यूपी पंचायत चुनाव: 200 ग्राम प्रधानों को शपथ के लिए करना होगा इंतजार, जानिए क्या है वजह

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 08 May 2021 11:50 AM IST

सार

गोला में 47, खजनी में 45 व कौड़ीराम व भरोहिया में 15-15 पंचायतों का गठन लटका
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीत का प्रमाणपत्र लेने के बाद महिलाएं। (फाइल फोटो)
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीत का प्रमाणपत्र लेने के बाद महिलाएं। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गोरखपुर में जीत के बाद भी जिले की 1293 ग्राम पंचायतों में से 200 से अधिक नवनिर्वाचित प्रधानों को शपथ के लिए इंतजार करना पड़ेगा। ग्राम पंचायत सदस्यों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण इन गांवों में अभी ग्राम पंचायतों का गठन ही नहीं हो पाएगा।
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किसी ग्राम पंचायत का गठन तभी हो सकता है जब उसमें न्यूनतम दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्य चुनकर आए हों। जिले में इस बार 800 से अधिक ग्राम पंचायत सदस्य के पद खाली रह गए हैं। ऐसे में गोला ब्लॉक में सर्वाधिक 47, जबकि खजनी में 45 ग्राम पंचायतों का गठन लटक गया है। गोला ब्लॉक में ऊंचागांव, दुरई, अहिरौली, बारानगर, डडिया आदि ग्राम पंचायतों में सदस्यों की संख्या दो तिहाई तक नहीं पहुंच पाई है।


वहीं कौड़ीराम में कसिहार, धौसा, तिघरा खुर्द, जगन्नाथपुर, पालीपार, बासूडीहा, वस्तूपार, टीकर, हरदिया सहित 15 ग्राम पंचायतों में यही स्थिति है। भरोहिया ब्लॉक के बारापट्टी, चौक माफी, भुइधरपुर, सांखी, मंझरिया तो पिपरौली ब्लॉक के अमटौरा, तेनुआ, तेनुअन, बांसपार, रामपुर मलौली, बरवल माफी, खरैला सेवई, जोतमामापार सहित 15 ग्राम पंचायतों में नवनिर्वाचित प्रधानों को शपथ के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इसी तरह भटहट में भी पांच ग्राम पंचायतों का गठन समय से नहीं हो पाएगा। पिपरौली के अमटौरा सहित कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां एक भी ग्राम पंचायत सदस्य नहीं चुने गए हैं। यहां से किसी ने पर्चा ही दाखिल नहीं किया था।

 

उपचुनाव होने तक प्रशासक देखेंगे काम

जिन ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो पाएगा, वहां ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या पूरी करने के लिए उपचुनाव होगा। उपचुनाव छह महीने के भीतर कराना होता है, लेकिन आमतौर पर राज्य निर्वाचन आयोग एक से डेढ़ महीने में यह प्रक्रिया पूरी करा लेता है। वहीं निर्वाचित प्रधान खुद रुचि लेकर अपने खर्च पर अपने लोगों को सदस्य पद के लिए पर्चा भरवाते हैं। जब तक इन पंचायतों का गठन नहीं हो जाता, प्रशासक ही वहां के विकास कार्य को देखेंगे।

डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि जिले में इस बार ग्राम पंचायत सदस्यों की कुल संख्या के सापेक्ष करीब 800 सदस्य कम चुने गए हैं। सदस्यों की संख्या दो तिहाई नहीं हो पाने की वजह से करीब 200 पंचायतों का गठन नहीं हो पाएगा। वहां उपचुनाव कराए जाएंगे। तब तक इन पंचायतों के प्रधान शपथ नहीं ले पाएंगे।   


 
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