभा छिब्बर
लेखक
जूही चतुर्वेदी , आशीष मेहता और शिखा शर्मा
निर्देशक
तनूजा चंद्रा , कोपल नैथानी और आशीष पांडे
निर्माता
शिखा शर्मा , तनूजा चंद्रा और विक्रम मल्होत्रा
ओटीटी:
अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग
2/5

मनोरंजन के लिहाज ये हफ्ता दर्शकों पर काफी भारी है। सिनेमाघरों में ‘धोखा’ और ‘चुप’ नई फिल्में हैं, ओटीटी पर ‘बबली बाउंसर’, ‘हश हश’ और ‘जामताड़ा सीजन 2’ है, और इसके अलावा भी तमाम सीरीज और फिल्में हैं, जो अभी मेरी वॉच लिस्ट में शामिल नहीं हो पाई हैं। कोशिश रहेगी इनको भी एक एक कर देखने की। लेकिन, एक बात तो तय है कि मनोरंजन सामग्री का ये जो ओटीटी के आने से विस्फोट हुआ है, उससे दर्शकों का कुछ खास भला होता नहीं दिखता। टीवी चैनलों जैसा ही होता जा रहा है ओटीटी भी। दानव सा है। हर हफ्ते की इसको नई खुराक चाहिए। जो सर्वशक्तिमान इन ओटीटी में बैठे हैं, उनकी अपनी संवेदनाएं हैं। अनुभूतियां हैं और जीवन के अनुभव हैं। कम से कम हिंदी सामग्री परोसने वाले ओटीटी में कहीं कोई ऐसा शख्स नहीं है जिसके पास हिंदी के दर्शकों से सीधे संवाद का अनुभव हो। हिंदी सिनेमा की दो चार दशक की जानकारी हो या ये ही पता हो कि इस हिंदीभाषी आबादी को अच्छा क्या लगता है? सब जुआ खेल रहे हैं। कोई बादशाह पर दांव लगा रहा है तो प्राइम वीडियो ने अपने पत्ते फेंटकर इस बार सारी की सारी रानियों की ही बिसात सजा दी है अपनी नई वेब सीरीज ‘हश हश’ में।

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हश हश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किस्सा चार यारों का विद्या बालन को लेकर ‘शकुंतला देवी’, ‘शेरनी’ और ‘जलसा’ बना चुके निर्माता विक्रम मल्होत्रा ने इस बार पूरा जलसा ही हिंदी सिनेमा की हीरोइनों का सजा दिया है। बड़े परदे पर ‘जहां चार यार’ देख चुके दर्शकों के लिए ओटीटी पर ये नए चार यार हैं। गुरुग्राम की उस आबादी के ये हिस्से हैं, जिनके लिए सड़कों पर लगा जाम, महंगा होता डीजल-पेट्रोल, रुपये की गिरती साख और भी बहुत सारी रोजमर्रा की बातें मायने नहीं रखती। ऐसे खाते पीते घरों की हैं, जहां गालियां फूलों सी झड़ती हैं। एक अपराध हो गया है जिसे ‘हश हश’ करना है। एक नीरा राडिया जैसी ताकतवर लोगों के राज जानने वाली महिला है जिसके राज खुल चुके हैं। दूसरी फैशन डिजाइनर है। तीसरी की सास उसे बच्चे पैदा करने के शर्तिया नुस्खे सिखा रही है। और, चौथी कलमनवीसी से फुर्सत पाकर अपना घर चला रही है। लेकिन, जो अपराध हो गया है, उसने इन्हें जिंदगी की ऐसी चौसर पर ला पटका है जहां कब कोई आकर उन्हें ठोकर लगा जाए, इन्हें खुद नहीं पता।

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हश हश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आधी आबादी का आधा फसाना वेब सीरीज ‘हश हश’ में परदे पर दिखने से लेकर इसे बनाने वालों तक में महिलाओं की ही भरमार है। ऐसी तकनीकी टीम देखकर उम्मीद बंधती है कि अब होगा बढ़िया वाला खेल शुरू। खेल शुरू होता भी बहुत बढ़िया तरीके से है। कहानी का 1978 में बंधा सिरा धीरे धीरे वहां तक आता है जहां मामले की तहकीकात करने एक मजबूत सी दिखती महिला पुलिस अफसर आ जाती है। उसकी अफसर उससे खुर्राट महिला है। मामला अच्छा जमता है। और, फिर बीच में एक और महिला आ जाती है। पहले से ‘पेज 3’ जैसी होती जा रही सीरीज में अब अमीरी और गरीबी के बीच के ‘चीरहरण’ भी आ जुड़ते हैं। बेसहारा बेटियों को पनाह देने के किस्से हैं और जाहिर है जब बात यहां तक आ पहुंची है तो फिर बिहार के वैसे किस्सों तक भी जाएगी ही जैसे किस्सो ने एक महिला छात्रावास से होने वाले देह कारोबार की खुली कड़ियों ने पूरे देश को हिला दिया था।

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हश हश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आधी हकीकत की अधपकी कोशिश मामला हर बार इस तरह के ‘हश हश’ ही कर दिए जाते हैं। कुछ दिन मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। टीवी न्यूज चैनल वाले पगलाए से रहते हैं और फिर कोई दूसरी सुर्खी पाकर नई राह पर निकल जाते हैं। ‘फॉलोअप’ अब पत्रकारिता में कम ही लोग कर रहे हैं। यहां ओटीटी सीरीज में भी सब कुछ इसी ढर्रे पर आ गया है। कुछ दिनों की होर्डिंग, टीजर, ट्रेलर, पोस्टर, इंटरव्यू, मिलियन व्यूज का हल्ला और फिर अगले हफ्ते फोकस किसी दूसरी सीरीज पर। यहां फिलहाल फोकस सबसे ज्यादा जूही चावला और सोहा अली खान पर दिखता है लेकिन दोनों ही अपने अभिनय से सबसे ज्यादा निराश करती हैं। जूही चावला बार बार माधुरी दीक्षित जैसे किरदार ओटीटी पर पाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बात बनती दिख नहीं रही।

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हश हश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आखिर तक आते आते बिखरा रायता वेब सीरीज ‘हश हश’ में इन दोनों मुख्य कलाकारों से बढ़िया काम इनकी दूसरी कतार की सखियों ने किया है। करिश्मा तन्ना सबसे ज्यादा चमकती हैं। उनका बोलने का लहजा भले खटकता हो पर काम उनका अच्छा है। शहाना गोस्वामी और कृतिका कामरा ने अपने लिए ओटीटी पर सही जगहें बना ली हैं। दोनों का काम यहां भी अच्छा है। लेकिन, कलाकारों की इस भीड़ में कहानी शुरुआती एपीसोड के बाद एक बार जो बिखरनी शुरू होती है तो सातवें एपिसोड तक आते आते इसका रायता हो ही जाता है। हो सकता है लिखने वालों का आपस में सामंजस्य न बन पाने की दिक्कत रही हो लेकिन इस कहानी की कई क्षेपक कथाएं ऐसी हो सकती थीं जो दर्शकों की दिलचस्पी इसमें आखिर तक बनाए रखतीं। बाकी कैमरा, सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम सब अब ऐसी सीरीज में एक जैसी ही दिखने लगी है। प्राइम वीडियो को हिंदी में अपनी मजबूती बनाए रखने के लिए कामकाजी महिलाओं की कुछ और दिलचस्प कहानियां चुनने की जरूरत ये सीरीज देखने के बाद लगती है।
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