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Bunty Aur Babli 2 Review: ‘बंटी और बबली 2’ में ठगी के डबल धमाल का डबल मजा, खूब याद आए छोटे बड़े बच्चन

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 19 Nov 2021 03:41 PM IST
बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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Movie Review
बंटी और बबली 2
कलाकार
सैफ अली खान , रानी मुखर्जी , सिद्धांत चतुर्वेदी , शरवरी वाघ , पंकज त्रिपाठी , असरानी , प्रेम चोपड़ा और शशि वर्मा
लेखक
वरुण वी शर्मा और आदित्य चोपड़ा
निर्देशक
वरुण वी शर्मा
निर्माता
आदित्य चोपड़ा
थिएटर
थिएटर
रेटिंग
2.5/5
साल 2005 शहर कानपुर और फिल्म ‘बंटी और बबली’ में दिखी ठग्गू के लड्डू की दुकान। निर्देशक शाद अली का कानपुर से नजदीक का नाता था और कानपुर व आसपास के इलाकों की मिट्टी की महक से ये फिल्म खूब गमकी। तब से 16 साल बीत गए। बबली का शुरु किया शॉर्ट कुर्ती का ट्रेंड घर घर पहुंच चुका है। और, अब वह फुरसतगंज की रानी है। पति का पेट निकल आया है। फिटनेस के मामले में दोनों फिसड्डी ही लगते हैं। निर्देशन इस बार भी कानपुर से ही ताल्लुक रखने वाले वरुण वी शर्मा के पास है। फिल्म का नाम है ‘बंटी और बबली 2’ और इस बार भी तंज यूपी पर करारा है। जो समझ सके उसके लिए इशारा है और जो न समझे तो फिल्म तो यशराज फिल्म्स की है ही। बीते साल यशराज फिल्म्स 50 साल का हुआ तो फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ से ही इस जश्न की शुरुआत होनी थी, लेकिन अटकते लटकते फिल्म अब जाकर रिलीज हुई है तो यशराज की स्थापना का गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन यहीं से शुरू माना जा सकता है।
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बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपनी कद-काठी, रंग-रूप और आवाज से हिंदी सिनेमा की नायिकाओं का बनाया हर फॉर्मूला ध्वस्त कर चुकीं रानी मुखर्जी को इस साल फिल्मों में आए 25 साल पूरे हो रहे हैं। तारीफ की जानी चाहिए कि बड़े परदे पर उन्हें पसंद करने वालों की संख्या अब भी कम नहीं हुई है। हां, फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ देखकर ये जरूर लगता है कि यशराज फिल्म्स की क्रिएटिव टीम का शायद उन पर भरोसा डिगने लगा है। फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां इसकी प्रीक्वेल में इसकी खिचड़ी पकी थी। छोटे शहरों से झोला उठाकर अपनी तदबीर से अपनी तकदीर बदलने का इरादा रखने वाले युवाओं के राह से भटकने, उसमें खूब मस्ती से जीने का अपना एक अलग टशन है। सीनियर बंटी और बबली जब सब कुछ छोड़ चुके थे तो इन हाइवे साइड के नए बंटी और बबली ने उनका नाम खराब करना शुरू कर दिया है। शेक्सपीयर भले कहें कि नाम में क्या रखा है लेकिन बात यशराज फिल्म्स की हो तो फिर सब कुछ तो नाम ही हैं।

बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ का डीएनए बहुत मजबूत है। रानी की मानें तो इसकी सीक्वेल पहली फिल्म के तुरंत बाद ही बननी थी। लेकिन फिर उसके निर्देशक शाद दूसरी चीजों में व्यस्त हो गए और तब सोची गई कहानी अब जाकर बनी है। रानी और सैफ दोनों का ये फिल्म करने के पीछे तर्क एक ही है कि ऐसी पारिवारिक मनोरंजक फिल्में बननी ही चाहिए जिन्हें परिवार के सारे लोग एक साथ बैठकर देख सकें। उस पैमाने पर फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ पास है। मनोरंजन तो इसमें भरपूर है। बस इसे बनाने वालों का अपनी कहानी पर भरोसा बीच बीच में डिगता दिखता रहा है। फुरसतगंज से लेकर अबूधाबी तक डोलने वाली ठगों की इस कहानी की पटकथा थोड़ा और चुस्त होती तो शायद इसका परिणाम धमाकेदार होता।

बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वरुण वी शर्मा ने फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ की कहानी गढ़ते समय शायद बीते 15 साल में आए डिजिटल बदलाव के अलावा उत्तर भारत के लोगों औऱ उनके रहन सहन में आए बदलाव पर ध्यान नहीं दिया। अब इधर के लोग 50 के होने पर भी 25 के लोगों जितने ही स्मार्ट रहते हैं। पेट अंदर, सीना बाहर। अभिषेक के छोड़े रोल में सैफ इसी खांचे के जरिए फिट होने की कोशिश भी करते हैं। उनके रानी मुखर्जी के साथ के सीन कमाल गढ़े गए हैं। ये जोड़ी ही फिल्म की जान है लेकिन पता नहीं निर्देशक वरुण वी शर्मा को क्यों बार बार ये लगता रहता है कि सिद्धांत और शरवरी ही फिल्म का बेड़ा पार लगाने में उनकी मदद कर सकते हैं। इस चक्कर में फिल्म यहां वहां डोलती रहती है।

बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
काम सिद्धांत और शरवरी ने भी अपना कमाल ही किया है। शरवरी के लिए फिल्म ड्रीम लॉन्चपैड भले न साबित हो लेकिन उनकी काबिलियत की छाप दर्शकों पर पड़ चुकी है। उनकी संवाद अदायगी में अभी सफाई आनी बाकी है। तमाम ट्रेनिंग के बाद भी उनका मराठी लहजा पकड़ आता है। सिद्धांत का काम भी अच्छा है। वह कूल ड्यूड वैसी भी दिखते ही हैं। फिल्म में उनके किरदार में उनके अपने रंग भी खूब फबते हैं। वरुण ने फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में सहायक कलाकारों की जो फौज खड़ी की है, उनका चुनाव थोड़ा बेहतर हो सकता था। शाद अली की ‘बंटी और बबली’ का एक और प्लस प्वाइंट था, उस फिल्म का म्यूजिक।

बंटी और बबली 2
बंटी और बबली 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमिताभ भट्टाचार्य ने ‘बंटी और बबली 2’ में गुलजार सा जादू बनाए रखने की कोशिश भरपूर की है लेकिन यूपी की ठसक का वो मजा इस बार इसके म्यूजिक में नहीं है। खाली वक्त हो तो उसमें एक बार ये फिल्म देखी जा सकती है। हां, फिल्म के दौरान बड़े और छोटे बच्चन दोनों खूब याद आए। ऐश्वर्या के कजरारे का जिक्र भी यहां है लेकिन वरुण वी शर्मा को उसकी अहमियत समझना अभी बाकी है।
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