लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Maja Ma Movie Review and Rating in Hindi Madhuri Dixit Gajraj Rao Ritwik Bhowmik Simone Singh Rajit Barkha

Maja Ma Review: कमजोर किरदार ने तोड़ दिया माधुरी का सारा तिलिस्म, प्रौढ़ वर्ग की पसंद पर बहस से चूकी ‘मजा मा’

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:49 AM IST
मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
Movie Review
मजा मा
कलाकार
माधुरी दीक्षित , गजराज राव , ऋत्विक भौमिक , बरखा सिंह , रजित कपूर , शीबा चड्ढा , निनाद कामत , केविन दवे और सिमोन सिंह आदि
लेखक
सुमित बथेजा
निर्देशक
आनंद तिवारी
निर्माता
अमृतपाल सिंह बिंद्रा
रिलीज डेट
06 अक्तूबर 2022
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग
2/5

‘मजा मा’, गुजराती में इसका मतलब होता है कि मजे में हूं यानी सब ठीक है। आमतौर गुजराती दोस्तों से हालचाल पूछने के लिए मुंबई में गैर गुजराती लोग पूछते हैं कि ‘सू छे?’ यानी कि कैसा है सब कुछ? जवाब है, ‘मजा मा’। विदेशी कंपनियों के ओटीटी देश के सुदूर क्षेत्रों में अपनी पहुंच बनाने के लिए ऐसी कहानियां दिखना चाहते हैं जिसमें बदलते भारत की खुशबू रची बसी हो। कभी वे दक्षिण जाते हैं, कभी पूरब और उत्तर और इस बार उनके फोकस में है पश्चिम यानी गुजरात और दुनिया भर में बसे यहां के गुजराती परिवार। परंपरागत रूप से उत्सवधर्मी इस समुदाय का उल्लास, इनके रीति रिवाजों के रंग और इनकी पारिवारिक सम्बद्धता लोगों को लुभाती है। फिल्म ‘मजा मा’ पहली नजर में गुजराती फिल्म ही लगती है। एक गुजराती फिल्म में माधुरी दीक्षित, क्या ही आकर्षण है किसी फिल्म का! लेकिन, फिल्म हिंदी में है। और, जैसे ही इसे बनाने वालों ने गुजराती पृष्ठभूमि के एक मूल विचार को सार्वभौमिक बनाने की कोशिश की, साथ में ही चली आईं वे तमाम बंदिशें जो इसे बनाने वालों ने ओटीटी पर भी गले लगाए रखीं। मामला यहीं लड़खड़ा गया।

मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नए दौर की अधोगामी कहानी
कहानी साल 2022 में दिखाई जा रही है। फिल्म ‘मजा मा’ में न्यू मिलेनियल्स जैसा सब कुछ है। अमेरिका में बसे धनाढ्य दंपती को अपनी बेटी के लिए एक संस्कारी, पारंपरिक और कुंवारा लड़का चाहिए। वह उनकी बेटी से धन दौलत के लिए तो शादी नहीं कर रहा, ये जानने के लिए संभावित वर का ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ होता है। प्रेम अंधा होता है लेकिन बिना रीढ़ का भी होता है, ये फिल्म ‘मजा मा’ इस दृश्य से स्थापित करने की कोशिश करती है। खैर, मामला अमेरिका से गुजरात आता है। ‘ऑथेंटिक’ और ‘रूटेड’ फैमिली तलाश रहे अमेरिकी दंपती को इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी ‘वर्जिन’ है। वह रजस्वला स्त्री के हाथों से चाय तक नहीं पीते। प्रगतिवादी सिनेमा होने की कोशिश करते करते फिल्म ‘मजा मा’ एकदम से सिर के बल खड़ी हो जाती है। और, इसके बाद जमाना वायरल वीडियो देखता है। बेटे की मां खुद को ‘समलैंगिक’ बताती है। शादी के 30 साल बाद वह यह बात अपनी बेटी से कहती है। बेटी समलैंगिक और अन्य लैंगिक पसंद वालों की हिमायती है। कुछ अलग सा बनाने के चक्कर में इसके रचयिता आनंद तिवारी मनोरंजन की धारा से कहीं दूर बह जाते हैं।

मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आनंद तिवारी की निर्देशकीय सोच पर सवाल
फिल्म ‘मजा मा’ के निर्देशक आनंद तिवारी सुलझे हुए फिल्मकार लगते हैं। अभिनय वह अच्छा करते हैं। बतौर रचनाकार ‘लव पर स्क्वायर फिट’ और ‘बंदिश बैंडिट्स’ में उन्होंने नए दौर की मनोरंजक कहानियों को कहने की एक नई उम्मीद भी जगाई। लेकिन फिल्म ‘मजा मा’ उनके निर्देशकीय दृष्टि से ज्यादा उनकी नए दौर की समझ पर सवाल उठाती है। कौन सा बेटा अपनी मां को इसलिए ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ के लिए राजी करना चाहेगा कि उसकी शादी एक धनाढ्य परिवार में हो ही जाए। या फिर कि कौन सा पिता साल 2022 में ऐसा होगा जिसे ‘वर्जिन’ शब्द का मतलब न पता हो। मणिरत्नम की हीरोइन ‘दिल से’ में 24 साल पहले हीरो से पूछ चुकी है, ‘आर यू वर्जिन’? समस्या यहां बदलते देश के दिल की धड़कन न पहचानने की है। ‘लव शव ते चिकन खुराना’ से लेकर ‘जुग जुग जियो’ और ‘मजा मा’ तक इसके लेखक सुमित की सुई एक ही जगह अटकी है और म्यूजिक ऐप्स के जमाने में वह वही पुराना रिकॉर्ड बजाते जा रहे हैं।

मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
प्रौढ़ वर्ग की यौन पसंद पर बहस से चूकी फिल्म
सिनेमा के तौर पर फिल्म ‘मजा मा’ एक बेहतरीन कोशिश हो सकती थी, नई पीढ़ी के युवाओं की यौन पसंद पर सवाल उठाती रही पिछली पीढ़ी को केंद्रबिंदु में लाने की। समलैंगिकता या दूसरी यौन पसंद कोई बीस-तीस साल में ही मनुष्य जीवन में नहीं आई हैं। ये मनुष्य के अस्तित्व में आने के समय से है, लेकिन इस पर इतना खुलकर बात कभी नहीं हुई। लेस्बियन और गे से शुरू हुई शब्दावली लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर (एलजीबीटीक्यू) तक होते हुए अब एलजीबीटीक्यूआईए प्लस तक आ गई है, आई माने इंटरसेक्सुअल और ए माने एसेक्सुअल। जी हां, ध्यान रखिएगा फिल्म ‘मजा मा’ वयस्कों के लिए बना सिनेमा है। और, इसमें दो ‘बहनों’ के पति गोलगप्पे की दुकान पर यौन संबंधों पर सरे बाजार चर्चा करते भी दिखते हैं। समलैंगिकता दिखाने के लिए भी जो संदर्भ बिंदु फिल्म में इस्तेमाल किया गया है, वह वैसा ही भोंडा है जैसा हाल में आई हिंदी फिल्म ‘हिट द फर्स्ट केस’ में दिखा था।

मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
टूट ही गया माधुरी का तिलिस्म
समलैंगिकता या दूसरे यौन संबंधों पर बात करना और इस वर्ग की भावनाओं को समझना आसान नहीं है। और, जरूरी ये भी नहीं कि इस समुदाय से होने वाला ही इन्हें ढंग से समझ पाए। इस सारे मंथन का असल अमृत यही होना चाहिए कि जो जैसा है, उसे वैसे ही जीने की आजादी होनी चाहिए। लेकिन, फिल्म ‘मजा मा’ ये मूल संदेश देने में विफल है। चर्चाओं के मुताबिक हाल ही में माधुरी दीक्षित ने 48 करोड़ रुपये का घर मुंबई में खरीदा है। अगर वे पैसे के लालच में खुद को मिल रही किसी भी तरह की फिल्म और ‘मजा मा’ सरीखा सिनेमा कर रही हैं, तो ये उनके आभामंडल को ही क्षीण करता जाएगा। माधुरी की पहचान हिंदुस्तानी घरों में ‘बेटा’, ‘प्रेम प्रतिज्ञा’ और ‘मृत्युदंड’ जैसी फिल्मों ने एक कद्दावर अभिनेत्री की बनाई है, अच्छा यही होता कि वह इसे फिल्म ‘मजा मा’ जैसी अधपकी कहानी में कमजोर न करतीं।

मजा मा
मजा मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अधपके किरदारों का बेमजा पकवान
फिल्म ‘मजा मा’ के किरदार भी सारे अधपके ही हैं। गजराज राव को माधुरी का हीरो बनने का मौका मिला, उनके लिए उनके जीवन की यही सबसे बड़ी उपलब्धि रही। परदे पर वह किस विदूषक का चरित्र कर रहे हैं, उसकी तरफ उनका ध्यान ही नहीं गया। नकली से लगते अमेरिकी अंदाज वाले उच्चारण की अंग्रेजी बोलते रजित कपूर, शीबा चड्ढा और बरखा सिंह हास्यापद लगते हैं। अमेरिका में बरसों से बसे भारतीयों से बात होने पर ऐसी अंग्रेजी बोलने वाले की तलाश मुझे भी अक्सर रहती है। काश! एक बॉब या एक पैम मेरे परिचितों में भी होता। युवा कलाकारों में ऋत्विक भौमिक और बरखा सिंह बात बात पर उंगली पर उंगली चढ़ाकर सिर्फ अपने कमजोर आत्मविश्वास को ही दिखाते नजर आते हैं। स्मृति श्रीवास्तव का किरदार फिल्म का उत्प्रेरक हो सकता था लेकिन यहां भी आनंद तिवारी गोता लगा गए हैं। नवरात्रि के ठीक बाद रिलीज हुई फिल्म ‘मजा मा’ के संगीत से बहुत उम्मीदें थी लेकिन पूरी फिल्म में एक भी गाना ऐसा नहीं है जो अगले साल गरबा पर बजने की संभावना जगाता हो।

विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00