The Empire: रिलीज के बाद से गूगल पर ढूंढे जा रहे बाबर-हुमायूं, जानें वेब सीरीज से क्या है इनका कनेक्शन?

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Sat, 28 Aug 2021 03:17 PM IST
द एम्पायर पोस्टर
द एम्पायर पोस्टर - फोटो : अमर उजाला मुंबई
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डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज हुई वेब सीरीज द एम्पायर इन दिनों काफी चर्चा में है। इसमें कुणाल कपूर, शबाना आजमी, राहुल देव, दृष्टि धामी और डीनो मोरिया मुख्य भूमिका में हैं। द एम्पायर सीरीज एलेक्स रदरफोर्ड के छह ऐतिहासिक उपन्यासों की सीरीज ‘एंपायर ऑफ द मुगल’ की पहली कड़ी ‘राइडर्स फ्रॉम द नॉर्थ’ पर आधारित है।इसकी शुरुआत पानीपत की पहली लड़ाई 1526 से होती है, जहां बाबर अपनी जिंदगी के सफर को याद कर रहा है। कुणाल कपूर बाबर की दमदार भूमिका में हैं। उनपर यह किरदार काफी सूट कर रहा है। वहीं शबाना आजमी एसान दौलत के किरदार में खूब जंच रही हैं।
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लोदी वंश के अंत के साथ पड़ी मुगल साम्राज्य की नींव
पानीपत के पहली लड़ाई ने ही भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी। यह लड़ाई दिल्ली के लोदी वंश के सुल्तान इब्राहिम लोदी और बाबर के बीच लड़ी गई थी। इस लड़ाई में बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी की विशाल सेना को हराया था। Empire की रिलीज के बाद लोग बाबर-हुमायूं के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं।

दृष्टि धामी, कुणाल कपूर द एम्पायर में
दृष्टि धामी, कुणाल कपूर द एम्पायर में - फोटो : अमर उजाला मुंबई
बाबर का उत्तराधिकारी हुमायूं
पानीपत के पहले युद्ध ने मुगल साम्राज्य की नींव स्थापित की थी। इस लड़ाई में इब्राहिम लोदी और उनके 15,000 सैनिक मारे गए। बाबर 12 साल की उम्र में राजा बना था और मरते दम तक युद्ध में जुटा रहा। उनकी जिंदगी में उसकी मां बहन और नानी का गहरा असर था। इस सीरीज में बाबर की बहन खानजादा बेगम का किरदार दृष्टि धामी ने निभाया है। बाबर ने भारत पर पांच बार आक्रमण किया। बाबर का उत्तराधिकारी हुमायूं हुआ। हुमायूं का शासन अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के हिस्सों में रहा। 

मुगल बादशाह अकबर।
मुगल बादशाह अकबर। - फोटो : प्रयागराज
चौसा का युद्ध हुमायूं के जीवन की महत्वपूर्ण घटना है। इस युद्ध में हुमायूं की हार हुई थी। हुमायूं और शेरशाह के बीच यह लड़ाई 26 जून, 1539 को हुई थी। इस युद्ध में हुमायूं अपनी जान बचाने के लिए भाग निकला। सिंध से होते हुए हुमायूं अफगानिस्तान पहुंचा। यहां उसने दोबारा अपनी सेना बनाई। उधर 1554 में इस्लाम शाह को हराकर सिकंदर शाह सूरी ने दिल्ली की गद्दी पर कब्जा कर लिया था। मौका देखकर हुमायूं ने दिल्ली पर चढ़ाई कर दी और दोबारा गद्दी हथिया ली। मुगल ताकतवर थे, पर दोनों तरफ से दुश्मनों से घिरे थे। पूर्व में बिहार और पश्चिम में गुजरात पर अफगानों का कब्जा था। हुमायूं के बाद अकबर आया, उसके बाद उसका पुत्र जहांगीर, उसके बाद शाहजहां और फिर औरंगजेब। अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर थे। सभी ने अपने अपने हिसाब से शासन किया। 

इतिहास में मुगल बादशाहों में जो शोहरत अकबर ने कमाई वो किसी दूसरे मुगल शासक ने नहीं कमाई। मध्यकालीन भारत का एक दिलचस्प तथ्य यह है कि मुगल बादशाहों और राजपूतों ने मिलकर काम किया। कोई किसी से नहीं हारा। अकबर ने मुगल शक्ति का भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में विस्तार किया। उसने हिंदू-मुस्लिम संप्रदायों के बीच की दूरियां कम करने के लिए दीन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की। मुगलों में सबसे कट्टर शासक औरंगजेब को माना जाता है।
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